मेरठ (क्राइम और इन्वेस्टिगेशन डेस्क): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का असर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में पश्चिमी यूपी के अहम जिले मेरठ से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मेरठ पुलिस, स्वाट (SWAT) टीम और सर्विलांस टीम ने एक संयुक्त और बेहद गोपनीय ऑपरेशन (Joint Operation) को अंजाम देते हुए एक ऐसी अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है, जिसके काम करने का तरीका देखकर खुद जांच अधिकारी भी दंग रह गए।Read also:-हापुड़ में आसमान छूती आग की लपटें: 70 आशियाने राख, 2 फैक्ट्रियों में करोड़ों का माल खाक; वोट डालने गए मजदूरों पर टूटा कहर
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अवैध हथियारों की यह फैक्ट्री किसी जंगल या वीरान खंडहर में नहीं, बल्कि घनी आबादी के बीच एक घर में 'डबल बेड' के नीचे बने एक सीक्रेट अंडरग्राउंड तहखाने (Secret Basement) में चल रही थी। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 11 आरोपियों को हथकड़ियां पहनाई हैं, जो मेरठ, मुजफ्फरनगर और बागपत में हथियारों की सप्लाई का काला कारोबार चला रहे थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@khabreelal_news उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। डबल बेड के नीचे तहखाने में चल रही इस अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर पुलिस द्वारा 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए। pic.twitter.com/hAs3C8iqUk
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) April 27, 2026
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ऑपरेशन 'डबल बेड': कैसे हुआ इस खुफिया तहखाने का पर्दाफाश?
\r\n\r\nमेरठ पुलिस पिछले काफी समय से पश्चिमी यूपी में अवैध हथियारों की तस्करी के इनपुट पर काम कर रही थी। इसी बीच सर्विलांस और मुखबिर तंत्र (Informers) के जरिए थाना लोहियानगर पुलिस और स्वाट टीम को एक बेहद पुख्ता टिप मिली। मुखबिर ने बताया कि लोहियानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अल्लीपुर स्थित एक मकान के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध पिस्टल बनाने का काम चल रहा है।
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सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों ने एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने सादे कपड़ों में पहले उस घर की रेकी की और फिर एक सटीक योजना के तहत मकान पर धावा बोल दिया।
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शुरुआती तलाशी में घर के अंदर सबकुछ आम घरों जैसा ही लग रहा था। लेकिन मुखबिर की सूचना सटीक थी। पुलिस ने जब घर के चप्पे-चप्पे की बारीकी से तलाशी ली, तो एक बेडरूम में रखे डबल बेड पर शक हुआ। जब पुलिस ने डबल बेड के गद्दे हटाकर उसका प्लाईवुड वाला बॉक्स (सामान रखने की जगह) खोला, तो उसके अंदर एक बड़ा सुराख (छेद) दिखाई दिया। यह छेद कोई आम सुराख नहीं था, बल्कि जमीन के अंदर जाने का एक खुफिया रास्ता था।
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पुलिस की टीम जब इस संकरे रास्ते से नीचे तहखाने में उतरी, तो वहां का नजारा देखकर उनकी आंखें फटी रह गईं। नीचे रोशनी का पूरा इंतजाम था और वहां भारी-भरकम मशीनों के साथ असलहे (हथियार) बनाने का काम जोरों पर चल रहा था। मौके पर मौजूद कारीगर असलहे तैयार कर रहे थे। पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर वहां से 'असलम' नाम के मुख्य कारीगर को धर दबोचा।
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रहीमुद्दीन का सिंडिकेट: 35 से 60 हजार रुपये में मौत का सौदा
\r\n\r\nपुलिस की गिरफ्त में आए असलम से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने इस पूरे काले कारोबार की परतें उधेड़ कर रख दीं। जांच में सामने आया कि इस पूरी अवैध शस्त्र फैक्ट्री का मास्टरमाइंड और संचालक 'रहीमुद्दीन' नाम का व्यक्ति है।
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यह नेटवर्क एक कॉर्पोरेट स्टाइल में बंटा हुआ था:
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- \r\n कच्चा माल और लॉजिस्टिक्स: मास्टरमाइंड रहीमुद्दीन इस फैक्ट्री के लिए कच्चा माल (लोहा, बैरल, स्प्रिंग आदि) और मशीनें उपलब्ध कराता था।\r\n \r\n
- \r\n मैन्युफैक्चरिंग: असलम और उसके अन्य साथी इस खुफिया तहखाने में बैठकर अपने हुनर का गलत इस्तेमाल करते थे और कच्ची धातु को तराश कर खतरनाक .32 बोर की पिस्टल में तब्दील करते थे।\r\n \r\n
- \r\n मार्केटिंग और सप्लाई: तैयार हथियारों को बेचने का पूरा नेटवर्क रहीमुद्दीन ही संभालता था।\r\n \r\n
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पुलिस के मुताबिक, इस तहखाने में बनने वाली अवैध पिस्टलों की फिनिशिंग इतनी शानदार होती थी कि ये बिल्कुल असली और फैक्ट्री मेड हथियारों जैसी दिखती थीं। इन हथियारों की डिमांड अंडरवर्ल्ड, स्थानीय गैंगस्टर्स और चुनाव के दौरान दबदबा कायम करने वालों के बीच बहुत ज्यादा थी। एक तैयार पिस्टल की कीमत बाजार में 35,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक तय की जाती थी, जो ग्राहकों की जरूरत और पिस्टल की क्वालिटी पर निर्भर करती थी।
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ताबड़तोड़ दबिश और 11 आरोपियों की गिरफ्तारी
\r\n\r\nअसलम से मिली जानकारी और सर्विलांस के डेटा के आधार पर मेरठ पुलिस ने रातों-रात अपना दायरा बढ़ाया। पुलिस की कई टीमों ने एक साथ मेरठ, बागपत और मुजफ्फरनगर के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी। इस त्वरित कार्रवाई का नतीजा यह रहा कि पुलिस ने हथियार तस्करी के इस सिंडिकेट से जुड़े कुल 11 शातिर आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
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गिरफ्तार किए गए ये आरोपी कोई नौसिखिए नहीं हैं। पुलिस रिकॉर्ड की जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से कई आरोपियों का पुराना और लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। इनके खिलाफ पहले से ही लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट (Arms Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट द्वारा हथियारों की तस्करी और डिलीवरी में इस्तेमाल की जाने वाली तीन लग्जरी कारों को भी जब्त कर लिया है।
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बरामदगी की सूची: हथियारों का जखीरा और इंडस्ट्रियल मशीनें
\r\n\r\nडबल बेड के नीचे मिले इस तहखाने को देखकर इसे एक 'मिनी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री' कहना गलत नहीं होगा। पुलिस ने मौके से जो सामान बरामद किया है, वह यह साबित करता है कि यहां कितने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन हो रहा था। बरामदगी में शामिल हैं:
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- \r\n 8 पूरी तरह तैयार .32 बोर की शानदार पिस्टल (बिक्री के लिए तैयार)\r\n \r\n
- \r\n 3 अधबनी पिस्टल (जिन पर काम चल रहा था)\r\n \r\n
- \r\n 2 अतिरिक्त बैरल और 2 स्लाइड\r\n \r\n
- \r\n 12 मैगजीन (गोलियां लोड करने के लिए)\r\n \r\n
- \r\n भारी मात्रा में अधबनी मैगजीन और अन्य छोटे पुर्जे\r\n \r\n
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इसके अलावा, हथियार बनाने के लिए आवश्यक भारी मशीनरी भी बरामद की गई है, जिनमें:
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- \r\n लोहा काटने और घिसने वाले ग्राइंडर\r\n \r\n
- \r\n छेद करने वाली हैवी ड्यूटी ड्रिल मशीनें\r\n \r\n
- \r\n हथौड़ी, आरी, रेती (फाइल्स)\r\n \r\n
- \r\n वेल्डिंग का पूरा सेटअप और सामग्री\r\n \r\n
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आगे की जांच: सप्लाई चेन और सफेदपोशों की तलाश
\r\n\r\nइस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज है। थाना लोहियानगर पुलिस ने सभी 11 आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं (आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट आदि) में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उन्हें भारी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
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मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस अब इस सिंडिकेट की 'सप्लाई चेन' (Supply Chain) को खंगालने में जुट गई है। पुलिस की विशेष टीमें अब उन 'सफेदपोशों' और अपराधियों की लिस्ट तैयार कर रही हैं, जिन्होंने रहीमुद्दीन के नेटवर्क से ये 60 हजार वाली पिस्टलें खरीदी हैं। इसके साथ ही, इस गिरोह से जुड़े जो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, उनकी गिरफ्तारी के लिए भी टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
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डबल बेड के नीचे से हथियारों की इस फैक्ट्री का मिलना यह साबित करता है कि अपराधी कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए कितने शातिर तरीके अपना रहे हैं। लेकिन मेरठ पुलिस की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे जमीन के कितने ही नीचे क्यों न छिप जाएं, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाएंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.