मेरठ (Meerut Local News Special Report): दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ऊर्जा संरक्षण को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई ऊर्जा बचाने की अपील को मेरठ के शिक्षा जगत ने बेहद गंभीरता से लिया है। समाज को दिशा दिखाने वाले शिक्षण संस्थान अब सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यावहारिक रूप से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में मेरठ के जाने-माने शिक्षण संस्थान 'मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप' (Meerut Public School Group) ने एक ऐसी अनूठी और दूरदर्शी पहल की है, जो पूरे राज्य और देश के अन्य स्कूलों के लिए एक बेहतरीन 'रोल मॉडल' बन सकती है।
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ग्रुप प्रबंधन ने बढ़ती परिवहन लागत, प्रदूषण और ईंधन की बर्बादी को रोकने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसे आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरी सख्ती और अनुशासन के साथ लागू किया जाएगा। आइए, इस पूरी कार्ययोजना और स्कूल में होने वाले प्रमुख बदलावों को विस्तार से समझते हैं।
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1 जुलाई से बदलेगी शिक्षा की तस्वीर: शुरू होगी हाइब्रिड प्रणाली

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कोरोना काल (Covid-19) के बाद से ही ऑनलाइन शिक्षा का महत्व पूरी दुनिया ने समझा है। अब इसी तकनीक का इस्तेमाल ऊर्जा संरक्षण के लिए किया जा रहा है। मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप ने निर्णय लिया है कि 1 जुलाई से ग्रुप के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'हाइब्रिड मॉडल' (Hybrid Model) लागू किया जाएगा।
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    हफ्ते में 2 दिन ऑनलाइन क्लास: इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को सप्ताह के छह दिन स्कूल आने की आवश्यकता नहीं होगी। सप्ताह में कम से कम दो दिन पूरी तरह से 'ऑनलाइन क्लास' (Online Classes) का संचालन किया जाएगा। इससे न केवल हजारों बच्चों के आवागमन में लगने वाले ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और वायु प्रदूषण भी काफी हद तक कम होगा।
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    स्टाफ के लिए 'कारपूलिंग' अनिवार्य: शिक्षकों और स्कूल स्टाफ के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूल आने-जाने के लिए स्टाफ सदस्यों को अलग-अलग निजी वाहनों का इस्तेमाल करने के बजाय 'साझा वाहन' यानी कारपूलिंग (Carpooling) का प्रयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है।
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प्रधानाचार्य सपना आहूजा का बयान: सुबह 7 बजे से लगेगा स्कूल

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इस पूरे अभियान और नई व्यवस्था के बारे में मेरठ पब्लिक गर्ल्स स्कूल (शास्त्री नगर) की प्रधानाचार्य और सीबीएसई (CBSE) की मेरठ सिटी कोऑर्डिनेटर श्रीमती सपना आहूजा ने विस्तृत जानकारी साझा की।
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उन्होंने बताया कि, "यह महत्वपूर्ण निर्णय पूरी तरह से पर्यावरण की सुरक्षा, घटते प्राकृतिक संसाधनों और लागत दक्षता (Cost Efficiency) को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी शिक्षा देना नहीं है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है जो अपने पर्यावरण और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील हो।"
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समय में बदलाव और डिजिटल संचार:

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    श्रीमती आहूजा ने बताया कि 1 जुलाई से ग्रुप के सभी स्कूलों के संचालन का समय सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।
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    ऑनलाइन क्लास के साथ-साथ अब स्कूल की प्रशासनिक गतिविधियों को भी डिजिटल किया जाएगा। स्कूल स्टाफ की इंटरनल मीटिंग्स, पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM), और शिक्षकों के प्रशिक्षण सत्र (Training Sessions) भी अब फिजिकल रूप के बजाय ऑनलाइन मोड (Online Mode) में आयोजित किए जाएंगे।
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    सूचनाओं के त्वरित और पेपरलेस आदान-प्रदान के लिए स्कूल द्वारा संचालित 'व्हाट्सएप ग्रुप्स' (WhatsApp Groups) को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाया जाएगा।
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परिवहन में बड़ा बदलाव: बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर जोर

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ईंधन बचाने की इस मुहिम में परिवहन व्यवस्था में सबसे बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने सभी अभिभावकों, विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ से एक विशेष अनुरोध किया है कि वे स्कूल आने-जाने के लिए अपने निजी वाहनों (कार, बाइक, स्कूटी) का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दें या कम से कम करें।
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    बसों का उपयोग: निजी वाहनों के स्थान पर स्कूल बसों के उपयोग को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, आवश्यकता के अनुसार मौजूदा बस रूट्स (Bus Routes) का विस्तार किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे बस सुविधा का लाभ उठा सकें।
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    ईवी चार्जिंग प्वाइंट (EV Charging Points): भविष्य की तकनीक को अपनाते हुए, स्कूल परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए स्कूल कैंपस के अंदर ही 'ईवी चार्जिंग प्वाइंट' स्थापित किए जाएंगे, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने वाले स्टाफ और अभिभावकों को प्रोत्साहन मिल सके।
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    साइकिल को बढ़ावा: स्कूल के आसपास के छोटे-मोटे कार्यों और कम दूरी की यात्रा के लिए मोटरसाइकिल या स्कूटी की जगह साइकिल (Bicycle) का प्रयोग करने का सख्त निर्णय लिया गया है। यह सेहत और पर्यावरण, दोनों के लिए फायदेमंद है।
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इको-फ्रेंडली कैंपस: सोलर कुकर से लेकर वाटर हार्वेस्टिंग तक

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मेरठ पब्लिक स्कूल कैंपस को पूरी तरह से 'ग्रीन और सस्टेनेबल' (Sustainable) बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चरल बदलाव किए जा रहे हैं:
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    जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) प्रणाली की नियमित और गहन सफाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि बारिश की एक-एक बूंद को सहेज कर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।
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    ग्रीन कुकिंग (Green Cooking): ईंधन गैस (LPG) की खपत को कम करने के लिए स्कूल की कैंटीन और गृह विज्ञान (Home Science) प्रयोगशालाओं में अब पारंपरिक गैस स्टोव की जगह इंडक्शन (Induction), प्रेशर कुकर और सोलर कुकर (Solar Cooker) का प्रयोग करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है।
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    हरित परिसर पहल (Green Campus Initiative): पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा करने के लिए एक बेहद खूबसूरत पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत विद्यालय की 'प्रत्येक कक्षा एक पौधा गोद लेगी' (Adopt a Plant)। उस पौधे को पानी देने से लेकर उसके बड़े होने तक की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी उसी कक्षा के विद्यार्थियों की होगी।
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    रिटर्न गिफ्ट में पौधे और किताबें: बच्चों के मन में प्रकृति प्रेम जगाने के लिए उन्हें विशेष रूप से यह समझाया गया है कि वे अपने जन्मदिन के अवसर पर सहपाठियों को जंक फूड या चॉकलेट बांटने के बजाय रिटर्न गिफ्ट में पौधे (Saplings) या ज्ञानवर्धक किताबें (Books) वितरित करें।
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ऊर्जा संरक्षण और 'पेपरलेस' कार्यप्रणाली पर जीरो टॉलरेंस

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बिजली और कागज की बर्बादी रोकने के लिए स्कूल प्रशासन 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है।
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    बिजली की बचत: यह कड़ाई से अनिवार्य कर दिया गया है कि जैसे ही कोई कक्षा खाली होगी या विद्यार्थी अनुपस्थित होंगे, वहां के पंखे, लाइट और स्मार्ट बोर्ड (Smart Boards) तुरंत बंद कर दिए जाएंगे।
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    जनरेटर का सीमित उपयोग: डीजल की बर्बादी और वायु प्रदूषण रोकने के लिए पावर बैकअप (जनरेटर) का उपयोग केवल अति-आवश्यक स्थिति (Emergency) में ही किया जाएगा।
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    पेपरलेस ऑफिस (Paperless Work): पेड़ों को कटने से बचाने के लिए स्कूल की पूरी कार्यप्रणाली को 'पेपरलेस' किया जा रहा है। अब कोई भी नोटिस, सर्कुलर या बच्चों की प्रोग्रेस रिपोर्ट कागज पर प्रिंट नहीं होगी; यह सब सीधे अभिभावकों के ईमेल (Email) और व्हाट्सएप पर भेजा जाएगा।
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    अगर प्रिंटआउट लेना बेहद जरूरी हुआ, तो कागज के दोनों तरफ (Double-sided) प्रिंट लिया जाएगा। इसके अलावा, क्लास में रफ कार्य (Rough Work) के लिए पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके कागजों का ही प्रयोग करना सुनिश्चित किया जाएगा।
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'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा और जवाबदेही तय

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राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूल ने स्वदेशी को अपनाने का संकल्प लिया है। यह तय किया गया है कि विद्यालय के लिए होने वाली सभी प्रकार की खरीदारी (स्टेशनरी से लेकर उपकरणों तक) में 'भारतीय निर्मित उत्पादों' (Made in India Products) को ही पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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इस पूरी कार्ययोजना को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर इसे अमलीजामा पहनाने के लिए सख्त जवाबदेही भी तय की गई है। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा, जल और गैस का संरक्षण अब केवल मैनेजमेंट का काम नहीं है, बल्कि यह निजी रूप से विद्यालय के हर एक छात्र, शिक्षक और कर्मचारी का नैतिक दायित्व होगा। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और निगरानी करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग अध्यक्षों (HODs) और प्रभारियों को सौंपी गई है।
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मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप का यह कदम साबित करता है कि अगर समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझे, तो किसी भी बड़े वैश्विक संकट का सामना स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। पीएम मोदी की अपील को जिस तरह से इस शिक्षण संस्थान ने अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया है, वह काबिले तारीफ है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मेरठ ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और पूरे देश के अन्य शिक्षण और व्यावसायिक संस्थान भी MPS ग्रुप की इस अनूठी 'हाइब्रिड और इको-फ्रेंडली' पहल से प्रेरणा लेंगे और राष्ट्र हित में अपना अमूल्य योगदान देंगे।
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