लखनऊ और दिल्ली के कोचिंग सेंटरों में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया है। छात्रों की सुरक्षा को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अवैध और मानकविहीन संस्थानों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों में उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए - MDA) की टीम ने शहर के पॉश इलाके बच्चा पार्क स्थित स्टार प्लाजा में अचानक छापेमारी की। इस दौरान मानकों की अनदेखी पाए जाने पर टीम ने तत्काल प्रभाव से चाणक्य कोचिंग सेंटर को सील कर दिया। हालांकि, बाद में कुछ शर्तों के साथ सील खोल दी गई, जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में खौफ! रील बनाने के लिए 'BAT-BMS App' से बीच सड़क पर बंद कर रहे चलती ई-रिक्शा, बाल-बाल बच रहे यात्री
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश है कि छात्रों की जान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आइए, इस पूरी घटना, प्रशासन की रणनीति और मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों की प्रतिक्रिया को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

लखनऊ अग्निकांड के बाद जागी मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की टीम

\r\n\r\n
हाल ही में लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भयंकर आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें कई छात्र बाल-बाल बचे थे। इस घटना ने कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) और भवन निर्माण मानकों की पोल खोलकर रख दी थी। इस बड़े हादसे से सबक लेते हुए मेरठ के जिलाधिकारी (DM) डॉ. वीके सिंह ने जिले में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की सघन जांच के सख्त आदेश दिए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी (ADM City) बृजेश सिंह के नेतृत्व में एक विशेष संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल टीम में केवल एमडीए के अधिकारी ही नहीं, बल्कि अग्निशमन विभाग (Fire Department) और विद्युत विभाग (Electricity Department) के आला अधिकारी भी शामिल हैं। यह टीम पिछले कई दिनों से शहर के अलग-अलग कोनों में जाकर यह सुनिश्चित कर रही है कि क्या मेरठ कोचिंग सेंटर छात्रों के बैठने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

स्टार प्लाजा में चला एमडीए का अभियान और चाणक्य कोचिंग सेंटर हुआ सील

\r\n\r\n
शुक्रवार दोपहर को एमडीए के जूनियर इंजीनियर (JE) बिजेंद्र और धीरज यादव के नेतृत्व में संयुक्त टीम बच्चा पार्क स्थित स्टार प्लाजा पहुंची। स्टार प्लाजा मेरठ में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का एक बड़ा हब (Hub) माना जाता है, जहां दर्जनों की संख्या में छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जैसे ही एमडीए की गाड़ियां स्टार प्लाजा पहुंचीं, वहां मौजूद मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों के बीच अफरा-तफरी मच गई। जांच टीम ने सीधे चाणक्य कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि संस्थान में सुरक्षा मानकों का भारी उल्लंघन हो रहा है। न तो वहां आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की उचित व्यवस्था थी। भवन संबंधी मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए, एमडीए की टीम ने बिना किसी देरी के चाणक्य कोचिंग सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सील लगाने और हटाने पर विवाद: संचालकों ने लगाया भेदभाव का आरोप

\r\n\r\n
इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सील किए जाने के कुछ ही घंटों बाद चाणक्य कोचिंग सेंटर की सील खोल दी गई। एमडीए अधिकारियों ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि कोचिंग संचालक ने लिखित रूप में एक शपथ पत्र दिया है। इस पत्र में संचालक ने आश्वासन दिया है कि वह जल्द से जल्द सभी निर्धारित सुरक्षा और भवन संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित करेगा। इसी लिखित आश्वासन के आधार पर छात्रों के भविष्य को देखते हुए सील अस्थायी तौर पर हटाई गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन प्रशासन के इस कदम ने स्टार प्लाजा और शहर के अन्य मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों को नाराज कर दिया। अन्य कोचिंग संचालकों ने एमडीए की टीम पर सीधे तौर पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एमडीए की कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा है और केवल कुछ चुनिंदा संस्थानों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। विरोध कर रहे संचालकों का तर्क है कि वे भी आवश्यक मानकों को पूरा करने और प्रशासन का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन रातों-रात व्यवस्थाएं नहीं बदली जा सकतीं। इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय (Notice Period) दिया जाना चाहिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बचने के लिए अपनाए गए अजीबोगरीब हथकंडे

\r\n\r\n
शुक्रवार की इस कार्रवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला नजारा भी देखने को मिला। स्टार प्लाजा में एमडीए की टीम के पहुंचने की भनक लगते ही कई मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों ने अपने संस्थानों के बाहर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग और बोर्ड रातों-रात हटा दिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्थिति यह थी कि जांच टीम को गुमराह करने के लिए कुछ स्थानों पर कोचिंग के बोर्ड हटाकर रातों-रात अधिवक्ताओं (Lawyers) या अन्य निजी प्रतिष्ठानों के बोर्ड टांग दिए गए। संचालकों को लगा कि शायद इस हथकंडे से वे एमडीए और फायर ब्रिगेड की नजरों से बच जाएंगे। इस लुकाछिपी के कारण संयुक्त जांच टीम को संस्थानों की पहचान करने और अपनी कार्रवाई को अंजाम देने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और छात्रों की मदद से अवैध रूप से चल रहे संस्थानों की सूची तैयार कर ली है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अब तक 50 से अधिक कोचिंग सेंटर हो चुके हैं सील

\r\n\r\n
मेरठ प्रशासन इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे इस विशेष अभियान के तहत अब तक पूरे शहर में 50 से अधिक मेरठ कोचिंग सेंटर सील किए जा चुके हैं। एमडीए, फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग की ओर से सैकड़ों संस्थानों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए गए हैं।
\r\n\r\n
इस पूरे मुद्दे पर कोचिंग संचालकों और शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मेरठ के कमिश्नर और जिलाधिकारी से भी मुलाकात कर चुका है। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखते हुए राहत की मांग की थी। हालांकि, आला अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक सभी संस्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों (जैसे फायर एनओसी, व्यावसायिक बिजली कनेक्शन, दोहरे निकास द्वार) को पूरी तरह से लागू नहीं करते, तब तक यह दंडात्मक कार्रवाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लखनऊ की घटना के बाद मेरठ प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त कदम छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी हैं। स्टार प्लाजा में एमडीए द्वारा चाणक्य कोचिंग सेंटर को सील करने और फिर लिखित आश्वासन पर उसे खोलने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। हालांकि, मेरठ कोचिंग सेंटर संचालकों द्वारा लगाए गए भेदभाव के आरोप और कार्रवाई से बचने के लिए बोर्ड बदलने जैसे हथकंडे स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन द्वारा दी गई मोहलत के भीतर ये कोचिंग संस्थान अपनी कमियों को दूर कर पाते हैं या फिर आने वाले दिनों में और भी बड़ी तालाबंदी का सामना करते हैं। छात्रों का भविष्य और सुरक्षा दोनों ही इस समय दांव पर लगे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन