मेरठ: जैसे-जैसे ईदुल अज़हा (बकरीद) का मुकद्दस त्यौहार करीब आ रहा है, उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई हैं। त्यौहार को पूरी तरह से शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और बिना किसी असुविधा के संपन्न कराने के उद्देश्य से शहर के जिम्मेदार लोगों ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में, जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारियों और मुस्लिम समाज के प्रमुख नुमाइंदों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ के जिलाधिकारी (DM) से उनके कार्यालय में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की।READ ALSO:-राष्ट्रहित में बिजनौर का ऐतिहासिक कदम: PM की अपील पर सर्राफा व्यापारियों ने 'बुलियन और गोल्ड बार' की बिक्री से किया तौबा!
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इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल का कुशल नेतृत्व मेरठ के नायाब शहर काजी जैनुल राशिदीन सिद्दीकी ने किया। बैठक के दौरान नागरिक सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया। जिलाधिकारी ने सभी मांगों को बेहद संजीदगी से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित व उचित कार्रवाई करने का कड़ा आश्वासन दिया है।
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भीषण गर्मी का प्रकोप: बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति है सबसे बड़ी जरूरत
\r\n\r\nवर्तमान समय में पूरा उत्तर प्रदेश और विशेषकर मेरठ एनसीआर क्षेत्र भीषण गर्मी और हीटवेव (लू) की चपेट में है। इस बार की बकरीद चिलचिलाती गर्मी के बीच मनाई जाएगी। नायाब शहर काजी जैनुल राशिदीन सिद्दीकी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस मौसम की गंभीरता और त्यौहार की व्यावहारिक जरूरतों पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि बकरीद का यह पवित्र त्यौहार लगातार तीन दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें सुन्नत के मुताबीक कुर्बानी का सिलसिला चलता है।
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- \r\n आर्थिक नुकसान का डर: काजी ने बताया कि इस भीषण गर्मी में कुर्बानी के गोश्त को खराब होने और सड़ने से बचाने के लिए उसे फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) या डीप फ्रीजर में रखना बेहद जरूरी होता है। यदि इन तीन विशेष दिनों के दौरान बिजली की आपूर्ति सुचारू नहीं रही या अघोषित कटौती हुई, तो न केवल गोश्त खराब होगा, बल्कि आम लोगों और व्यापारियों को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n पानी की अहमियत: कुर्बानी की प्रक्रिया के बाद घरों और आस-पड़ोस में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए पानी की प्रचुर मात्रा में आवश्यकता होती है। खून और अन्य अवशेषों को तुरंत साफ न करने पर भयंकर बदबू और बीमारियों के फैलने का अंदेशा रहता है। इसलिए प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से अपील की है कि इन तीन दिनों में जलापूर्ति (Water Supply) पूरी क्षमता के साथ सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
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स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं पर जोर: नगर निगम से विशेष गुजारिश
\r\n\r\nत्यौहार के मौके पर शहर की आबोहवा साफ रहे, इसके लिए काजी ने नगर निगम (Meerut Municipal Corporation) प्रशासन से विशेष अपील की है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा दिए गए ज्ञापन में निम्नलिखित नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने की मांग की गई है:
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- \r\n कूड़ा निस्तारण की विशेष व्यवस्था: मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में नगर निगम द्वारा अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। जगह-जगह कूड़ा उठाने वाली ठेला गाड़ियां (हैंडकार्ट्स) तैनात की जाएं।\r\n \r\n
- \r\n पॉलिथीन या डस्टबिन का वितरण: काजी ने सुझाव दिया कि प्रशासन की ओर से बड़ी और मजबूत पॉलिथीन या विशेष डस्टबिन वितरित किए जाएं, ताकि लोग कुर्बानी के बाद के अवशेष (गंदगी) को खुले में फेंकने के बजाय उसमें सुरक्षित रूप से रखकर डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचा सकें। इससे सड़कों पर गंदगी नहीं फैलेगी और स्वच्छता बनी रहेगी।\r\n \r\n
- \r\n शराब की दुकानों पर पूर्ण पाबंदी: त्यौहार के संवेदनशील दिनों में असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल खराब होने से बचाने के लिए, मुस्लिम इलाकों और मस्जिदों के आसपास की शराब की दुकानों को पूर्णतः बंद (Dry Day) रखने की मांग की गई है।\r\n \r\n
- \r\n सड़कों और लाइटों की मरम्मत: ईदगाह और प्रमुख मस्जिदों को जाने वाले मार्गों की हालत खस्ता है। प्रशासन से मांग की गई है कि नमाजियों की सुविधा के लिए टूटी सड़कों और गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही, सुबह के वक्त अंधेरे से बचने के लिए बंद पड़ी सभी स्ट्रीट लाइटों को फौरन ठीक कराया जाए।\r\n \r\n
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'सड़कों पर नमाज' का मुद्दा: मुख्यमंत्री के आदेश का सम्मान और आपसी भाईचारे की मिसाल
\r\n\r\nबैठक का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय 'सड़कों पर नमाज' पढ़ने को लेकर रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में सड़कों को रोककर या बाधित करके नमाज न पढ़ने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश पर बेहद परिपक्वता और संजीदगी के साथ प्रतिक्रिया देते हुए नायाब शहर काजी ने मुस्लिम समाज का स्पष्ट रुख प्रशासन के सामने रखा।
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काजी जैनुल राशिदीन सिद्दीकी ने कहा, "हम प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी और उनके द्वारा दिए गए शासकीय आदेशों का पूरा सम्मान करते हैं। हमारी ओर से इस कानून या आदेश का कोई विरोध नहीं किया जा रहा है। हमारा देश भारत एक महान धर्मनिरपेक्ष (Secular) मुल्क है। यहाँ की गंगा-जमुनी तहजीब पूरी दुनिया में मशहूर है, जहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मजहबों के लोग आपस में बेहद मोहब्बत, इत्तेफाक और भाईचारे के साथ सदियों से रहते आए हैं।"
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उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है और मुस्लिम समाज प्रशासन के हर उस कदम के साथ खड़ा है जो समाज में शांति स्थापित करता हो।
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कांवड़ यात्रा की तर्ज पर महज '15 मिनट की नमाज' के लिए मानवीय गुजारिश
\r\n\r\nहालांकि, मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भारी भीड़ को देखते हुए, काजी ने प्रशासन के सामने एक तुलनात्मक और बेहद भावुक अपील भी रखी। उन्होंने समाज के आपसी सौहार्द और एक-दूसरे के त्यौहारों में सहयोग की भावना का हवाला दिया।
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क्या है 15 मिनट की नमाज की मांग का आधार? नायाब शहर काजी ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि सावन के महीने में जब पवित्र कांवड़ यात्रा निकलती है, तो शिवभक्त कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा मुख्य सड़कों और हाईवे को 15-15 दिनों तक के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। रूट डायवर्जन लागू होता है। इस दौरान शहर भर की गोश्त (मांस) की दुकानें बंद रहती हैं और कई पारंपरिक कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ जाते हैं।
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उन्होंने कहा, "कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली इन व्यापारिक और यातायात संबंधी असुविधाओं का देश का मुस्लिम समाज कभी विरोध नहीं करता, बल्कि पूरी श्रद्धा के साथ सहयोग करता है और कांवड़ियों के लिए शिविर (कैंप) भी लगाता है। इसी आपसी सौहार्द, मोहब्बत और ताने-बाने को देखते हुए हमारी सरकार और स्थानीय प्रशासन से एक पुरजोर गुजारिश है कि ईद और बकरीद जैसे वर्ष के सबसे बड़े त्यौहारों पर नमाजियों की तादाद ज्यादा होने के कारण, मुसलमानों को भी मस्जिदों और ईदगाहों के ठीक बाहर (सड़क के किनारे) महज 10 से 15 मिनट के लिए नमाज पढ़ने की विशेष छूट दी जाए।"
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कानून के दायरे में रहकर अपील: अपने बयान के अंत में काजी जैनुल राशिदीन ने स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए कहा कि चूँकि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री का आदेश है, इसलिए वे और पूरा मुस्लिम समाज इसका पालन करने के लिए बाध्य हैं और कानून का पूरा आदर करेंगे। कोई भी जबरन सड़क पर नमाज नहीं पढ़ेगा। लेकिन, एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर वे सरकार और प्रशासन से दरख्वास्त करते हैं कि उनकी इस महज 15 मिनट की नमाज वाली मानवीय और व्यावहारिक मांग पर सहानुभूतिपूर्वक (Sympathetically) विचार किया जाए, ताकि किसी भी नमाजी को नमाज छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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प्रशासन का सकारात्मक रुख
\r\n\r\nजिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी सभी नागरिक सुविधाओं (बिजली, पानी, सफाई, सड़क) संबंधी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। जहाँ तक सड़कों पर नमाज का प्रश्न है, प्रशासन शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और स्थानीय शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लेगा। फिलहाल, शहर में बकरीद का त्यौहार शांति, हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाने के लिए प्रशासन और अवाम दोनों ही पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहे हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.