मेरठ (Crime News Desk): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस को अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बहुत बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। मेरठ की लिसाड़ी गेट पुलिस ने एक बेहद शातिर और हाई-टेक अंतरराज्यीय 'ठक-ठक' गैंग (Thak-Thak Gang) का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह पलक झपकते ही राहगीरों का ध्यान भटकाकर उनके महंगे मोबाइल फोन गायब कर देता था।READ ALSO:-क्रिकेट के मैदान पर छाया सन्नाटा: न्यूजीलैंड के सबसे महान बल्लेबाज केन विलियमसन ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, 'फैब-4' के एक युग का हुआ अंत!
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शुक्रवार को घंटाघर स्थित अपने कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के दौरान, एसपी सिटी (SP City) ने इस पूरे गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) और उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की। पुलिस ने इस गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को धर दबोचा है और उसके पास से भारी मात्रा में चोरी के महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
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15 लाख रुपये की रिकवरी: 11 आईफोन (iPhone) समेत 35 फोन बरामद
\r\n\r\nपुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई में जो रिकवरी हुई है, वह चौंकाने वाली है। गिरफ्तार किए गए आरोपी के कब्जे से पुलिस ने कुल 35 महंगे स्मार्टफोन बरामद किए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन 35 मोबाइलों में 11 महंगे एप्पल आईफोन (Apple iPhone) शामिल हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nस्वाट टीम नगर मेरठ व थाना लिसाड़ी गेट पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में चोरी/लूट किये गये 35 मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत 15 लाख), 01 लैपटॉप व पिट्ठू बैग सहित 01 अभियुक्त गिरफ्तार। #UPPolice #MeerutPolice pic.twitter.com/QdzNi5x9e5
\r\n— MEERUT POLICE (@meerutpolice) June 12, 2026
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए इन सभी मोबाइलों की अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है। यह बरामदगी स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि यह गिरोह कितने बड़े पैमाने पर काम कर रहा था और इनका निशाना हमेशा महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन ही होते थे।
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आरोपी की पहचान: कौन है मास्टरमाइंड सद्दाम?
\r\n\r\nपुलिस के हत्थे चढ़े इस शातिर आरोपी की पहचान शाहेब उर्फ सद्दाम के रूप में हुई है। सद्दाम मेरठ के ही लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 'इस्लामिक नगर' का निवासी बताया जा रहा है। सद्दाम इस पूरे गिरोह की एक अहम कड़ी था, जो चोरी के माल को ठिकाने लगाने और उन्हें आगे खपाने का काम करता था।
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पुलिस की कड़ी पूछताछ में सद्दाम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि यह गिरोह कोई छोटा-मोटा स्थानीय चोरों का समूह नहीं है, बल्कि इनका नेटवर्क उत्तर प्रदेश के मेरठ से लेकर देश की आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र (Maharashtra) तक फैला हुआ है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के चार अन्य मुख्य सदस्य अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर (फरार) हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।
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वारदात का तरीका (Modus Operandi): कैसे करते थे शिकार?
\r\n\r\nइस 'ठक-ठक' गैंग के काम करने का तरीका बेहद शातिर और पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक धोखे पर आधारित था। पुलिस जांच में जो बातें सामने आई हैं, उसके अनुसार:
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- \r\n भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी: गिरोह के सदस्य जानबूझकर ऐसे स्थानों को अपना टारगेट बनाते थे जहां भारी भीड़ होती थी। इनमें रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, व्यस्त बाजार, हाट-बाजार और मेले शामिल थे।\r\n \r\n
- \r\n ध्यान भटकाने की कला: ये बदमाश अपने शिकार का ध्यान भटकाने (Distraction) में माहिर थे। भीड़ में जानबूझकर किसी से टकरा जाना, धक्का देना, या फिर राह चलते व्यक्ति के कपड़ों पर कुछ गंदगी (जैसे थूक या कीचड़) फेंककर उसे साफ करने का नाटक करना इनका पुराना पैंतरा था।\r\n \r\n
- \r\n पलक झपकते ही चोरी: जैसे ही पीड़ित का ध्यान अपने मोबाइल या सामान से हटकर उस बहस या कपड़े साफ करने में लगता, गिरोह का दूसरा सदस्य पीछे से आकर बड़ी ही सफाई से उसकी जेब या बैग से मोबाइल पार कर देता था।\r\n \r\n
- \r\n झपटमारी (Snatching): कुछ विशेष मामलों में, खासकर सुनसान सड़कों पर, इस गिरोह के सदस्य तेज रफ्तार बाइक पर सवार होकर आते थे और पैदल या रिक्शे पर जा रहे लोगों के हाथ से झपट्टा मारकर मोबाइल लूट लेते थे।\r\n \r\n
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हाई-टेक क्राइम: मेरठ में कैसे टूटते थे आईफोन के लॉक?
\r\n\r\nइस गिरोह का काम सिर्फ मोबाइल चुराना नहीं था, बल्कि उसे बाजार में सुरक्षित तरीके से खपाना भी था। पूछताछ में सद्दाम ने खुलासा किया कि महाराष्ट्र, दिल्ली या अन्य राज्यों से चोरी किए गए सभी महंगे मोबाइल फोन्स को एक सोची-समझी साजिश के तहत सबसे पहले 'मेरठ' लाया जाता था।
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मेरठ को इस गिरोह ने अपना 'टेक्निकल हब' बना रखा था। यहां गैंग से जुड़े कुछ ऐसे लोग सक्रिय थे जो तकनीक के महारथी (Tech-savvy) हैं। ये लोग विशेष रूप से डिजाइन किए गए विदेशी सॉफ्टवेयर और महंगे लैपटॉप का उपयोग करके चोरी के मोबाइलों (यहां तक कि आईफोन जैसे सुरक्षित डिवाइस) का लॉक तोड़ते थे।
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मोबाइलों की पहचान पूरी तरह से छिपाने के लिए वे उनका आईएमईआई (IMEI) नंबर तक बदलने की कोशिश करते थे या तकनीकी छेड़छाड़ कर उन्हें फ्लैश (Flash) कर देते थे। पूरी तरह से 'क्लीन' होने के बाद, इन महंगे स्मार्टफोन्स को बाजार में, ओएलएक्स (OLX) जैसी साइट्स पर या सस्ते दामों में सेकंड-हैंड मोबाइल मार्केट में बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था।
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आगे की पुलिस कार्रवाई: रिसीवरों पर कस रहा है शिकंजा
\r\n\r\nएसपी सिटी ने बताया कि पुलिस इस मामले को यहीं बंद नहीं कर रही है। सद्दाम की गिरफ्तारी केवल इस बड़े नेटवर्क का एक सिरा भर है। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी फरार 4 सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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इसके साथ ही पुलिस की सर्विलांस (Surveillance) और साइबर सेल की टीमें उन 'रिसीवरों' (Receivers) की पहचान करने में जुट गई हैं, जो इस गिरोह से चोरी के मोबाइल औने-पौने दामों में खरीदते थे। चोरी का माल खरीदना भी कानूनन एक गंभीर अपराध है। पुलिस उन दुकानदारों और तकनीकी जानकारों की भी कुंडली खंगाल रही है, जो इन चोरी के मोबाइलों के लॉक तोड़ने और उनके पार्ट्स (Spares) अलग कर बेचने के गोरखधंधे में लिप्त हैं।
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पुलिस की अपील और सतर्कता (Public Advisory)
\r\n\r\nमेरठ पुलिस ने इस बड़ी सफलता के साथ ही आम जनता से भी अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने कीमती सामान और मोबाइल फोन के प्रति अत्यधिक सतर्क रहें। यदि रास्ते में कोई अनजान व्यक्ति अचानक धक्का दे, कपड़े गंदे होने की बात कहे या बेवजह बहस करने लगे, तो अपना ध्यान मोबाइल और पर्स से बिल्कुल न हटाएं, क्योंकि यह ध्यान भटकाकर चोरी करने वाले किसी 'ठक-ठक गैंग' की चाल हो सकती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.