मेरठ (उत्तर प्रदेश)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र मेरठ के निवासियों और यहाँ से होकर गुजरने वाले यात्रियों के लिए बेहद राहत भरी खबर है। वार्षिक कांवड़ यात्रा के चलते पिछले 11 दिनों से प्रभावित चल रही उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) की बस सेवा अब पूरी तरह से सामान्य हो गई है। बुधवार सुबह से ही बसें अपने निर्धारित और पुराने मार्गों पर फर्राटा भरने लगी हैं।READ ALSO:-Haiwaan Teaser Out: अक्षय कुमार और सैफ अली खान ने बढ़ाई धड़कनें, साइलेंट टीजर में दिखा रोंगटे खड़े कर देने वाला साइको किलर अवतार!
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कांवड़ मेला सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद जिला प्रशासन और रोडवेज विभाग ने यातायात व्यवस्था को पूर्ववत बहाल कर दिया है। बसों का संचालन दोबारा शुरू होने से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर और उत्तराखंड जाने वाले लाखों यात्रियों को सीधी राहत मिली है। इसके साथ ही शहर के भीतर चलने वाली इलेक्ट्रिक बस सेवा भी फिर से पटरी पर लौट आई है।
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\r\n\r\n11 दिन बाद भैसाली और मेरठ डिपो में लौटी रौनक: सोहराबगेट का अतिरिक्त बोझ खत्म
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग ने शहर के यातायात में बड़े बदलाव किए थे।
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- \r\n भैसाली बस अड्डा किया गया था बंद: 1 अगस्त से शहर के मुख्य भैसाली बस अड्डे से बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया था।\r\n \r\n
- \r\n सोहराबगेट डिपो पर बदला गया था लोड: भैसाली और मेरठ डिपो की सभी बसों को गढ़ रोड स्थित सोहराबगेट डिपो में स्थानांतरित कर दिया गया था।\r\n \r\n
- \r\n लंबा चक्कर और अतिरिक्त किराया: रूट डायवर्जन के कारण बसों को लंबे और चक्करदार रास्तों से गुजरना पड़ रहा था। इसके चलते यात्रियों को न केवल यात्रा में कई घंटे अतिरिक्त बिताने पड़ रहे थे, बल्कि बढ़ा हुआ किराया भी अपनी जेब से देना पड़ रहा था।\r\n \r\n
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मंगलवार को श्रावण शिवरात्रि पर मुख्य जलाभिषेक संपन्न होने के साथ ही कांवड़ मेले का आधिकारिक समापन हो गया। जैसे ही सड़कों से कांवड़ियों की भीड़ कम हुई, मंगलवार देर रात से ही रोडवेज प्रशासन ने बसों को वापस उनके मूल अड्डों—भैसाली और मेरठ डिपो—में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया। बुधवार सुबह होते-होते भैसाली बस अड्डे पर एक बार फिर पुरानी रौनक लौट आई।
\r\n\r\n\r\n\r\nइन प्रमुख शहरों के लिए भैसाली बस अड्डे से सीधे मिलेंगी बसें
\r\n\r\nभैसाली बस अड्डा मेरठ का सबसे प्रमुख और व्यस्ततम बस टर्मिनल माना जाता है। यहाँ से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लिए दैनिक रूप से सैकड़ों बसों की आवाजाही होती है। बस अड्डा बंद रहने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करते हुए सोहराबगेट जाना पड़ रहा था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही थी।
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अब व्यवस्था बहाल होने के बाद निम्नलिखित मार्गों पर बसें अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार उपलब्ध हैं:
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- \r\n राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR): दिल्ली (आनंद विहार व कश्मीरी गेट), गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा।\r\n \r\n
- \r\n पश्चिम यूपी के जिले: शामली, बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद।\r\n \r\n
- \r\n उत्तराखंड मार्ग: देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और ऋषिकेश जाने वाली बसें भी अब अपने सामान्य मार्ग से संचालित हो रही हैं।\r\n \r\n
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रोडवेज प्रबंधन का क्या है कहना? (क्षेत्रीय प्रबंधक का आधिकारिक बयान)
\r\n\r\nबसों के संचालन और व्यवस्था को दोबारा सामान्य बनाने के संबंध में जानकारी देते हुए रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) दीपक चौधरी ने बताया:
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\r\n\r\n\r\n"कांवड़ मेला सफलतापूर्वक और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया है। सड़कों पर पुलिस प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरियर हटा दिए गए हैं और यातायात की स्थिति सामान्य हो चुकी है। हमने निर्देश जारी कर सभी डिपो की बसों को उनके पुराने निर्धारित मार्गों पर भेज दिया है। मंगलवार रात से ही बसों की शिफ्टिंग शुरू कर दी गई थी। बुधवार सुबह से 90% से अधिक संचालन सामान्य हो चुका है और बुधवार देर शाम तक सभी व्यवस्थाएं 100% पूर्ववत बहाल हो जाएंगी।"\r\n
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रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, डायवर्जन समाप्त होने से अब यात्रियों को न तो अतिरिक्त समय लगेगा और न ही बढ़ा हुआ किराया देना पड़ेगा। टिकट की दरें भी पुरानी सामान्य दरों पर आ गई हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\nमहानगर में राहत का सफर: 11 दिन बाद फिर दौड़ीं पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा का प्रभाव केवल अंतरराज्यीय और अंतरजिला बसों पर ही नहीं पड़ा था, बल्कि मेरठ शहर के भीतर चलने वाली स्थानीय परिवहन व्यवस्था भी पूरी तरह ठप हो गई थी। शहर के प्रमुख मार्गों पर कांवड़ियों के पैदल आवागमन के कारण प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक बसों (Eco-Friendly Electric Buses) का संचालन 11 दिनों के लिए पूरी तरह रोक दिया गया था।
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बुधवार सुबह से ही मेरठ महानगर की लाइफलाइन मानी जाने वाली इलेक्ट्रिक बसें भी सड़कों पर लौट आई हैं।
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किन वर्गों को मिला सबसे बड़ा फायदा?
\r\n\r\nइलेक्ट्रिक बस सेवा बहाल होने से शहरवासियों ने राहत की सांस ली है:
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- \r\n नौकरीपेशा लोग: दिल्ली-एनसीआर या स्थानीय दफ्तरों में जाने वाले कर्मचारियों को ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से मुक्ति मिली है।\r\n \r\n
- \r\n विद्यार्थी (छात्र-छात्राएं): स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में जाने वाले छात्रों का आवागमन अब सुगम और सुरक्षित हो गया है।\r\n \r\n
- \r\n महिलाएँ एवं बुजुर्ग: आरामदायक और वातानुकूलित सफर के लिए शहर की महिलाएँ और बुजुर्ग पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों पर निर्भर रहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n व्यापारी व खरीदार: बेगमपुल, आबूलेन, और सदर बाजार जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में ग्राहकों की आवाजाही आसान होने से स्थानीय व्यापार को भी गति मिलेगी।\r\n \r\n
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शहर का यातायात पटरी पर: जनजीवन हुआ सामान्य
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा के दौरान पूरे मेरठ शहर को एक तरह से नो-व्हीकल ज़ोन या सख्त डायवर्जन जोन में बदल दिया गया था। दिल्ली-देहरादून हाईवे (NH-58), रुड़की रोड, गढ़ रोड और हापुड़ रोड पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था।
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शिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवभक्तों द्वारा जलाभिषेक किए जाने के बाद मंगलवार मध्यरात्रि से पुलिस प्रशासन ने धीरे-धीरे सभी बैरिकेड्स हटा दिए। बुधवार की सुबह मेरठवासियों के लिए राहत भरी रही। मुख्य सड़कों पर न सिर्फ रोडवेज और इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आईं, बल्कि निजी वाहनों, ऑटो और ई-रिक्शा का आवागमन भी सुचारू रूप से शुरू हो गया है।
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कांवड़ यात्रा के सफल समापन के बाद मेरठ में जनजीवन एक बार फिर से अपनी पुरानी रफ्तार में लौट आया है। 11 दिनों के लंबे इंतजार के बाद भैसाली बस अड्डे और सोहराबगेट डिपो से पुरानी व्यवस्था के तहत बसों का संचालन शुरू होना लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। इलेक्ट्रिक बसों की वापसी ने शहर के अंदरूनी सफर को फिर से सुगम और सस्ता बना दिया है। यदि आप भी मेरठ से दिल्ली, नोएडा या आसपास के जिलों के लिए यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो अब आप बेझिझक अपने नजदीकी और पुराने बस अड्डे से यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।



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