उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, भीषण गर्मी ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है, तो दूसरी तरफ बिजली विभाग द्वारा जबरन थोपे जा रहे स्मार्ट मीटरों ने व्यापारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। मीटर की तकनीकी खामियों, बेवजह कटने वाली बिजली और सर्वर की सुस्त चाल से आजिज आकर गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को शहर के व्यापारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।READ ALSO:-मेरठ में सिलेंडर के लिए हाहाकार: तिरंगा गैस एजेंसी पर 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' जैसी कतारें, भीषण गर्मी में रात 3 बजे से खड़े लोग, फूटा गुस्सा
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उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (UP Udyog Vyapar Pratinidhi Mandal) के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में व्यापारियों ने एकजुट होकर स्मार्ट मीटर की एक प्रतीकात्मक 'शव यात्रा' (Funeral Procession) निकाली। यह अनोखा और उग्र विरोध प्रदर्शन पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनका उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन एक विकराल रूप ले लेगा।
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न्यू मोहनपुरी से उठी 'शव यात्रा', तख्तियों पर लिखे थे विरोधी नारे
\r\n\r\nविरोध प्रदर्शन की शुरुआत गुरुवार सुबह न्यू मोहनपुरी स्थित व्यापार मंडल के कार्यालय से हुई। व्यापारियों ने एक बांस की अर्थी (टिकठी) तैयार की, जिस पर एक बड़ा सा प्रतीकात्मक 'स्मार्ट मीटर' लिटाया गया था। उसे बाकायदा कफन के तौर पर कपड़ों से ढका गया और उस पर मालाएं भी चढ़ाई गईं।
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जैसे ही यह 'शव यात्रा' कार्यालय से बाहर निकली, उसमें शहर के विभिन्न बाजारों के सैकड़ों व्यापारी शामिल हो गए। सभी के हाथों में बिजली विभाग की तानाशाही और स्मार्ट मीटर के खिलाफ तख्तियां और बैनर थे। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना व्यापारियों का यह हुजूम शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ पीवीवीएनएल (PVVNL) के मुख्यालय 'ऊर्जा भवन' (Urja Bhavan) की ओर बढ़ा। रास्ते भर व्यापारियों ने "स्मार्ट मीटर वापस लो", "बिजली विभाग की तानाशाही नहीं चलेगी" और "व्यापारी एकता जिंदाबाद" के जोरदार नारे लगाए। इस दौरान राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ भी इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए उमड़ पड़ी।
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ऊर्जा भवन के सामने फूंका पुतला, कहा- "व्यापार हुआ बर्बाद"
\r\n\r\nशव यात्रा जैसे ही ऊर्जा भवन के मुख्य गेट पर पहुंची, व्यापारियों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। वहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की और अंत में आक्रोशित व्यापारियों ने उस 'स्मार्ट मीटर' के पुतले को आग के हवाले कर दिया। पुतला दहन के दौरान व्यापारियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
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प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल (Lokesh Agarwal) ने कहा कि शहर का व्यापारी पहले से ही आर्थिक मंदी और बाजार की सुस्ती से जूझ रहा है। ऐसे में यह स्मार्ट मीटर उनके लिए किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं है।
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उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "व्यापार वैसे ही मंदा है, ऊपर से यह स्मार्ट मीटर हमारी बची-खुची कमर तोड़ रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना के हजारों व्यापारियों के प्रतिष्ठानों की बिजली अचानक काट दी जाती है। जब व्यापारी परेशान होकर तुरंत अपना बिल या रिचार्ज जमा भी कर देता है, तो विभाग का 'सर्वर डाउन' (Server Down) रहता है। बिल जमा होने के बाद भी कनेक्शन वापस जुड़ने (Reconnection) में कई-कई घंटे लग जाते हैं। इस दौरान हमारा व्यापार ठप हो जाता है, ग्राहक लौट जाते हैं और गर्मी में माल खराब हो जाता है। यह सीधा-सीधा व्यापारियों का आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न है।"
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मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, कहा- "मीटर हटाना ही एकमात्र विकल्प"
\r\n\r\nपुतला दहन के बाद ऊर्जा भवन में मौजूद बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल और अन्य व्यापारी नेताओं ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन सौंपते हुए व्यापार मंडल ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यापारियों को इस उत्पीड़न से बचाने का अब सिर्फ एक ही विकल्प बचा है— "दुकानों और प्रतिष्ठानों से स्मार्ट मीटर को तुरंत हटाया जाए।" व्यापारियों ने चेतावनी दी कि वे किसी भी कीमत पर इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे और जब तक ये खामियों वाले प्रीपेड मीटर हटाए नहीं जाते, तब तक उनका यह उग्र विरोध प्रदर्शन सड़कों से लेकर ऊर्जा भवन तक अनवरत जारी रहेगा।
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क्या हैं व्यापारियों की 9 सूत्रीय मांगें? (विस्तार से समझें)
\r\n\r\nव्यापारियों ने मुख्यमंत्री को जो ज्ञापन सौंपा है, उसमें 9 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इन मांगों में स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने और उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित करने पर जोर दिया गया है:
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- \r\n अनिवार्यता खत्म हो (End Mandatory Installation): स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की जबरन अनिवार्यता को तुरंत खत्म किया जाए। यह मीटर केवल उन्हीं उपभोक्ताओं के यहां लगाया जाए जो स्वेच्छा से इसके लिए अपनी लिखित स्वीकृति (Consent) दें।\r\n \r\n
- \r\n पूरी जानकारी दी जाए (Complete Transparency): यदि कोई उपभोक्ता अपनी मर्जी से मीटर लगवाता है, तो उसे स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, टैरिफ, रिचार्ज के नियम और कट-ऑफ के बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी पहले ही दी जाए।\r\n \r\n
- \r\n 5 साल की गारंटी वाला कार्ड (5-Year Warranty): मीटर के बार-बार खराब होने या जंप करने की शिकायतें आम हैं। इसलिए, उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर के साथ 5 साल की फुल गारंटी वाला 'गारंटी कार्ड' (Warranty Card) अनिवार्य रूप से दिया जाए ताकि खराब होने पर उपभोक्ता से पैसे न वसूले जाएं।\r\n \r\n
- \r\n मौके पर ही सर्टिफिकेट (On-Spot Sealing Certificate): मीटर इंस्टॉल करते ही उपभोक्ता को मौके पर ही संबंधित ऐप की जानकारी और 'सीलिंग सर्टिफिकेट' (Sealing Certificate) प्रदान किया जाए, ताकि बाद में कोई कानूनी अड़चन या छेड़छाड़ का आरोप न लगे।\r\n \r\n
- \r\n विशेष शिकायत लैब (Special Complaint Lab): स्मार्ट मीटर से जुड़ी तकनीकी शिकायतों (जैसे- तेज भागना, ज्यादा बिल आना) की जांच के लिए हर जिले में एक 'विशेष लैब' (Special Testing Lab) तैयार की जाए। ताकि उपभोक्ता की शिकायत का तुरंत और निष्पक्ष निस्तारण हो सके।\r\n \r\n
- \r\n नए कनेक्शन में एस्टीमेट के नाम पर लूट बंद हो: नए बिजली कनेक्शन लेने वाले व्यापारियों से एस्टीमेट (Estimate) बनाने के नाम पर जो अवैध वसूली और उत्पीड़न किया जाता है, उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।\r\n \r\n
- \r\n पुराने 'पीडी कनेक्शन' की आड़ में ब्लैकमेलिंग रुके: जो कनेक्शन स्थायी रूप से कट चुके हैं (PD - Permanent Disconnection), उनकी आड़ लेकर या पुरानी रिकवरी का डर दिखाकर व्यापारियों को परेशान करना बंद किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n पोर्टल अपडेट और तुरंत बिजली बहाली (Instant Reconnection): प्रीपेड मीटर का पोर्टल इतना एडवांस होना चाहिए कि जैसे ही कोई उपभोक्ता अपना बैलेंस रिचार्ज करे या बिल जमा करे, उसकी काटी गई बिजली 'सेकेंडों' में तुरंत बहाल हो जाए। घंटों सर्वर डाउन रहने का बहाना नहीं चलेगा।\r\n \r\n
- \r\n सिक्योरिटी डिपॉजिट का हिसाब (Security Adjustment Statement): पुराने पोस्टपेड मीटर के दौरान उपभोक्ताओं ने जो 'सिक्योरिटी मनी' (Security Deposit) बिजली विभाग के पास जमा कर रखी है, प्रीपेड मीटर लगने के बाद उस पैसे को उपभोक्ता के खाते में एडजस्ट किया जाए। इसका पूरा और पारदर्शी 'अकाउंट स्टेटमेंट' (Account Statement) तैयार करके उपभोक्ता को सौंपा जाए।\r\n \r\n
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मेरठ के व्यापारियों का यह विरोध प्रदर्शन इस बात का साफ संकेत है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर जमीन पर भारी असंतोष है। अगर बिजली विभाग और सरकार ने समय रहते इन तकनीकी खामियों (सर्वर इश्यू, स्लो रीकनेक्शन, गलत बिलिंग) को नहीं सुधारा और व्यापारियों से संवाद नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैल सकता है। अब गेंद प्रशासन और ऊर्जा मंत्रालय के पाले में है कि वे इस '9 सूत्रीय' मांग पत्र पर क्या फैसला लेते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.