उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। आसमान से बरसती आग और उस पर बिजली विभाग की अघोषित कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। इसी बिजली संकट और विभाग की लचर कार्यप्रणाली को लेकर पश्चिमी यूपी के प्रमुख शहर मेरठ (Meerut) में देर रात भारी बवाल देखने को मिला।
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पल्लवपुरम थाना क्षेत्र में बिजली कटौती से त्रस्त और आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने न सिर्फ बिजली घर पर जमकर हंगामा किया, बल्कि देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक दिल्ली-मेरठ हाईवे (NH-58) को भी पूरी तरह से जाम कर दिया। इस घटना ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
\r\n\r\nकैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? (रात 9:30 बजे से कटी थी बिजली)
\r\n\r\nमिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम मेरठ के पल्लवपुरम फेस-1 इलाके का है। मंगलवार रात करीब 9:30 बजे से ही पूरे इलाके की बिजली गुल थी। भीषण गर्मी, उमस और मच्छरों के प्रकोप के बीच जब कई घंटों तक बिजली नहीं आई और बिजली विभाग के किसी भी अधिकारी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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- \r\n बिजली घर पर धावा: रात के समय ही सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए और सीधा पल्लवपुरम स्थित बिजली घर (Power Substation) पहुंच गए।\r\n \r\n
- \r\n अधिकारियों से नोकझोंक: वहां मौजूद कर्मचारियों से लोगों की तीखी नोकझोंक हुई। लोगों का आरोप था कि ट्रिपिंग और फॉल्ट के नाम पर घंटों तक अघोषित कटौती की जा रही है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का गर्मी में बुरा हाल है।\r\n \r\n
\r\n\r\nपुलिस की भारी लापरवाही: सामने दी थी हाईवे जाम करने की चेतावनी
\r\n\r\nइस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली रही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब आक्रोशित भीड़ बिजली घर पर प्रदर्शन कर रही थी, तब वहां कुछ पुलिसकर्मी पहले से मौजूद थे।
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गुस्साए लोगों ने पुलिसकर्मियों और बिजली कर्मचारियों के सामने ही यह खुली चेतावनी दी थी कि "अगर जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो हम दिल्ली-मेरठ हाईवे पर जाकर बैठ जाएंगे और चक्का जाम कर देंगे।"
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हैरानी की बात यह है कि इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद पुलिस ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया। न तो अतिरिक्त पुलिस बल (Force) मंगाया गया और न ही लोगों को हाईवे की तरफ जाने से रोका गया। नतीजा यह हुआ कि भीड़ आसानी से NH-58 पर पहुंच गई और बीच सड़क पर बैठकर आवागमन पूरी तरह से ठप कर दिया।
\r\n\r\nदिल्ली-मेरठ हाईवे (NH-58) पर लगा कई किलोमीटर लंबा जाम
\r\n\r\nदिल्ली-मेरठ हाईवे एक बेहद व्यस्त मार्ग है, जहां दिन-रात हजारों छोटे-बड़े वाहन और भारी कमर्शियल ट्रक गुजरते हैं। रात के समय अचानक हुए इस चक्का जाम से हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
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- \r\n राहगीर हुए परेशान: जो मुसाफिर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद या उत्तराखंड (हरिद्वार, रुड़की) की तरफ जा रहे थे, वे बीच रास्ते में ही फंस गए।\r\n \r\n
- \r\n घंटों का इंतजार: गर्मी के मौसम में जाम में फंसे वाहनों के अंदर बैठे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान शुरुआती दौर में मौके से पुलिस पूरी तरह गायब रही, जिससे स्थिति और अधिक बेकाबू व तनावपूर्ण हो गई।\r\n \r\n
\r\n\r\nबार एसोसिएशन अध्यक्ष की गाड़ी रोकी, परिवार से बदसलूकी
\r\n\r\nजाम के दौरान अराजकता का माहौल इस कदर हावी था कि प्रदर्शनकारियों ने वहां से गुजर रहे आम लोगों के साथ भी धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इसी बीच, हरिद्वार की तरफ से अपने परिवार के साथ लौट रहे मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा की कार भी इस महाजाम में फंस गई।
\r\n\r\nक्या हुआ अनुज शर्मा के साथ?
\r\n\r\nअध्यक्ष अनुज शर्मा ने बताया कि वह अपनी पत्नी, छोटे बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर लौट रहे थे। तभी अचानक कुछ प्रदर्शनकारी उनकी गाड़ी के आगे आ गए और उसे जबरन रुकवा लिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"गाड़ी में छोटे बच्चे और महिलाएं बैठी थीं। हमने हाथ जोड़कर उनसे रास्ता देने का अनुरोध किया, लेकिन भीड़ में शामिल कुछ अराजक तत्वों ने हमारी एक न सुनी। वे हंगामा करने लगे और गाड़ी में बैठी महिलाओं के साथ बेहद अभद्र व्यवहार (बदसलूकी) किया।" - अनुज शर्मा (अध्यक्ष, मेरठ बार एसोसिएशन)\r\n
गनीमत यह रही कि वहां मौजूद कुछ समझदार स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद देरी से पहुंची पुलिस ने किसी तरह मशक्कत करके अध्यक्ष की कार को सुरक्षित भीड़ से बाहर निकाला। इस पूरी घटना के दौरान जाम लगाने वाले प्रदर्शनकारियों और रास्ते से गुजरने वाले अन्य राहगीरों के बीच तीखी नोकझोंक और गालियां चलने का सिलसिला जारी रहा।
\r\n\r\nअंततः जागी पुलिस: हल्का बल प्रयोग कर खुलवाया जाम
\r\n\r\nघटना के काफी देर बाद, जब हालात बेकाबू होने लगे और जाम की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तब पल्लवपुरम थाना प्रभारी (SHO) भारत सारस्वत भारी पुलिस बल (Heavy Police Force) के साथ मौके पर पहुंचे।
\r\n\r\nपुलिस ने सबसे पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। जब कुछ उपद्रवी नहीं माने, तो पुलिस को स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने हाईवे से भीड़ को खदेड़ा और यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया।
\r\n\r\nथाना प्रभारी का आधिकारिक बयान:
\r\n\r\nथाना प्रभारी भारत सारस्वत ने पूरी घटना की पुष्टि करते हुए बताया, "बिजली कटौती की समस्या को लेकर कुछ स्थानीय लोगों ने हाईवे पर जाम लगाने का प्रयास किया था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत जाम खुलवा दिया है और अब यातायात बिल्कुल सुचारू है।"
\r\n\r\nबार एसोसिएशन अध्यक्ष के साथ हुई बदसलूकी के मामले पर SHO ने स्पष्ट किया, "फिलहाल इस संबंध में पुलिस को कोई भी लिखित शिकायत (तहरीर) प्राप्त नहीं हुई है। पीड़ित पक्ष की तरफ से जैसे ही लिखित शिकायत मिलती है, पुलिस मामले की गहनता से जांच करेगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त और विधिवत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
\r\n\r\nमौजूदा हालात
\r\n\r\nफिलहाल पल्लवपुरम और आसपास के क्षेत्र में शांति है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। बिजली विभाग ने भी सप्लाई सुचारू करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस घटना ने प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है। गर्मी के इस मौसम में यदि बिजली आपूर्ति की यही स्थिति रही और प्रशासन की लापरवाही जारी रही, तो आने वाले दिनों में इस तरह के और भी उग्र प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। आम जनता का बस यही सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा?
Sabse pehle comment karne wale banein.