मेरठ (सिटी डेस्क): उत्तर प्रदेश में ऊर्जा विभाग (Power Corporation) द्वारा चलाए जा रहे 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) अभियान को मेरठ में एक बड़े और उग्र झटके का सामना करना पड़ा है। शहर के मोहनपुरी इलाके में स्मार्ट मीटर अब सुविधा के बजाय लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत और 'आर्थिक करंट' बन चुके हैं। सोमवार को इस इलाके की महिलाओं ने विभागीय लापरवाही और मनमाने बिलिंग सिस्टम के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।READ ALSO:-मेरठ में हॉलीवुड स्टाइल में हथियारों की तस्करी: डबल बेड के नीचे खुफिया तहखाने में बन रही थीं मौत बांटने वाली पिस्टल, 11 गिरफ्तार
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गुस्से से आगबबूला महिलाओं ने न केवल अपने घरों की दीवारों पर लगे इन आधुनिक स्मार्ट मीटरों को जड़ से उखाड़ दिया, बल्कि एक जुलूस की शक्ल में मोहनपुरी बिजलीघर पहुंचकर इन मीटरों को कूड़े की तरह वहां फेंक दिया। इस घटना ने पूरे शहर के प्रशासन और विद्युत विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
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"नहीं चाहिए, नहीं चाहिए... स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए!"
\r\n\r\nसोमवार की सुबह मोहनपुरी इलाके की फिजां नारों से गूंज उठी। घरों से निकलीं महिलाओं के हाथों में कोई बैनर या तख्ती नहीं थी, बल्कि उनके हाथों में बिजली विभाग द्वारा लगाए गए काले रंग के स्मार्ट मीटर थे। "नहीं चाहिए, नहीं चाहिए स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए...!" का नारा लगाते हुए यह हुजूम सीधे मोहनपुरी सब-स्टेशन (बिजलीघर) पहुंचा।
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महिलाओं का साफ कहना था कि उन्होंने अपनी इस परेशानी को लेकर कई बार विभागीय अफसरों के दरवाजे खटखटाए, मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी एक नहीं सुनी। एसी (AC) कमरों में बैठे अधिकारियों की इसी अनदेखी ने उन्हें यह चरम कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
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आखिर क्यों फूटा महिलाओं का गुस्सा? (क्या है पूरा माजरा)
\r\n\r\nइस भारी आक्रोश के पीछे की कहानी अचानक नहीं पनपी है। यह मामला नगर निगम के वार्ड 44 में आने वाले मोहनपुरी क्षेत्र का है।
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- \r\n धोखे से मीटर बदलने का आरोप: स्थानीय निवासियों और विरोध कर रही महिलाओं का सीधा आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों और ठेकेदारों ने उन्हें धोखे में रखकर ये स्मार्ट मीटर लगाए हैं।\r\n \r\n
- \r\n झूठा आश्वासन: मीटर लगाते समय उपभोक्ताओं को यह मीठा भरोसा दिलाया गया था कि नई तकनीक वाले इन मीटरों से उनके बिजली के बिल कम हो जाएंगे, रीडिंग एकदम सटीक आएगी और उन्हें बिजली दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।\r\n \r\n
- \r\n हकीकत निकली उल्टी: लोगों का आरोप है कि मीटर लगते ही उनके बिल कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गए। जो उपभोक्ता पहले सुकून से बिजली का इस्तेमाल कर रहे थे, वे अब हर दिन अपना बैलेंस चेक करने को मजबूर हो गए हैं।\r\n \r\n
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700 रुपये का बिल पहुंचा 7000 के पार: स्मार्ट मीटर बना 'करंट'
\r\n\r\nप्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए जो आंकड़े सामने रखे, वे हैरान करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि पुराने साधारण मीटर के दौर में उनका मासिक बिल औसतन 700 रुपये से 1000 रुपये के बीच आता था। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह राशि चुकाना आसान था। लेकिन, जब से ये तथाकथित स्मार्ट प्रीपेड मीटर दीवार पर टंगे हैं, बिजली के बिलों ने रॉकेट की रफ्तार पकड़ ली है। वही बिजली इस्तेमाल करने पर अब बिल 7000 रुपये तक पहुंच जा रहे हैं। एक महीने के भीतर बिल में 10 गुना की यह वृद्धि आम आदमी की कमर तोड़ रही है।
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बार-बार कट रही बत्ती: अंधियारे में गुजर रहीं रातें
\r\n\r\nमहिलाओं की परेशानी सिर्फ भारी-भरकम बिल तक सीमित नहीं है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का सबसे बड़ा अभिशाप इसका 'रिचार्ज सिस्टम' साबित हो रहा है। महिलाओं ने बताया, "पहले महीने के अंत में बिल आता था, तो हम जैसे-तैसे पैसों का जुगाड़ करके उसे जमा कर देते थे। अगर कभी दो-चार दिन की देरी भी हो जाती थी, तो कम से कम घर की बत्ती गुल नहीं होती थी। लेकिन इन स्मार्ट मीटरों ने हमारी जिंदगी नर्क कर दी है। एक महीना भी पूरा नहीं बीतता है और बैलेंस खत्म होने के नाम पर तीन से चार बार हमारी बिजली काट दी जाती है।" पूर्व में दी गई थी चेतावनी: सुपरिटेंडेंट इंजीनियर को भेंट की थीं चूड़ियां
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सोमवार का यह मीटर उखाड़ प्रदर्शन कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। मोहनपुरी क्षेत्र की महिलाएं पिछले काफी समय से सड़क पर उतरकर इस व्यवस्था का विरोध कर रही हैं।
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- \r\n कैंप किया था बंद: हाल ही में जब विभाग ने मोहनपुरी स्थित बिजलीघर पर स्मार्ट मीटर के फायदे गिनाने और शिकायतें सुनने के लिए एक कैंप लगाया था, तो महिलाओं ने उग्र विरोध करते हुए उस कैंप को जबरन बंद करा दिया था।\r\n \r\n
- \r\n इंजीनियर को बनाया बंधक: महिलाओं का गुस्सा तब और बढ़ गया था जब उन्होंने वहां पहुंचे सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) का घेराव कर लिया था। आक्रोशित महिलाओं ने न सिर्फ उन्हें बंधक बनाया, बल्कि विरोध स्वरूप उन्हें चूड़ियां तक भेंट कर दी थीं। उसी दिन महिलाओं ने विभाग को खुली चेतावनी दे दी थी कि यदि जल्द ही इस 'स्मार्ट समस्या' का समाधान नहीं हुआ, तो वे खुद इन मीटरों को उखाड़ फेंकेंगी।\r\n \r\n
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जनप्रतिनिधियों का मिला साथ: अंशुल गुप्ता और पार्षद उत्तम सैनी उतरे समर्थन में
\r\n\r\nसोमवार को जब महिलाओं का सब्र जवाब दे गया और वे मीटर लेकर बिजलीघर पहुंचीं, तो स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उनके समर्थन में आ गए। बीजेपी नेता अंशुल गुप्ता और क्षेत्रीय पार्षद उत्तम सैनी के नेतृत्व में इस प्रदर्शन ने एक बड़ा रूप ले लिया। जैसे ही महिलाएं नारेबाजी करते हुए उग्र होने लगीं, पार्षद उत्तम सैनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने उग्र होती महिलाओं को शांत करने का प्रयास किया और बिजली विभाग के आला अफसरों से फोन पर संपर्क साधकर समस्या के तुरंत समाधान की बात कही। नेताओं का भी यही मानना है कि जनता पर इस तरह का आर्थिक बोझ डालना किसी भी लिहाज से सही नहीं है।
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अल्टीमेटम: "मीटर वहीं छोड़े, अब केवल साधारण मीटर ही लगने देंगे"
\r\n\r\nबिजलीघर में मीटरों का ढेर लगाने के बाद महिलाओं ने साफ ऐलान कर दिया है कि वे अब किसी भी कीमत पर अपने घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगने देंगी। उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाना बंद कर दिया है और फैसला अपने हाथ में ले लिया है।
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वापस लौटते समय महिलाओं ने विभाग को सख्त अल्टीमेटम दिया: "हमने अपने मीटर उतार कर यहां सौंप दिए हैं। अब हमारे घरों में केवल पुराने वाले साधारण मीटर (Postpaid Meters) ही लगाए जाएंगे। अगर विभाग ने जबरदस्ती की, तो धीरे-धीरे मोहल्ले के अन्य परिवार और पूरा शहर भी यही रास्ता अपनाएगा और सारे स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजलीघर के बाहर फेंक दिए जाएंगे।"
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आगे क्या? प्रशासन के लिए खड़ी हुई बड़ी चुनौती
\r\n\r\nमेरठ के मोहनपुरी इलाके की इस बगावत ने उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, लेकिन जनता के बीच इसके 'फास्ट भागने' और 'अचानक बिजली कटने' को लेकर जो खौफ और गुस्सा है, उसे दूर करने में विभाग पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है।
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अब देखना यह होगा कि मेरठ प्रशासन और विद्युत विभाग के आला अधिकारी इन महिलाओं के इस 'हल्ला बोल' के बाद क्या कदम उठाते हैं। क्या उन्हें वापस पुराने मीटर दिए जाएंगे, या फिर इस विरोध को दबाने के लिए प्रशासन कोई सख्त रवैया अपनाएगा? शहर की निगाहें अब बिजली विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.