मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) का दिल कहे जाने वाले 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market) और शास्त्री नगर इलाके में इस समय खौफ, तनाव और भारी उथल-पुथल का माहौल है। पिछले कई दिनों से जिस 'लिखित आदेश' का इंतजार प्रशासन और व्यापारी दोनों कर रहे थे, वह इंतजार अब खत्म हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) द्वारा आवासीय भूखंडों पर चल रही 44 व्यावसायिक संपत्तियों को सील करने का लिखित आदेश मंगलवार देर शाम अंततः वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।READ ALSO:-यूपी में मौसम का 'महा-तांडव': अप्रैल की तपिश के बीच सावन जैसी झड़ी, वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बर्बाद हुई फसलें, किसान खून के आंसू रोने को मजबूर!
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इस आदेश के अपलोड होते ही पूरे शहर, विशेषकर आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad), पुलिस महकमे और व्यापारी वर्ग में हड़कंप मच गया है। एक तरफ जहां प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए 'होमवर्क' में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपनी जीवन भर की पूंजी को बचाने के लिए व्यापारियों ने भी प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आपके अपने सबसे तेज और विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल 'खबरीलाल' (Khabreelal) की इस एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि कल रात से लेकर आज सुबह तक सेंट्रल मार्केट में क्या-क्या घटनाक्रम हुए और आगे के हालात कितने तनावपूर्ण हो सकते हैं।
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देर शाम आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश: खत्म हुआ सस्पेंस
\r\n\r\nदरअसल, सेंट्रल मार्केट की इन 44 दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (जिनमें स्कूल, अस्पताल और बैंक शामिल हैं) को लेकर बीते 6 तारीख को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई थी। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नियमों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए सीलिंग की कार्रवाई पर अपनी सुप्रीम मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और आवास विकास के अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की थी।
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हालांकि, व्यापारियों ने मौखिक आदेश के आधार पर कार्रवाई का कड़ा विरोध किया था और प्रशासन को तब तक सीलिंग करने से रोक दिया था, जब तक कि कोर्ट का लिखित आदेश (Written Order) प्राप्त न हो जाए। इसी लिखित आदेश का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था, जो आखिरकार मंगलवार देर शाम सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। आदेश की कॉपी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट गए और तत्काल आपातकालीन बैठकें शुरू हो गईं।
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रात 11 बजे तक कार्यालय में डटे रहे अफसर: बनी सीलिंग की रणनीति
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और लिखित आदेश हाथ में आते ही आवास एवं विकास परिषद का पूरा महकमा हरकत में आ गया। मंगलवार की रात 11 बजे तक भी परिषद के कार्यालय में भारी हलचल और लाइटें जलती हुई साफ देखी जा सकती थीं।
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सूत्रों के अनुसार, शीर्ष अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञ बंद कमरों में बैठकर आदेश की बारीकियों का अध्ययन कर रहे थे। दरअसल, आदेश आने के बाद अफसर सीलिंग से जुड़ी सभी ताजी कागजी कार्रवाई (Paperwork) और नोटिस की प्रक्रिया को रात में ही पूरा कर लेना चाहते थे, ताकि दिन निकलते ही पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर सीलिंग की कार्रवाई को बिना किसी कानूनी अड़चन के शुरू किया जा सके। प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरत कर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का जोखिम नहीं उठाना चाहता।
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व्यापारियों की आर-पार की तैयारी: रातों-रात गड़े टेंट, बिछी कुर्सियां
\r\n\r\nप्रशासन की इस गुपचुप और तेज तैयारी की भनक जैसे ही सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को लगी, उन्होंने भी ईंट का जवाब पत्थर से देने की रणनीति तैयार कर ली। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी रोजी-रोटी और बरसों की मेहनत से खड़े किए गए प्रतिष्ठानों पर इतनी आसानी से ताला नहीं लगने देंगे।
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मंगलवार की रात सेंट्रल मार्केट का नजारा किसी आंदोलन स्थल से कम नहीं था। सीलिंग टीम को रोकने और अपना शक्ति प्रदर्शन करने के लिए रातों-रात बाजार के मुख्य परिसर में विशाल टेंट लगाने का काम शुरू हो गया। भारी संख्या में व्यापारियों और उनके समर्थकों के बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था कर ली गई है। इसके अलावा, भीड़ को संबोधित करने और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए बड़े माइक सिस्टम और साउंड कॉलम भी मंगा लिए गए हैं। संयुक्त व्यापार संघ के आह्वान पर सभी छोटे-बड़े व्यापारी लामबंद हो गए हैं।
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छावनी में तब्दील हुआ बाजार: चारों तरफ लगे पुलिस बैरिकेड्स
\r\n\r\nबुधवार की सुबह सीलिंग की कार्रवाई शुरू होनी है, यह अब पूरी तरह से तय हो चुका है। ऐसे में प्रशासन को भी इस बात का पूरा अंदेशा है कि व्यापारियों का यह भारी जमावड़ा एक बड़े कानून-व्यवस्था (Law and Order) के संकट में बदल सकता है।
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किसी भी तरह के उग्र विरोध, हंगामे या पथराव की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस-प्रशासन ने पुख्ता और कड़े इंतजाम किए हैं। रातों-रात सेंट्रल मार्केट की तरफ आने वाले सभी प्रमुख रास्तों, चौराहों और गलियों पर भारी पुलिस बैरिकेड्स (Barricades) लगा दिए गए हैं। पूरे इलाके को एक पुलिस छावनी (Police Cantonment) में तब्दील कर दिया गया है। अधिकारियों का प्लान है कि अगर भीड़ बढ़ती है या हंगामा बेकाबू होता है, तो इन बैरिकेड्स को पूरी तरह से बंद करके वहां अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात कर दिया जाएगा।
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विरोध में बंद रहेगा सेंट्रल मार्केट: 'डाउनफॉल' की चर्चा तेज
\r\n\r\nसीलिंग की इस दमनकारी कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने पूरे सेंट्रल मार्केट को पूर्ण रूप से बंद रखने (Market Strike) का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। बुधवार सुबह से ही बाजार में सन्नाटा पसरा है, सिवाय विरोध कर रहे व्यापारियों की भीड़ के।
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व्यापारियों ने प्रचार के लिए विशेष गाड़ियां (ई-रिक्शा और ऑटो) भी लगाई हैं, जो पूरे बाजार और आसपास के रिहायशी इलाकों में घूम-घूमकर लाउडस्पीकर के जरिए सीलिंग के विरोध में समर्थन जुटा रही हैं। आम जनता से भी इस अन्याय के खिलाफ व्यापारियों का साथ देने की अपील की जा रही है।
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'661/6' प्रकरण की लौटी यादें: इस पूरी घटना ने लोगों के जेहन में '661/6' संपत्ति पर हुई पिछली बड़ी कार्रवाई की यादें ताजा कर दी हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का मानना है कि 661/6 पर हुई उस कार्रवाई के बाद से ही इस पूरे सेंट्रल मार्केट का 'डाउनफॉल' (पतन) शुरू हो गया था। अब जब 44 बड़ी प्रॉपर्टी (जिसमें स्कूल और अस्पताल शामिल हैं) पर सीलिंग की कार्रवाई होने की सूचना सार्वजनिक हुई है, तो लोगों में भारी हैरानी और मायूसी है।
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मंगलवार देर रात तक घरों से इवनिंग वॉक (Evening Walk) पर निकले लोग सेंट्रल मार्केट में चहल-कदमी करते और बैरिकेड्स को देखकर आपस में चर्चा करते हुए दिखे। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है— "क्या प्रशासन वाकई इन 44 प्रतिष्ठानों पर ताला जड़ देगा, या व्यापारियों का यह आंदोलन कोई नया मोड़ लाएगा?"
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