मेरठ (Local News Desk): उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में अब जनगणना (Census) का स्वरूप पूरी तरह से डिजिटल और हाईटेक हो गया है। लंबी-लंबी कतारों, कागजी फॉर्म भरने के झंझट और प्रगणक (Enumerator) के घर आने पर घंटों समय बिताने की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए, प्रशासन ने 'ई-जनगणना' (e-Census) या 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) की शुरुआत कर दी है। अब जिले के नागरिक बिना किसी परेशानी के अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए घर बैठे अपनी और अपने परिवार की पूरी जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं।READ ALSO:-मेरठ: नगर निगम की घोर लापरवाही, शिकायतों के अंबार के बाद भी नहीं सुलझी स्ट्रीट लाइट, नाली और फॉगिंग की समस्या; लोगों में भारी आक्रोश
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इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए जिलाधिकारी (DM) ने जनपद स्तर पर एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है और नागरिकों से अपील की है कि वे इस डिजिटल पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। इसके साथ ही इस बार की जनगणना में परिवारों की गिनती के लिए एक बेहद खास 'रसोई का नियम' (Kitchen Rule) भी लागू किया गया है, जो यह तय करेगा कि एक मकान में रहने वाले लोगों को एक परिवार माना जाए या अलग-अलग। आइए इस पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।
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खुद कैसे दर्ज करें अपना ब्योरा? (Step-by-Step Online Process) मेरठ जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो भी नागरिक तकनीकी रूप से सक्षम हैं, वे जनगणना अधिकारियों का इंतजार किए बिना खुद ही अपना फॉर्म भर सकते हैं। स्व-गणना (Self-Enumeration) के लिए नागरिकों को भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाना होगा। यह वेबसाइट पूरी तरह से सुरक्षित और इस्तेमाल में बेहद आसान बनाई गई है।
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ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
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- \r\n पोर्टल पर लॉगिन: सबसे पहले नागरिक को अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में se.census.gov.in टाइप कर पोर्टल खोलना होगा।\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल और मुखिया का नाम: होमपेज पर जाते ही आपको अपना चालू मोबाइल नंबर और अपने 'परिवार के मुखिया' (Head of the Family) का पूरा नाम दर्ज करना होगा।\r\n \r\n
- \r\n ओटीपी सत्यापन (OTP Verification): मोबाइल नंबर दर्ज करते ही आपके फोन पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। इसे दर्ज करके आपका मोबाइल नंबर सत्यापित हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n जानकारी भरना: लॉगिन होने के बाद स्क्रीन पर एक डिजिटल फॉर्म खुलेगा, जिसमें आपको परिवार के सदस्यों की संख्या, उनके नाम, उम्र, पेशा और मकान से जुड़ी मांगी गई सभी जरूरी जानकारियां ध्यानपूर्वक भरनी होंगी।\r\n \r\n
- \r\n 11 अंकों की SE-ID: जैसे ही आप पूरा फॉर्म सही-सही भरकर 'सबमिट' (Submit) करेंगे, आपके मोबाइल स्क्रीन पर और एसएमएस (SMS) के जरिए 11 अंकों की एक विशेष 'SE-ID' (Self-Enumeration ID) जनरेट होगी।\r\n \r\n
- \r\n SE-ID को सुरक्षित रखें: प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस 11 अंकों की SE-ID को संभाल कर रखना बेहद जरूरी है। जब भी जनगणना कर्मचारी (प्रगणक) सत्यापन के लिए आपके घर आएगा, तो आपको सिर्फ यह आईडी उन्हें दिखानी होगी। इससे आपका और कर्मचारी दोनों का काफी समय बचेगा और दोबारा फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा।\r\n \r\n
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क्या है जनगणना का बेहद खास 'रसोई का नियम' (Kitchen Rule)? भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों (जैसे मवाना, सरधना आदि) में संयुक्त परिवारों (Joint Families) का चलन बहुत ज्यादा है। अक्सर एक ही बड़े मकान या पुश्तैनी हवेली में कई भाई अपने-अपने बीवी-बच्चों के साथ रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा भ्रम यह होता है कि जनगणना के दौरान इन्हें एक ही परिवार माना जाए या अलग-अलग?
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इस भ्रम को दूर करने के लिए जनगणना विभाग ने स्पष्ट रूप से 'रसोई के नियम' (Kitchen Rule) को लागू किया है। इस नियम के अनुसार, "एक ही रसोई में पकने वाला भोजन करने वाले सभी व्यक्तियों के समूह को एक एकल परिवार (Single Family) माना जाएगा।" सरल शब्दों में समझें तो:
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- \r\n यदि एक घर में चार भाई रहते हैं और चारों का खाना एक ही चूल्हे/रसोई पर बनता है, तो वे सभी एक ही परिवार के सदस्य गिने जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n इसके विपरीत, यदि एक ही मकान के अंदर रहने वाले दो भाइयों ने अपनी रसोई अलग-अलग कर ली है और उनका भोजन अलग-अलग चूल्हों पर पकता है, तो जनगणना के रिकॉर्ड में उन्हें दो अलग-अलग परिवार (Two separate families) माना जाएगा, भले ही वे एक ही छत के नीचे क्यों न रहते हों।\r\n \r\n
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प्रशासनिक व्यवस्था: कोई परेशानी हो तो 22 चार्ज ऑफिसर करेंगे मदद डिजिटल प्रक्रिया होने के कारण कई लोगों, विशेषकर बुजुर्गों या कम पढ़े-लिखे नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरने में तकनीकी समस्या आ सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए मेरठ जिलाधिकारी (DM) ने पूरी व्यवस्था की है।
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डीएम ने स्पष्ट कहा है कि जो लोग स्वयं यह ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते, वे बेझिझक अपने बच्चों, पढ़े-लिखे रिश्तेदारों या पड़ोसियों की सहायता ले सकते हैं। इसके बावजूद यदि किसी नागरिक को फॉर्म भरने में, वेबसाइट न चलने में या नियमों को समझने में कोई परेशानी आती है, तो वे सीधे अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और सहायता के लिए पूरे जनपद में कुल 22 चार्ज ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं।
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- \r\n नोडल अधिकारी: जिला जनगणना अधिकारी और अपर जिलाधिकारी - वित्त एवं राजस्व (ADM - Finance & Revenue) इस पूरे अभियान के मुख्य नोडल अधिकारी होंगे।\r\n \r\n
- \r\n नगर और ग्रामीण स्तर पर: जिले के सभी टाउन एरिया और नगर पालिका क्षेत्र के सभी अधिशासी अधिकारी (Executive Officers - EO) चार्ज ऑफिसर की भूमिका निभाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n तहसील स्तर पर: मवाना, मेरठ और सरधना के तीनों तहसीलदार भी चार्ज ऑफिसर के रूप में जनता की मदद के लिए उपलब्ध रहेंगे।\r\n \r\n
- \r\n शहर और कैंट क्षेत्र: मेरठ छावनी परिषद (Cantt Board) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और मेरठ नगर निगम (Nagar Nigam) के तीन जोनल अधिकारियों को भी चार्ज ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।\r\n \r\n
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उच्चाधिकारियों की निगरानी अभियान में कोई कोताही न हो, इसके लिए मवाना, मेरठ और सरधना के तीनों उपजिलाधिकारियों (SDM) को उप-क्षेत्रीय जनगणना अधिकारी (Sub-Regional Census Officers) बनाया गया है। इसके अलावा, पूरे जिले की डेटा मॉनिटरिंग के लिए नगर आयुक्त मेरठ (Municipal Commissioner) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) मेरठ को अतिरिक्त प्रमुख जनगणना अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है।
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कुल मिलाकर, मेरठ प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की है कि ई-जनगणना की यह प्रक्रिया बिना किसी बाधा के शत-प्रतिशत सफल हो सके। नागरिकों से अपील है कि वे राष्ट्र निर्माण के इस अहम कार्य में अपनी सटीक जानकारी देकर प्रशासन का सहयोग करें।
Sabse pehle comment karne wale banein.