मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की पहचान सिर्फ 1857 की क्रांति से ही नहीं, बल्कि यहाँ लगने वाले ऐतिहासिक 'नौचंदी मेले' (Nauchandi Mela) से भी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को समेटे यह मेला एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर आने को तैयार है। प्रशासन और मेला कमेटी ने इसकी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं।READ ALSO:-बिजनौर में बदमाशों का बेखौफ तांडव: नूरपुर में स्कूटी सवार युवकों पर जानलेवा हमला, दहशत फैलाने के लिए की हवाई फायरिंग
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आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष यह प्रांतीय मेला मई के पहले सप्ताह (संभावित 1 से 5 मई के बीच) से विधिवत रूप से शुरू हो जाएगा। करीब एक महीने तक चलने वाले इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन में इस बार न केवल परंपराओं का निर्वहन होगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत भी लिखी जाएगी।
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हिंदू-मुस्लिम एकता और 1857 की क्रांति का साक्षी है यह मेला

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वरिष्ठ पत्रकार शादाब रिजवी बताते हैं कि मेरठ में नौचंदी मेले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। यह केवल एक व्यापारिक या मनोरंजन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे बड़ी और जीवंत मिसाल है।
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    आस्था का अनूठा संगम: मेले के आयोजन स्थल पर एक ओर सिद्धपीठ 'नवचंडी देवी मंदिर' (Navchandi Temple) स्थित है, जिसे अपभ्रंश रूप में अब लोग 'नौचंडी' या 'नौचंदी' के नाम से पुकारते हैं। मेले के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
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    बाले मियां की मजार: वहीं ठीक दूसरी तरफ हजरत बाले मियां की मजार (Bale Miyan Mazar) स्थित है। मेले के दौरान यहाँ उर्स का आयोजन होता है और रात भर कव्वालियों की सूफियाना महफिलें सजती हैं।
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    एकता का संदेश: मेले का उद्घाटन हो या कोई अन्य मुख्य कार्यक्रम, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और मेला कमेटी के सदस्य सबसे पहले मंदिर में मत्था टेकते हैं और उसके तुरंत बाद मजार पर चादर चढ़ाकर मेले के शांतिपूर्ण आयोजन की दुआ मांगते हैं।
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    क्रांति का उद्गम स्थल: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी इस मेले की अहम भूमिका रही थी। उस दौर में अंग्रेजी हुकूमत की आंखों में धूल झोंक कर सभी धर्मों और सम्प्रदायों के क्रांतिकारी इसी मेले की आड़ में एकजुट होते थे और आगे की रणनीति तय करते थे। यहीं से उठी चिंगारी ने पूरे देश में क्रांति की आग फैलाई थी।
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प्रशासनिक ढांचा: अब बन चुका है प्रांतीय मेला

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समय के साथ इस मेले का स्वरूप लगातार भव्य होता गया है। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 'प्रांतीय मेला' (Provincial Fair) का दर्जा दिया हुआ है। इस मेले के आयोजन की जिम्मेदारी रोटेशन के आधार पर होती है—एक साल इसका आयोजन मेरठ नगर निगम करता है, तो अगले साल यह जिम्मेदारी जिला पंचायत मेरठ के कंधों पर होती है। इस वर्ष (2026) मेले के आयोजन का जिम्मा जिला पंचायत के पास है।
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इस बार क्या है नया? बुजुर्गों और बच्चों के लिए 'गोल्फ कार्ट'

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जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने इस बार मेले को हाईटेक और अधिक जनसुविधाजनक बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। मेले का क्षेत्रफल बहुत विशाल है, जिसके कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों को पैदल चलने में काफी थकान हो जाती है।
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    गोल्फ कार्ट की शुरुआत: इस परेशानी को दूर करने के लिए इस बार मेले के अंदर 'गोल्फ कार्ट' (Golf Cart) चलाई जाएंगी।
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    किसे मिलेगी फ्री सुविधा? 15 साल तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों (बुजुर्गों) के लिए गोल्फ कार्ट से मेले में एक छोर से दूसरे छोर तक जाने की सुविधा पूरी तरह से फ्री (मुफ्त) रहेगी।
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    अन्य के लिए मामूली शुल्क: वहीं, सामान्य नागरिकों और युवाओं के लिए इसका किराया मात्र 10 रुपये निर्धारित किया गया है, ताकि हर कोई बिना थके मेले का पूरा आनंद ले सके।
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सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस: झूलों के लिए 'फिटनेस सर्टिफिकेट' अनिवार्य

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मेले का सबसे बड़ा आकर्षण वहां लगने वाले विशालकाय झूले (Amusement Rides) होते हैं। लेकिन सुरक्षा में जरा सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इस बार मेले की सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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    हादसों से सबक: हाल ही के वर्षों में किसी अन्य जगह एक झूला टूटने से बड़ा हादसा होते-होते बचा था, जिसमें कुछ लोगों और बच्चों को चोटें आई थीं।
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    NOC के बिना नो एंट्री: इस हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने तय किया है कि इस बार नौचंदी मेले में झूले लगाने वाले ठेकेदारों से सभी आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र (Fitness Certificates) सख्ती से लिए जाएंगे। पीडब्ल्यूडी (PWD) और अन्य तकनीकी विभागों से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) प्राप्त करने और सुरक्षा मानकों को 100% पूरा करने के बाद ही किसी भी झूले को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।
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महिला सशक्तिकरण और नव उद्यमियों (Startups) को मिलेगा बड़ा मंच

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नौचंदी मेला रोजगार और व्यापार का एक बहुत बड़ा जरिया है। इस बार मेले को 'महिला सशक्तिकरण' (Women Empowerment) और 'वोकल फॉर लोकल' थीम से भी जोड़ा गया है।
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    महिलाओं के लिए 20 स्टॉल: मेले में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को उनके हस्तशिल्प और घरेलू उत्पादों को बेचने के लिए विशेष रूप से 20 स्टॉल आवंटित किए जाएंगे।
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    ODOP और नव उद्यमियों को 40 फ्री दुकानें: जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (AMA) वी.एस. कुशवाहा ने जानकारी दी कि 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 40 दुकानें पूरी तरह से फ्री (मुफ्त) में रिजर्व की गई हैं। इन दुकानों को किसान समूहों, स्वयं सहायता समूहों और ऐसे नव उद्यमियों (Entrepreneurs) को दिया जाएगा, जो अपना नया स्टार्टअप या व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, ताकि वे अपने उत्पादों का मुफ्त में प्रचार-प्रसार कर सकें।
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सांस्कृतिक रातें और माया नगरी के कलाकार

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मेले की रातें सांस्कृतिक कार्यक्रमों (Cultural Events) के बिना अधूरी हैं। इस बार पटेल मंडप और अन्य सांस्कृतिक मंचों पर भव्य कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आयोजकों की 'माया नगरी' (मुंबई) के कई नामचीन कलाकारों और गायकों से बातचीत चल रही है। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों, कवियों (कवि सम्मेलन) और मुशायरों के लिए भी विशेष तिथियां निर्धारित की जा रही हैं। मंचों पर भी महिलाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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संवर रही हैं मूर्तियां, लजीज 'हलवा-पराठे' का इंतजार

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मेले की तैयारियों का जायजा लेते हुए वी.एस. कुशवाहा ने बताया कि नौचंदी मैदान में मौजूद सभी ऐतिहासिक मूर्तियों और स्मारकों की रंग-रोगन और सफाई का काम जोरों पर है। रास्तों को दुरुस्त किया जा रहा है और लाइटिंग की भव्य व्यवस्था की जा रही है।
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नौचंदी मेले में आने वाला कोई भी व्यक्ति यहां के मशहूर 'हलवा-पराठा' (Halwa Paratha) का लुत्फ उठाए बिना वापस नहीं जाता। एक बड़ी परात के आकार का यह मीठा पराठा इस मेले की सिग्नेचर डिश है। इसके अलावा, खुर्जा की मशहूर क्रॉकरी, सहारनपुर का लकड़ी का फर्नीचर, तरह-तरह के घरेलू ट्रेंडी आइटम्स, खिलौने और रंग-बिरंगे परिधानों के बाजार भी सजने के लिए तैयार हैं।
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संक्षेप में कहें तो, आगामी 1 से 5 मई के बीच शुरू होने जा रहा मेरठ का नौचंदी मेला-2026 इस बार अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ, आधुनिक जनसुविधाओं, सख्त सुरक्षा मानकों और व्यापारिक अवसरों का एक बेहतरीन संगम साबित होने वाला है। मेरठ सहित पूरे पश्चिमी यूपी को इस मेले के भव्य आगाज का बेसब्री से इंतजार है।
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