मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (LLRM) की होनहार स्टाफ नर्स अंजलि शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्वाट (SWAT) टीम और मेडिकल थाना पुलिस ने एक संयुक्त और त्वरित अभियान चलाते हुए हत्याकांड के मुख्य मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी सूफियान को गुर्जर चौक के पास से गिरफ्तार कर लिया है। अंजलि की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने अपना धर्म बदलकर सूफियान से शादी करने से साफ इनकार कर दिया था। इस पूरे हत्याकांड में सूफियान ने जिस तरह से साजिश रची, अपनी पहचान छिपाई और अपनी बहनों को इस खौफनाक कृत्य में शामिल किया, वह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।Read also:-इबोला का खतरा: भारत में 'हाई अलर्ट', एयरपोर्ट्स पर कोरोना जैसे सख्त नियम लागू; जानिए DGCA की नई गाइडलाइंस और सरकार का पूरा एक्शन प्लान
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अस्पताल के वार्ड से शुरू हुई थी कहानी: कौन है अंजलि और सूफियान?

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जागृति विहार सेक्टर-3 की रहने वाली 30 वर्षीय अंजलि शर्मा LLRM मेडिकल कॉलेज में संविदा के आधार पर स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत थी। दिन-रात मरीजों की सेवा करने वाली अंजलि ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसी अस्पताल में काम करने वाला एक शख्स उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा। मुख्य आरोपी सूफियान भी इसी मेडिकल कॉलेज में पहले वार्डब्वॉय के रूप में संविदा पर काम करता था। हालांकि, काम में लगातार लापरवाही बरतने और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते अस्पताल प्रशासन ने कुछ महीने पहले ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
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 आरोपी को अरेस्ट कर पुलिस ने जेल भेज दिया है।

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अस्पताल में ड्यूटी के दौरान ही इन दोनों की पहली मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे यह जान-पहचान बातचीत में बदली और फिर एक कथित अफेयर में तब्दील हो गई। अंजलि की निजी जिंदगी पहले से ही काफी उथल-पुथल से गुजर रही थी। साल 2018 में उसकी शादी मेडिकल के सेक्टर-8 निवासी सनी के साथ हुई थी। दोनों का एक पांच साल का मासूम बेटा भी है। लेकिन पिछले एक साल से पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही थी और तलाक का मामला कोर्ट में विचाराधीन था। ऐसे में अंजलि अपने पति से अलग होकर पिछले एक साल से अपने भाई प्रदीप के साथ रह रही थी। इस मुश्किल वक्त में सूफियान ने अंजलि से नजदीकियां बढ़ाईं, लेकिन उसके इरादे कुछ और ही थे।
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पहचान छिपाने का शातिर खेल: 'राहुल' बनकर लिया था किराए का मकान

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इस हत्याकांड की साजिश एक दिन में नहीं रची गई थी। पुलिस इन्वेस्टिगेशन और चश्मदीदों के बयानों से एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। सूफियान ने इस रिश्ते को और अपनी असलियत को छिपाने के लिए एक बहुत बड़ा झूठ बोला था। लोहियानगर इलाके में युसूफ नाम के व्यक्ति का एक छोटा सा मकान सूफियान ने दो साल पहले किराए पर लिया था। इस मकान को किराए पर दिलाने में स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर दिनेश की अहम भूमिका थी।
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 मोहल्ले में ज्यादा लोग निकलकर देखने लगे तो साजिदा तेजी से स्कूटी पर शव लेकर भागी।

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प्रॉपर्टी डीलर दिनेश ने पुलिस को जो बयान दिया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। दिनेश के मुताबिक, जब सूफियान और अंजलि उसके पास मकान देखने आए थे, तो दोनों ने अपनी पहचान एक हिंदू जोड़े के रूप में बताई थी। सूफियान ने बड़ी ही चालाकी से अपना नाम 'राहुल' बताया था। उस वक्त दिनेश को जरा भी भनक नहीं लगी कि राहुल असल में एक मुस्लिम युवक सूफियान है। जब अंजलि की हत्या की खबर अखबारों और न्यूज़ पोर्टल्स में छपी, तब दिनेश को असलियत का पता चला। पड़ोसियों ने भी यह खुलासा किया कि जब भी सूफियान (कथित राहुल) और अंजलि इस मकान पर आते थे, तो वे हमेशा अपने चेहरों को कपड़ों से ढककर रखते थे। वे किसी भी वक्त आते और कुछ ही घंटों में वापस चले जाते थे। यह गोपनीयता इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि सूफियान के मन में पहले से ही कोई गहरी साजिश पनप रही थी।
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21 मई का वो मनहूस दिन: जब धर्म परिवर्तन के दबाव ने ली जान

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सूफियान लगातार अंजलि पर धर्म परिवर्तन करने और मुस्लिम रीति-रिवाज से निकाह करने का अनुचित दबाव बना रहा था। लेकिन अंजलि अपने धर्म और अपने स्वाभिमान से समझौता करने को कतई तैयार नहीं थी। उसने सूफियान के इस नाजायज दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया था। यही इनकार सूफियान की आंखों की किरकिरी बन गया।
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आरोपी बहन साजिदा ने पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में जो कबूलनामा किया है, वह बेहद खौफनाक है। साजिदा के मुताबिक, 21 मई के दिन अंजलि लोहियानगर स्थित उसी किराए के कमरे पर पहुंची थी। वहां पहले से ही सूफियान और साजिदा मौजूद थे। कमरे पर पहुंचते ही सूफियान ने एक बार फिर शादी और धर्म बदलने की बात छेड़ी। अंजलि ने फिर से कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि साजिदा भी अपने भाई की तरफ से अंजलि से उलझ गई। इसके बाद भाई-बहन ने मिलकर हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। दोनों ने एक मजबूत रस्सी ली और अंजलि का बेरहमी से गला घोंट दिया। अंजलि ने खुद को बचाने की काफी जद्दोजहद की होगी, लेकिन दो लोगों के आगे उसकी एक न चली और उसने कमरे में ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
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लाश को ठिकाने लगाने की फुलप्रूफ और रोंगटे खड़े करने वाली प्लानिंग

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हत्या करने के बाद सूफियान और साजिदा घबराए नहीं, बल्कि उन्होंने लाश को ठिकाने लगाने और पुलिस को गुमराह करने की एक फुलप्रूफ और पेशेवर क्रिमिनल्स जैसी प्लानिंग रची।
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    लोकल डॉक्टर को चकमा: सबसे पहले, हत्या के तुरंत बाद दोनों ने अंजलि की लाश को एक स्कूटी पर बीच में बिठाया। वे उसे पास के ही एक स्थानीय डॉक्टर के क्लीनिक ले गए, ताकि यह दिखा सकें कि उसकी तबीयत खराब है। जल्दबाजी और घबराहट में वह लोकल डॉक्टर अंजलि के गले पर पड़े रस्सी के गहरे निशान नहीं देख पाया। डॉक्टर ने स्थिति गंभीर बताते हुए उन्हें तुरंत मेडिकल अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
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    ई-रिक्शा और हेलमेट का इस्तेमाल: स्कूटी से लाश को ले जाना रिस्की लग रहा था, इसलिए उन्होंने योजना बदली। दोनों ने एक ई-रिक्शा किराए पर लिया और लाश को उसमें शिफ्ट किया। अपनी पहचान छिपाने के लिए साजिदा ने एक बड़ा हेलमेट पहन लिया और ई-रिक्शा में लाश के साथ बैठ गई, जबकि सूफियान दूसरी तरफ से निकल गया।
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    अस्पताल के स्टाफ की गद्दारी: सूफियान ने मेडिकल अस्पताल पहुंचने से पहले ही वहां संविदा पर काम करने वाले अपने एक पुराने परिचित स्टाफ कर्मी जबरसिंह को फोन मिला दिया। जबरसिंह को पूरी स्थिति बताई गई। साजिदा हेलमेट पहने हुए मेडिकल पहुंची, जहां जबरसिंह पहले से ही मौजूद था।
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    इमरजेंसी गेट पर छोड़ी लाश: साजिदा और जबरसिंह ने मिलकर बड़ी ही चालाकी से अंजलि की लाश को ई-रिक्शा से उतारा और उसे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट के पास लावारिस हालत में छोड़ दिया। जबरसिंह वहां कुछ देर निगरानी करता रहा और साजिदा वहां से तुरंत रफूचक्कर हो गई। अस्पताल प्रशासन को जब शक हुआ और उन्होंने जांच की, तब जाकर पता चला कि यह तो उनके ही अस्पताल की नर्स अंजलि की लाश है।
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सबूत मिटाने का खेल: दूसरी बहन सोफिया की रहस्यमयी एंट्री

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एक तरफ साजिदा लाश को ठिकाने लगा रही थी, तो दूसरी तरफ सूफियान स्कूटी से वापस लोहियानगर वाले उस कमरे पर पहुंच गया, जहां उन्होंने हत्या को अंजाम दिया था। उसका मकसद हत्या के तमाम सबूतों (रस्सी, अंजलि का सामान, फिंगरप्रिंट्स) को मिटाना था। लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब इस पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज सामने आई।
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कमरे के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ दिखा कि सूफियान के कमरे में पहुंचने के कुछ ही देर बाद एक और महिला वहां आती है। इस महिला ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मेडिकल एप्रेन पहना हुआ था और चेहरा ढका हुआ था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह दूसरी महिला सूफियान की एक और बहन सोफिया है। सोफिया वहां इसलिए पहुंची थी ताकि वह सूफियान की सबूत मिटाने और कमरे को साफ करने में मदद कर सके। एक ही परिवार के तीन-तीन सदस्यों का इस जघन्य हत्याकांड में इस कदर शामिल होना पुलिस के लिए भी हैरानी का सबब बना हुआ है।
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पुलिस का त्वरित एक्शन और लगातार जारी है जांच

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जैसे ही LLRM अस्पताल प्रशासन ने पुलिस और अंजलि के भाई प्रदीप को इस घटना की सूचना दी, पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। सबसे पहले अस्पताल परिसर और उसके आसपास के तमाम सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर कब्जे में ली गई।
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सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस को वो अहम सुराग मिल गया जिसमें आरोपी साजिदा ई-रिक्शा से लाश लाती हुई और हेलमेट पहने हुए नजर आ रही थी। पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और महज डेढ़ घंटे के रिकॉर्ड समय के भीतर आरोपी साजिदा और उसकी मां को उनके घर से धर दबोचा। पुलिस पहले ही साजिदा और लाश ठिकाने लगाने में मदद करने वाले अस्पताल कर्मी जबरसिंह को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। अब मुख्य मास्टरमाइंड सूफियान के भी अरेस्ट हो जाने से पुलिस को कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
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फिलहाल पुलिस सूफियान को रिमांड पर लेकर यह पूछताछ कर रही है कि क्या इस हत्याकांड में किसी और बाहरी व्यक्ति का भी हाथ है? इसके साथ ही, सूफियान की दूसरी बहन सोफिया, जो एप्रन पहनकर सबूत मिटाने पहुंची थी, उसकी तलाश और पूरी भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।
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अंजलि की मौत ने उसके पांच साल के मासूम बेटे के सिर से हमेशा के लिए मां का साया छीन लिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इस मामले में कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश की जाएगी ताकि सभी आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
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