मेरठ (क्राइम डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में रविवार का दिन एक गरीब परिवार के लिए जिंदगी भर का नासूर बन गया। शहर के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में संचालित हो रहे एक निजी स्विमिंग पूल की घोर लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी ने एक 12 साल के मासूम बच्चे की जान ले ली। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं इलाके के लोगों में इस अवैध स्विमिंग पूल के संचालकों के खिलाफ भारी आक्रोश है।READ ALSO:-भीषण गर्मी और स्मार्ट मीटर के 'करंट' से झुलसीं बिजनौर की महिलाएं: कलेक्ट्रेट पर किया जोरदार प्रदर्शन, कहा- 'हमारे पुराने मीटर लौटाओ'
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यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम पर एक करारा तमाचा है कि कैसे चंद रुपयों के लालच में मौत के अड्डों को बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।
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कैसे हुआ हादसा: शाम 5 बजे नहाने गया था आकिल, फिर नहीं लौटा

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जानकारी के अनुसार, लिसाड़ी गेट क्षेत्र के मोहल्ला तारापुरी (आरा मशीन वाली गली) का रहने वाला 12 वर्षीय आकिल रविवार दोपहर से ही घर से लापता था। शाम करीब 5 बजे वह अपने मोहल्ले के कुछ अन्य बच्चों के साथ गर्मी से राहत पाने के लिए पिल्लोखड़ी रोड (जनकपुरी) स्थित 'वाटरलैंड स्विमिंग पूल' पर नहाने के लिए गया था।
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 देर तक पानी से बाहर नहीं आया, फिर लाश मिली; 8 साल पहले भी हादसा हुआ था

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प्रत्यक्षदर्शियों और साथ गए बच्चों के मुताबिक, आकिल पूल में नहाने के लिए उतरा, लेकिन काफी देर तक वह पानी से बाहर नहीं आया। वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी या ठेकेदार का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया। जब बहुत देर हो गई, तो पूल का संचालन कर रहे ठेकेदार वसीम को कुछ शक हुआ। उसने जब पूल के अंदर जाकर देखा, तो उसके होश उड़ गए। आकिल पानी की गहराई में अचेत अवस्था में डूबा हुआ था।
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आनन-फानन में बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत हापुड़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम के फेफड़ों में पानी भर चुका था और डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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सोशल मीडिया ने कराई शिनाख्त: रो-रोकर बेसुध हुई मां

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दूसरी तरफ, आकिल के घरवाले दोपहर से ही उसकी तलाश में दर-दर भटक रहे थे। आकिल के मौसेरे भाई ने बताया कि बच्चा दोपहर से लापता था और परिवार वाले हर जगह उसे ढूंढ रहे थे। इसी बीच किसी ने अस्पताल से आकिल की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई फोटो देखकर परिवार वालों ने उसकी शिनाख्त की और बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में अपने लाडले का बेजान शव देखकर मां नरगिस बेसुध होकर गिर पड़ीं। पिता युसूफ की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पूरे अस्पताल परिसर और मोहल्ले में मातम का माहौल छा गया।
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पुताई का काम करते हैं पिता, मंदबुद्धि था आकिल

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मृतक आकिल का परिवार बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आता है। उसके पिता युसूफ घरों में पुताई (पेंटिंग) का काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। युसूफ और नरगिस के चार बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी 14 वर्षीय निशा है, दूसरे नंबर पर 12 वर्षीय मृतक आकिल था। उससे छोटे दो भाई-बहन 8 वर्षीय ताजिम और 3 वर्षीय अलीशान हैं। परिवार वालों ने रुंधे गले से बताया कि आकिल थोड़ा मंदबुद्धि था, जिसके कारण वह खतरे को भांप नहीं सका और गहरे पानी में चला गया।
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मौत का ठेका: न लाइफगार्ड, न CCTV, राम भरोसे था स्विमिंग पूल

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पुलिस की प्रारंभिक जांच में स्विमिंग पूल संचालकों की जो क्रिमिनल लापरवाही सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है।
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    अवैध संचालन: यह स्विमिंग पूल पूरी तरह से अवैध तरीके से संचालित हो रहा था। इसका असली मालिक कोतवाली के जाटव गेट निवासी वासेगाजी बताया जा रहा है।
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    ठेके पर चल रहा था मौत का खेल: वासेगाजी ने चंद रुपयों की कमाई के लिए यह पूल श्याम नगर गली नंबर-2 के रहने वाले यासर और वसीम को ठेके पर दे रखा था।
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    सुरक्षा के नाम पर शून्य: सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि इतने बड़े पूल पर बच्चों को बचाने के लिए एक भी प्रशिक्षित लाइफगार्ड (Lifeguard) मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, घटना को कवर करने या निगरानी रखने के लिए वहां एक भी सीसीटीवी (CCTV) कैमरा नहीं लगा था। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
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8 साल पहले भी इसी पूल ने ली थी बलि, फिर कैसे खुला?

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स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। लोगों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब इस 'वाटरलैंड स्विमिंग पूल' में किसी की चिता जली हो। आज से ठीक 8 साल पहले भी इसी पूल में डूबने से एक 15 साल के किशोर की दर्दनाक मौत हुई थी।
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उस वक्त प्रशासन ने कार्रवाई का दिखावा करते हुए पूल को सील कर दिया था। लेकिन कुछ ही समय बाद, सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर या सेटिंग-गेटिंग के खेल से यह मौत का पूल फिर से गुलजार हो गया। सवाल यह उठता है कि जिस पूल में पहले एक जान जा चुकी थी, उसे बिना सुरक्षा मानकों (Fire NOC, Lifeguard Certification, CCTV) के दोबारा चलाने की अनुमति किसने और कैसे दे दी?
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पुलिस का एक्शन: संचालक और ठेकेदार हिरासत में

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घटना की सूचना मिलते ही लिसाड़ी गेट थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्विमिंग पूल के मालिक वासेगाजी और ठेकेदार वसीम को तुरंत हिरासत में ले लिया है। देर रात तक पूल को खाली कराकर उसे बंद करा दिया गया।
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क्या कहते हैं आला अधिकारी? इस पूरे मामले पर मेरठ के पुलिस अधीक्षक नगर (SP City) विनायक भोंसले ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, "लिसाड़ी गेट क्षेत्र के एक निजी स्विमिंग पूल में 12 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत का मामला सामने आया है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से पूल संचालक और ठेकेदार को हिरासत में ले लिया है। पूरे मामले की गहनता और बारीकी से जांच की जा रही है कि पूल के पास संचालन का लाइसेंस था या नहीं। फिलहाल पीड़ित परिजनों की ओर से थाने में लिखित तहरीर (शिकायत) नहीं दी गई है। तहरीर प्राप्त होते ही सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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आकिल की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उन सभी अवैध स्विमिंग पूल संचालकों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ एक चार्जशीट है, जो बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। गर्मी की छुट्टियों में ऐसे अवैध पूल्स की बाढ़ सी आ जाती है। अब देखना यह है कि क्या मेरठ प्रशासन इस घटना से सबक लेकर शहर में चल रहे अन्य सभी अवैध स्विमिंग पूल्स पर ताला लगाता है, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
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