मेरठ। शहर में बंदरों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। बंदरों की समस्या से परेशान फूलबाग क्षेत्र के सैकड़ों लोग आज कलेक्ट्रेट पहुंचे और अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन में कुछ लोग बंदरों के मुखौटे लगाकर पहुंचे और बंदरों जैसी हरकतें करते नजर आए।

लोगों का कहना है कि बंदरों के कारण इलाके में लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। उनका आरोप है कि समस्या के समाधान को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि लोग समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं।

बंदर नहीं तो फिर ये लोग बंदर क्यों बने?

कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों में कुछ लोगों ने बंदरों के मुखौटे लगाए हुए थे। वे बंदरों की तरह उछल-कूद और हरकतें करते हुए अधिकारियों का ध्यान अपनी समस्या की ओर खींच रहे थे।

जब इन लोगों से पूछा गया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उनका जवाब भी अपने आप में विरोध का संदेश था।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बंदरों ने उन्हें ऐसी हरकतें करना सिखा दिया है। उनका कहना था कि जब लंबे समय से बंदरों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा तो अब उन्होंने भी उसी अंदाज में अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया है।

जिम्मेदारी किसकी, इसी पर सवाल

स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि बंदरों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। लोग चाहते हैं कि संबंधित विभाग आपसी जिम्मेदारी तय करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान निकालें।

फूलबाग के लोगों का कहना है कि बंदरों के आतंक के कारण आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए।

कलेक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी और बंदरों के आतंक से राहत दिलाने की मांग की। प्रदर्शन का सबसे खास पहलू लोगों का बंदरों के मुखौटे पहनकर विरोध जताना रहा, जिसने इस समस्या की ओर अलग अंदाज में ध्यान खींचा।

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