उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मोहनपुरी इलाके में चल रहा मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद अब पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी दांव-पेच में तब्दील हो चुका है। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्मार्ट मीटर उखाड़कर फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बलवा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस कार्रवाई ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है, वहीं बिजली विभाग ने अब प्रभावित घरों की 24 घंटे निगरानी शुरू कर दी है।READ ALSO:-गुटखा-पान मसाला खाने वालों और कंपनियों के लिए बड़ी खबर: अब नहीं दिखेंगे प्लास्टिक के पाउच, FSSAI ने पर्यावरण बचाने के लिए उठाया ये कड़ा कदम!
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मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद: आखिर क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nमेरठ के मोहनपुरी क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ता पिछले काफी समय से स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा दिखाए जा रहे कथित अधिक बिलों का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ये मीटर तेज चलते हैं, जिससे उनका बिजली का बिल अचानक बढ़ गया है। निवासियों ने इस मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद को लेकर बिजली घर से लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई थी कि उनके घरों से स्मार्ट मीटर हटाकर दोबारा पुराने मीटर लगाए जाएं, लेकिन विभाग की ओर से कोई सकारात्मक सुनवाई नहीं हुई।
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लगातार हो रही अनदेखी से आक्रोशित होकर सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने कानून हाथ में ले लिया। मजबूर होकर इन लोगों ने अपने घरों के बाहर लगे स्मार्ट मीटर खुद ही उखाड़ दिए। इतना ही नहीं, उखाड़े गए मीटरों को लेकर प्रदर्शनकारी सीधे बिजली घर पहुंचे और वहां अधिकारियों को मीटर सौंप दिए। इस घटना का संज्ञान लेते हुए विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसे सरकारी संपत्ति की क्षति मानते हुए तुरंत FIR दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए।
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गंभीर धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट: 16 महिलाएं रडार पर
\r\n\r\nबिजली विभाग के अधिकारियों ने इस घटना को विभाग की प्रतिष्ठा और सरकारी कार्य में सीधी चुनौती के रूप में लिया है। सोमवार शाम को मोहनपुरी बिजली घर के अवर अभियंता (JE) रमेश कुमार की ओर से सिविल लाइन थाने में एक विस्तृत तहरीर दी गई। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर एक अज्ञात व्यक्ति और करीब 15-16 महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जो कथित तौर पर मीटर उखाड़कर बिजली घर लाई थीं।
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मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद के तहत दर्ज की गई FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की निम्नलिखित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:
\r\n\r\n| \r\n BNS, 2023 की धारा \r\n | \r\n \r\n अपराध का विवरण \r\n | \r\n \r\n संभावित सजा/जुर्माना \r\n | \r\n
| \r\n धारा 191 (2) \r\n | \r\n \r\n बलवा करना (Rioting) \r\n | \r\n \r\n 2 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों \r\n | \r\n
| \r\n धारा 324 (4) \r\n | \r\n \r\n सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना \r\n | \r\n \r\n 2 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों \r\n | \r\n
| \r\n धारा 324 (5) \r\n | \r\n \r\n जानबूझकर संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाना \r\n | \r\n \r\n 5 वर्ष तक की जेल या जुर्माना या दोनों \r\n | \r\n
| \r\n धारा 221 \r\n | \r\n \r\n सरकारी काम में बाधा डालना \r\n | \r\n \r\n 3 महीने तक की जेल या 2500 रुपये जुर्माना \r\n | \r\n
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विभाग की सख्त निगरानी और तकनीकी जांच
\r\n\r\nपश्चिम उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) ने अब मीटर उखाड़ने वालों पर शिकंजा कसने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया है। मेरठ के मुख्य अभियंता (वितरण) रजनीकांत मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि सरकारी मीटर को उखाड़ना न केवल सरकारी काम में बाधा है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति के विनाश की श्रेणी में आता है।
\r\n\r\nविभाग ने इस मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद के समाधान के बजाय अब सख्त अनुशासन की राह चुनी है:
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- \r\n निगरानी टीमें: विभाग ने दो विशेष टीमों का गठन किया है जो उन घरों की विद्युत सप्लाई पर नजर रखेंगी जहां से मीटर उखाड़े गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n साक्ष्यों का संकलन: पुलिस विवेचना के लिए विभाग ने उन सभी लोगों की सूची और वीडियो साक्ष्य जुटा लिए हैं जिन्होंने इस आंदोलन में हिस्सा लिया था।\r\n \r\n
- \r\n विद्युत विच्छेदन की संभावना: बिना मीटर के बिजली का उपयोग अवैध माना जाएगा, और ऐसे घरों की सप्लाई पर निगरानी दल की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।\r\n \r\n
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पार्षद का ऐलान: "आर-पार की होगी लड़ाई"
\r\n\r\nदूसरी ओर, उपभोक्ताओं का पक्ष काफी आक्रामक नजर आ रहा है। इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वार्ड 44 से पार्षद उत्तम सैनी कर रहे हैं। पार्षद ने विभाग की FIR की कार्रवाई को "डराने की राजनीति" करार दिया है। उत्तम सैनी का कहना है कि जनता परेशान है और विभाग सुनवाई करने के बजाय मुकदमे दर्ज कर रहा है, लेकिन वे इससे डरने वाले नहीं हैं।
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पार्षद ने चेतावनी दी है कि अब यह मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने "आर-पार की लड़ाई" का ऐलान करते हुए कहा है कि जल्द ही पूरे मोहनपुरी इलाके में लगे स्मार्ट मीटरों को उखाड़ने का अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, इस मामले को लेकर वे उत्तर प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर से भी मुलाकात कर विभाग की कार्यशैली की शिकायत करेंगे।
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मेरठ में भड़का यह मेरठ स्मार्ट मीटर विवाद अब केवल बिजली बिलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जंग बन चुका है। एक तरफ जहां पीवीवीएनएल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और नियमों का हवाला देकर कड़ी कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में जनता विरोध की मशाल थामे खड़ी है। बलवे और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में दर्ज यह मुकदमा आने वाले दिनों में मेरठ की कानून व्यवस्था और बिजली विभाग की नीतियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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मेरठ के मोहनपुरी में स्मार्ट मीटर उखाड़ने के आरोप में 16 महिलाओं और एक अज्ञात व्यक्ति पर BNS की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। पीवीवीएनएल ने इन घरों की सप्लाई पर निगरानी के लिए टीमें लगा दी हैं, जबकि स्थानीय पार्षद ने इस कार्रवाई के विरोध में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.