मेरठ शहर को जाम के झाम से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने वाले एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की फाइल अब तेजी से आगे बढ़ने लगी है। भैंसाली बस अड्डे (Bhaisali Bus Stand) को शहर के बाहर शिफ्ट करने के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। मंडलायुक्त (कमिश्नर) भानु चंद्र गोस्वामी द्वारा मुआवजे की फाइल पर उठाए गए 15 तकनीकी और कड़े सवालों का जिला प्रशासन ने पुख्ता जवाब तैयार कर कमिश्नर कार्यालय को भेज दिया है। हरी झंडी मिलते ही 40 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा किसानों और जमीन मालिकों में बांट दिया जाएगा।READ ALSO:-भारतीय रेलवे का 'महाबदलाव': 15 अप्रैल से बदल जाएंगे टिकट रिफंड के नियम; देश को मिलेगी पहली हाइड्रोजन और 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ महानगर के बीचों-बीच स्थित भैंसाली बस अड्डे के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अक्सर चरमराई रहती है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए बस अड्डे को शहर की सीमा पर मोदीपुरम (Modipuram) और भूडबराल (Bhudbaral) में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके लिए युद्धस्तर पर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। लेकिन, सरकारी धन के सदुपयोग और किसी भी प्रकार के भूमि घोटाले को रोकने के लिए प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी की सख्ती: बिना जांच नहीं मिलेगा एक भी रुपया

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश शासन की मंशानुरूप मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने सख्त आदेश दे रखे हैं कि किसी भी सरकारी परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण (Land Acquisition) या सीधी खरीद करने से पहले जमीन के पुराने रिकॉर्ड की सघन चेकिंग की जाए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जब दोनों नए बस अड्डों के लिए करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे के भुगतान की फाइल कमिश्नर की अनुमति के लिए उनकी टेबल पर पहुंची, तो उन्होंने आंख मूंदकर हस्ताक्षर करने के बजाय फाइल का गहराई से अध्ययन किया। कमिश्नर ने पत्रावली पर 15 तीखे सवाल खड़े कर दिए और जिला प्रशासन से बिंदुवार जवाब मांगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्या थे कमिश्नर के प्रमुख सवाल? पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर द्वारा पूछे गए प्रमुख सवाल इस प्रकार थे:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    सरकारी जमीन की जांच: खरीदी जा रही जमीन कहीं पहले से ग्राम समाज, पट्टे या सरकारी संपत्ति तो नहीं है?
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    1359 फसली का रिकॉर्ड: जमीन का मूल रिकॉर्ड यानी 1359 फसली और पिछले 12 साला (12 Years Record) का पूर्ण सत्यापन रिपोर्ट कहां है?
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    विरासत और पट्टा: जो जमीन ली जा रही है, उसमें से कितनी भूमि पट्टे की है और कितनी भूमि विरासत (पुश्तैनी) के आधार पर दर्ज है?
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    न्यायालय में वाद: जमीन मालिकों से यह घोषणा पत्र लिया जाए कि उक्त भूमि को लेकर किसी भी सिविल या राजस्व न्यायालय में कोई विवाद (Court Case) तो लंबित नहीं है।
    \r\n
  8. \r\n
  9. \r\n
    अनुसूचित जाति की भूमि: क्या अधिग्रहीत की जा रही भूमि में अनुसूचित जाति (SC) के लोगों की जमीन शामिल है? यदि हाँ, तो क्या सक्षम अधिकारी (DM) से इसके विक्रय की वैधानिक अनुमति ली गई है?
    \r\n
  10. \r\n
  11. \r\n
    भौतिक सत्यापन: एसडीएम (SDM) के माध्यम से जमीन की भौतिक स्थिति (Physical Verification) की रिपोर्ट संलग्न की जाए।
    \r\n
  12. \r\n
  13. \r\n
    मूल्य निर्धारण: मूल्य निर्धारण समिति की बैठक, जो जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई है, उसका कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) उपलब्ध कराया जाए।
    \r\n
  14. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

लेखपालों की दौड़-भाग और जिला प्रशासन का जवाब

\r\n\r\n
मंडलायुक्त के इन कड़े सवालो के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित सदर और सरधना तहसील के लेखपालों, राजस्व निरीक्षकों और तहसीलदारों को तत्काल तलब किया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कमिश्नर के सवालों का पुख्ता जवाब तैयार करने के लिए कलक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रूम (Record Room) में पुरानी फाइलों और खतौनियों की बारीकी से जांच-पड़ताल की गई। सभी 15 बिंदुओं पर राजस्व विभाग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। एसडीएम ने खुद मौके पर जाकर जमीनों का भौतिक सत्यापन किया और यह सुनिश्चित किया कि मौके पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा या विवाद नहीं है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जिला प्रशासन ने यह रिपोर्ट कमिश्नर कार्यालय को सौंप दी है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

79 भूमि मालिकों की कटेगी जमीन, बंटेगा 40 करोड़ का मुआवजा

\r\n\r\n
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मोदीपुरम और भूडबराल में नए बस अड्डों के निर्माण के लिए कुल 79 भूमि मालिकों की जमीन ली जा रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कुल क्षेत्रफल: 39,930 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मुआवजा राशि: इस पूरी जमीन के एवज में किसानों और जमीन मालिकों को 40 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बतौर मुआवजा दी जानी है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अधिग्रहण वाले गांव: इस प्रोजेक्ट की चपेट में मुख्य रूप से चार गांवों की जमीन आ रही है— भूडबराल, सिवाया, पल्हैड़ा, और दुल्हैड़ा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इन गांवों के किसानों में मुआवजे को लेकर काफी उत्सुकता है। अब चूंकि जिला प्रशासन ने कमिश्नर के सभी सवालों के जवाब भेज दिए हैं, इसलिए माना जा रहा है कि एक या दो दिन में फाइल को मंजूरी मिल जाएगी। मंजूरी मिलते ही जमीन मालिकों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी और प्रशासन जमीन पर अपना कब्जा ले लेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्यों शिफ्ट हो रहा है भैंसाली बस अड्डा? (जाम और रैपिड रेल कनेक्शन)

\r\n\r\n
भैंसाली बस अड्डे का शिफ्ट होना मेरठ के लिए एक 'गेम चेंजर' प्रोजेक्ट है। वर्तमान में प्रतिदिन विभिन्न राज्यों (उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा) और यूपी के अन्य जनपदों से आने वाली लगभग 400 से ज्यादा बसें भैंसाली बस अड्डे पर आती हैं। इतनी भारी संख्या में भारी वाहनों के शहर के बीच (बेगमपुल, दिल्ली रोड) में घुसने से भयंकर ट्रैफिक जाम लगता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके अलावा, सबसे बड़ा कारण एनसीआरटीसी (NCRTC) का दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) और मेट्रो प्रोजेक्ट है। भैंसाली बस अड्डा और उसकी वर्कशॉप की पुरानी जमीन को रैपिड और मेट्रो रेल के भूमिगत स्टेशन निर्माण के लिए एनसीआरटीसी को सौंप दिया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एनसीआरटीसी बनाएगा नए बस अड्डे: चूंकि एनसीआरटीसी ने रोडवेज की बेशकीमती जमीन ली है, इसलिए दोनों नए हाई-टेक बस अड्डों (भूडबराल और मोदीपुरम) का निर्माण कराने की पूरी जिम्मेदारी भी एनसीआरटीसी के ही कंधों पर है। जमीन का पजेशन मिलते ही एनसीआरटीसी यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस बस टर्मिनलों का निर्माण शुरू कर देगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जिलाधिकारी का आधिकारिक बयान

\r\n\r\n
इस पूरे घटनाक्रम पर मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वी. के. सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "बस अड्डों के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन की मुआवजा राशि 40 करोड़ से ज्यादा है। नियमानुसार इसके लिए कमिश्नर महोदय की अनुमति की आवश्यकता होती है। कमिश्नर द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब प्रशासन की ओर से विधिवत दे दिया गया है। उनकी अनुमति मिलते ही तत्काल जमीन मालिकों को भुगतान कर दिया जाएगा और जमीन पर कब्जा लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ के निवासियों के लिए यह खबर एक बड़ी राहत लेकर आई है। कमिश्नर की पैनी नजर ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सरकारी पैसे का एक भी रुपया गलत हाथों में न जाए और भविष्य में जमीन को लेकर कोई कानूनी अड़चन पैदा न हो। एक बार मुआवजा बंटने और जमीन पर कब्जा मिलने के बाद, मेरठ को जाम मुक्त बनाने का सपना जल्द ही हकीकत में बदल जाएगा। भूडबराल और मोदीपुरम में बनने वाले नए बस अड्डे न सिर्फ शहर के ट्रैफिक को सुधारेंगे, बल्कि इन इलाकों में रोजगार और विकास के नए द्वार भी खोलेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन