उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बिजली उपभोक्ताओं के लिए 'स्मार्ट मीटर' (Smart Meter) सुविधा की बजाय एक बड़ी परेशानी का सबब बन गए हैं। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) ने जब इन मीटरों को लगाने का अभियान शुरू किया था, तब दावा किया गया था कि इससे बिजली बिलिंग में पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था बनेगी और उपभोक्ताओं को भारी सहूलियत मिलेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। स्थिति यह हो गई है कि उपभोक्ताओं के मीटर में जैसे ही 'निगेटिव बैलेंस' (Negative Balance) होता है, तो स्थानीय अधिकारियों के बिना किसी हस्तक्षेप के, सीधे लखनऊ मुख्यालय से एक क्लिक पर उनकी बिजली आपूर्ति काट दी जा रही है। एक बार कनेक्शन कटने के बाद, जब तक उपभोक्ता अपना बकाया बिल जमा नहीं कर देते, तब तक उनके घरों में अंधेरा ही रहता है।READ ALSO:-मेरठ वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: GAIL गैस ने PNG कनेक्शन किया 'फ्री', अब 30 नहीं बल्कि 7 से 15 दिन में घर पहुंचेगी पाइपलाइन!
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सोमवार को मेरठ में इसी तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के कनेक्शन अचानक काट दिए गए। भीषण गर्मी की शुरुआत में इस तरह बिना पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति ठप होते ही उपभोक्ताओं का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस विस्तृत खबर में हम आपको बताएंगे कि आखिर मेरठ स्मार्ट मीटर बिजली कटी की यह पूरी समस्या क्या है, लखनऊ से यह सिस्टम कैसे काम करता है, एडवांस पेमेंट के बावजूद लोगों की बिजली क्यों कट रही है, और अगर आपके साथ ऐसा होता है तो आपको बिजली वापस चालू (Restore) कराने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
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स्मार्ट मीटर या 'स्मार्ट आफत'? एक क्लिक पर कट रही बिजली
\r\n\r\nपश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के अंतर्गत आने वाले मेरठ और आसपास के जिलों में लाखों उपभोक्ताओं के घरों में पारंपरिक मीटरों को हटाकर नए प्रीपेड स्मार्ट मीटर (Prepaid Smart Meters) लगाए गए हैं। इन मीटरों का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी रोकना और बिलिंग प्रक्रिया को एडवांस बनाना था।
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लखनऊ से सीधा नियंत्रण (Centralized Control from Lucknow): इन स्मार्ट मीटरों की सबसे बड़ी खासियत (जो अब उपभोक्ताओं के लिए खामी बन गई है) यह है कि इनका पूरा नियंत्रण स्थानीय बिजलीघरों के पास नहीं है। ये सीधे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के लखनऊ स्थित मुख्यालय के सर्वर और 'रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम' (RMS) से जुड़े हुए हैं। जैसे ही आपके प्रीपेड स्मार्ट मीटर का बैलेंस शून्य (Zero) से नीचे जाकर 'निगेटिव' (Negative) में पहुंचता है, सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से एक कमांड जनरेट करता है। यह कमांड सीधे आपके घर में लगे स्मार्ट मीटर के रिले (Relay) को बंद कर देती है, जिससे बिजली की आपूर्ति तुरंत कट जाती है। इसमें स्थानीय अवर अभियंता (JE) या उपखंड अधिकारी (SDO) कुछ भी नहीं कर सकते हैं।
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मेरठ के उपकेंद्रों पर फूटा उपभोक्ताओं का गुस्सा: भारी हंगामा
\r\n\r\nसोमवार का दिन मेरठ के कई इलाकों के लिए बेहद भारी रहा। जब एक साथ सैकड़ों घरों की बत्ती गुल हो गई, तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा। माधवपुरम, गंगानगर और मेजर ध्यानचंद नगर जैसे पॉश और रिहायशी इलाकों के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों के बिजली उपकेंद्रों (Sub-stations) का घेराव कर लिया।
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अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब - "हम कुछ नहीं कर सकते" हंगामे के दौरान जब उपभोक्ताओं ने बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों से कनेक्शन कटने की शिकायत की, तो उन्हें एक ही जवाब मिला— "हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। स्मार्ट मीटर लखनऊ से संचालित हैं, कमांड वहीं से आती है।" इस बेरुखी और लाचारी ने उपभोक्ताओं के गुस्से को और भड़का दिया।
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गंगानगर के दोनों बिजली उपकेंद्रों पर सोमवार दोपहर बाद से शुरू हुआ हंगामा देर रात तक जारी रहा। बिजली कटने की शिकायत लेकर पहुंचे कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उपकेंद्र पर जिम्मेदार कर्मचारी नदारद मिले, जिससे उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं था। जब स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया, तब जाकर भीड़ कुछ शांत हुई, लेकिन घरों में बिजली न होने से पूरी रात परेशानी में गुजरी।
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एडवांस पेमेंट और सोलर पैनल होने के बावजूद कटी बिजली: सिस्टम की बड़ी खामी
\r\n\r\nमेरठ स्मार्ट मीटर बिजली कटी मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि उन उपभोक्ताओं की बिजली भी काट दी गई, जिनका बैलेंस निगेटिव नहीं था, बल्कि जिनके पैसे बिजली विभाग पर एडवांस (Advance) में जमा थे।
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केस स्टडी 1: 444 यूनिट एडवांस, फिर भी बत्ती गुल मेरठ के गंगानगर क्षेत्र निवासी अमित ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्होंने अपने घर पर 'रूफटॉप सोलर पैनल' (Rooftop Solar Panel) लगवा रखा है। उनके यहां 'स्मार्ट नेट मीटर' लगा है, जो ग्रिड को दी गई बिजली की गणना करता है। अमित के अनुसार, सोलर पैनल के माध्यम से उन्होंने ग्रिड को इतनी बिजली दी है कि विभाग पर उनकी 444 यूनिट बिजली एडवांस में जमा है। कायदे से उनका बैलेंस पॉजिटिव (Positive) होना चाहिए था, लेकिन फिर भी सर्वर की गड़बड़ी के कारण उनके घर की बिजली काट दी गई।
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केस स्टडी 2: पांच मिनट पहले मैसेज आया और अंधेरा छा गया माधवपुरम के क्षेत्रीय पार्षद दीपक वर्मा और उपभोक्ता अशोक कुमार सक्सेना ने बताया कि सोमवार शाम करीब चार बजे अचानक उनके क्षेत्र की बिजली काट दी गई। अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने अपना बिजली का बिल पहले ही जमा कर दिया था। इसके बावजूद, बिजली कटने से मात्र पांच मिनट पहले उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया जिसमें लिखा था कि "आपका बैलेंस 1111 रुपये माइनस (Negative) में है।" इससे पहले कि वह कुछ समझ पाते या विभाग से संपर्क कर पाते, उनके घर की बिजली काट दी गई।
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केस स्टडी 3: बिल में बेतहाशा बढ़ोतरी मेजर ध्यानचंद नगर निवासी सुशील क्षेत्रपाल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके खाते में 1137 रुपये का बैलेंस होने के बावजूद उनकी बिजली काट दी गई। उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले (अक्टूबर माह से पूर्व) उनका बिजली का बिल लगभग 2500 रुपये आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद यह बिल अचानक बढ़कर 3500 रुपये से अधिक आने लगा है।
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इन मामलों से स्पष्ट होता है कि UPPCL का जो सर्वर (Server) मीटरों की रीडिंग और बैलेंस अपडेट कर रहा है, उसमें भारी तकनीकी खामियां (Technical Glitches) हैं, जिसका खामियाजा ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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सर्वर डाउन: रिचार्ज करने के बाद भी नहीं आ रही बिजली
\r\n\r\nसमस्या सिर्फ निगेटिव बैलेंस होने पर बिजली कटने तक सीमित नहीं है। असली परेशानी बिजली कटने के बाद शुरू होती है। जब उपभोक्ताओं को पता चलता है कि बैलेंस खत्म होने के कारण बिजली कटी है, तो वे तुरंत UPPCL के ऐप (App) या ऑनलाइन माध्यम से अपना मीटर रिचार्ज करते हैं। लेकिन यहां भी सिस्टम उन्हें धोखा दे रहा है।
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आरएमएस (RMS) पोर्टल की लेटलतीफी: जब कोई उपभोक्ता रिचार्ज करता है, तो वह राशि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के 'रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम' (RMS) पोर्टल पर पहुंचती है। अक्सर सर्वर डाउन होने या भारी लोड के कारण, यह बिल की राशि तुरंत अपडेट नहीं होती। जब तक राशि RMS पोर्टल पर अपडेट नहीं होती, तब तक लखनऊ स्थित स्मार्ट मीटर निगरानी सिस्टम (जिसे 'इंटेल स्मार्ट मीटर' जैसी फर्म नियंत्रित करती हैं) को 'पॉजिटिव बैलेंस' की कमांड नहीं मिलती। कमांड न मिलने के कारण, उपभोक्ता द्वारा पैसे कटवाने के कई घंटों (या दिनों) बाद भी घर की बिजली चालू नहीं होती।
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इस स्थिति में स्थानीय अधिकारियों को मैन्युअल रूप से ऐसे परेशान उपभोक्ताओं की सूची बनाकर लखनऊ मुख्यालय को भेजनी पड़ती है, तब जाकर कहीं आपूर्ति बहाल हो पाती है। यह पूरी प्रक्रिया 'स्मार्ट' होने के बजाय उपभोक्ताओं के लिए 'मानसिक प्रताड़ना' बन गई है।
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अधिकारियों का क्या कहना है?
\r\n\r\nइस पूरे हंगामे और 'मेरठ स्मार्ट मीटर बिजली कटी' प्रकरण पर जब बिजली विभाग के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने अपनी तकनीकी मजबूरियों का हवाला दिया।
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पीवीवीएनएल (PVVNL) के अधिशासी अभियंता (वाणिज्य) महेश कुमार ने इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "निगेटिव बैलेंस होने पर सिस्टम द्वारा स्वतः (Automatically) बिजली काट दी जाती है। यह एक कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया है। हम उपभोक्ताओं को लगातार 'स्मार्ट मीटर ऐप' (Smart Meter App) डाउनलोड करने और उसका उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। ऐप के जरिए उपभोक्ता रोज अपना बैलेंस चेक कर सकते हैं और निगेटिव होने से पहले ही उसे रिचार्ज कर सकते हैं।" अधिशासी अभियंता ने आगे बताया कि जिन उपभोक्ताओं ने हंगामा किया था और जिनका रिचार्ज अपडेट नहीं हुआ था, उनमें से ज्यादातर उपभोक्ताओं की स्मार्ट मीटर से कटी बिजली को तकनीकी टीम की मदद से मैन्युअल कमांड देकर वापस जोड़ दिया गया है।
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उपभोक्ता इन 4 बातों का रखें खास ध्यान (Guide for Smart Meter Users)
\r\n\r\nयदि आपके घर में भी प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा है और आप ऐसी अचानक होने वाली परेशानी (Power Cut) से बचना चाहते हैं, तो बिजली विभाग द्वारा जारी किए गए इन महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों का हमेशा पालन करें:
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1. नियमित रूप से बैलेंस चेक करें: अपने स्मार्टफोन में 'UPPCL Consumer App' डाउनलोड करें। इस ऐप पर आप प्रतिदिन खर्च होने वाली बिजली की यूनिट और अपने खाते का लाइव बैलेंस देख सकते हैं। बैलेंस 500 रुपये से कम होते ही उसे तुरंत रिचार्ज कर लें।
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2. बिजली कटने पर सबसे पहले रिचार्ज करें: यदि अचानक आपके घर की बिजली चली जाए और आस-पड़ोस में आ रही हो, तो सबसे पहले अपना स्मार्ट मीटर ऐप खोलकर बैलेंस चेक करें। निगेटिव बैलेंस होना ही बिजली कटने का मुख्य कारण होता है। तुरंत ऑनलाइन पेमेंट (UPI, Credit Card, Net Banking) के जरिए पर्याप्त राशि का रिचार्ज करें।
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3. मीटर का बटन 10-20 सेकेंड तक दबाएं: आमतौर पर ऑनलाइन रिचार्ज करने के कुछ ही मिनटों बाद सिस्टम कमांड भेजता है और बिजली अपने आप चालू हो जाती है। यदि 15-20 मिनट के बाद भी बिजली चालू न हो, तो अपने स्मार्ट मीटर पर लगे 'पुश बटन' (Push Button) को 10 से 20 सेकेंड तक लगातार दबाकर रखें। यह मीटर को रीस्टार्ट (Restart) करता है और सर्वर से नया बैलेंस फेच (Fetch) करने में मदद करता है।
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4. 72 घंटे की 'अस्थायी बहाली' (Temporary Restoration) का विकल्प: यदि आपका बैलेंस निगेटिव हो गया है, बिजली कट गई है, और किसी कारणवश आप तुरंत पूरा पैसा जमा नहीं कर पा रहे हैं (जैसे रात का समय हो या बैंक सर्वर डाउन हो), तो UPPCL आपको एक आपातकालीन सुविधा भी देता है।
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- \r\n आप टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n यदि आप अपने कुल बकाए का कम से कम 50 प्रतिशत (50%) हिस्सा जमा कर देते हैं, तो आपकी बिजली 72 घंटे (3 दिन) के लिए अस्थायी रूप से बहाल (Restore) कर दी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n इन तीन दिनों के भीतर आपको अपना शेष बकाया हर हाल में जमा करना होगा, अन्यथा 72 घंटे बाद बिजली फिर से काट दी जाएगी।\r\n \r\n
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यूपी के अन्य जिलों में भी 'स्मार्ट मीटर' का आतंक
\r\n\r\nमेरठ कोई अकेला शहर नहीं है जहां स्मार्ट मीटर के कारण यह 'त्राहिमाम' मचा हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों जैसे गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली और आगरा में भी हजारों उपभोक्ता इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।
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- \r\n गाजियाबाद का तुगलकी फरमान: हाल ही में गाजियाबाद में पीवीवीएनएल मुख्यालय (मेरठ) के एक आदेश पर बिना किसी पूर्व तैयारी के एक साथ 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए थे। इनमें से कई ऐसे थे जिन्होंने एडवांस बिल जमा किया हुआ था।\r\n \r\n
- \r\n मुजफ्फरनगर और शामली: इन जिलों में भी लगभग 19 हजार प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बत्ती इसलिए गुल हो गई क्योंकि उनका बैलेंस निगेटिव था, और जब उन्होंने रिचार्ज किया तो सर्वर डाउन होने के कारण बिजली वापस नहीं आई।\r\n \r\n
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उपभोक्ता परिषदों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक UPPCL का आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर (IT Infrastructure) और सर्वर पूरी तरह से मजबूत नहीं हो जाता, तब तक 'निगेटिव बैलेंस' पर एक साथ हजारों कनेक्शन काटने की इस तानाशाही प्रक्रिया पर रोक लगानी चाहिए। सिस्टम को एक साथ हजारों कमांड प्रोसेस करने में दिक्कत आती है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
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नियामक आयोग (UPERC) का सख्त रुख और उपभोक्ताओं को रिफंड
\r\n\r\nस्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने उपभोक्ताओं के पक्ष में हाल ही में (मार्च 2026) एक बड़ा फैसला सुनाया है।
\r\n\r\nUPERC का रिफंड आदेश: आयोग ने पाया कि यूपीपीसीएल (UPPCL) और डिस्काम्स (Discoms) ने नए कनेक्शन पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं से तय दर से कहीं अधिक पैसा वसूला था। आयोग के आदेश के अनुसार, सिंगल-फेस कनेक्शन पर लगभग 3,216 रुपये और थ्री-फेस कनेक्शन पर 7,241 रुपये की अतिरिक्त और अवैध वसूली की गई थी।
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UPERC ने कड़ा संज्ञान लेते हुए यूपीपीसीएल को आदेश दिया है कि वह इस 'अतिरिक्त वसूली' की पूरी रकम (लगभग 127 करोड़ रुपये) उपभोक्ताओं को वापस करे। यह रिफंड नकद (Cash) नहीं दिया जाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं के आगामी बिजली बिलों में इसे 'क्रेडिट' (Credit) के रूप में समायोजित (Adjust) किया जाएगा। जिन प्रीपेड उपभोक्ताओं का पैसा कटा है, उनके स्मार्ट मीटर खाते में यह राशि एडवांस बैलेंस के तौर पर 1 अप्रैल 2026 से दिखाई देने लगेगी। यह आदेश उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है जो स्मार्ट मीटर के भारी भरकम खर्चों से परेशान थे।
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मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'स्मार्ट मीटर' योजना जिस उद्देश्य के साथ लागू की गई थी, वह अपने ही सर्वर और तकनीकी खामियों के जाल में उलझती हुई नजर आ रही है। मेरठ स्मार्ट मीटर बिजली कटी की घटना सिर्फ एक दिन का बवाल नहीं है, बल्कि यह उस बड़े 'सिस्टम फेलियर' की ओर इशारा करती है जहां तकनीक को बिना पूरी तैयारी के जनता पर थोप दिया गया है। निगेटिव बैलेंस होते ही लखनऊ से एक क्लिक में बिजली काटना और फिर रिचार्ज होने के बाद उसे तुरंत चालू न कर पाना, पीवीवीएनएल और यूपीपीसीएल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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भयंकर गर्मी के इस मौसम में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का बिना नोटिस के छिन जाना किसी भी उपभोक्ता के लिए मानसिक प्रताड़ना है। विभाग को चाहिए कि वह अपने सर्वर (RMS) को अपग्रेड करे और निगेटिव बैलेंस होने पर बिजली काटने से पहले उपभोक्ताओं को कम से कम 24 घंटे का ग्रेस पीरियड (Grace Period) या चेतावनी संदेश दे। वहीं, उपभोक्ताओं को भी अब पारंपरिक बिलिंग की आदत छोड़कर खुद को 'प्रीपेड सिस्टम' के लिए तकनीकी रूप से जागरूक करना होगा और यूपीपीसीएल ऐप के जरिए अपने बिजली खाते पर नजर रखनी होगी।
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सार (Summary): मेरठ में पीवीवीएनएल द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। लखनऊ स्थित सर्वर से निगेटिव बैलेंस होते ही ऑटोमैटिक तरीके से एक क्लिक पर बिजली काट दी जा रही है। सोमवार को माधवपुरम, गंगानगर सहित कई इलाकों में एक हजार से अधिक घरों की बिजली कटने से भारी बवाल हुआ। एडवांस पैसा (सोलर पैनल) जमा होने के बावजूद बिजली कटने और रिचार्ज करने पर भी सर्वर डाउन रहने के कारण आपूर्ति बहाल न होने से लोग आक्रोशित हैं। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को यूपीपीसीएल ऐप से बैलेंस चेक करने और बिजली कटने पर रिचार्ज के बाद मीटर का बटन 10-20 सेकेंड तक दबाने या 1912 पर कॉल कर 50% भुगतान के साथ 72 घंटे की अस्थायी सेवा लेने की सलाह दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.