उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए सनसनीखेज ललिता गौतम हत्याकांड ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा रखा है। इस मामले में मेरठ पुलिस लगातार नए खुलासे कर रही है। मुख्य आरोपी अंकुश चौधरी की गिरफ्तारी और उसके द्वारा जुर्म कबूल किए जाने के बाद अब पुलिस ने उसके भाई अंकित चौधरी को भी गिरफ्तार कर लिया है। अंकित चौधरी मुरादाबाद पीएसी (PAC) में तैनात है। आरोप है कि वह न सिर्फ साक्ष्य मिटाने में शामिल था, बल्कि वारदात वाले दिन वह छुट्टी लेकर मेरठ भी आया हुआ था। पुलिस ने अंकित को मुरादाबाद से गिरफ्तार कर गुपचुप तरीके से कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।READ ALSO:-Meerut Murder Case: पति से अवैध संबंधों के शक में ननद ने भाभी को चाकुओं से गोदा, नींद नहीं आई तो थाने पहुंचकर किया सरेंडर
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इस घटना ने समाज में पनपते अविश्वास और शक के कारण होने वाले जघन्य अपराधों की एक और खौफनाक तस्वीर पेश की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरी वारदात कैसे हुई और पुलिस की जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया है। 
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कैसे शुरू हुआ ललिता गौतम हत्याकांड का खौफनाक सिलसिला?

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रोहटा थाना क्षेत्र के थिरोट गांव की रहने वाली 20 वर्षीय ललिता गौतम एक होनहार छात्रा थी। वह बीए तृतीय वर्ष (BA 3rd Year) की पढ़ाई कर रही थी और अपनी शिक्षा पूरी करने के उद्देश्य से वर्तमान में अपने परिवार के साथ टीपी नगर थाना क्षेत्र के गगन एनक्लेव में किराए के मकान में रह रही थी।
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परिजनों के अनुसार, 15 मई की सुबह ललिता अपनी परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी। उस वक्त किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह अब कभी लौटकर वापस नहीं आएगी। जब देर शाम तक ललिता घर नहीं पहुंची, तो परिवार वालों को चिंता सताने लगी। उन्होंने उसकी सहेलियों, रिश्तेदारों और परिचितों के यहां काफी तलाश की, लेकिन ललिता का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। रात भर परिवार वाले अनहोनी की आशंका से परेशान रहे।
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अगले दिन यानी 16 मई को थक-हारकर परिजनों ने टीपी नगर थाने का रुख किया और अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी। 
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सीसीटीवी फुटेज से मिला पहला और अहम सुराग

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गुमशुदगी दर्ज होने के बाद टीपी नगर थाना पुलिस ने सबसे पहले ललिता के घर से लेकर कॉलेज तक के रास्तों की सीसीटीवी फुटेज खंगालने का काम शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस के हाथ एक अहम सुराग लगा। एक सीसीटीवी फुटेज में ललिता गांव कल्याणपुर निवासी अंकुश चौधरी नाम के युवक के साथ दिखाई दी।
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पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि अंकुश और ललिता पहले से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। सीसीटीवी में दोनों को साथ देखे जाने के बाद पुलिस का शक अंकुश पर गहरा गया और उसे तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
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शक और मोबाइल चैट बनी ललिता गौतम हत्याकांड की वजह

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हिरासत में लिए जाने के बाद शुरुआत में अंकुश पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और उसने अपना खौफनाक जुर्म कबूल कर लिया। अंकुश ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन ललिता उसके साथ ही थी।
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इसी दौरान, अंकुश ने किसी बहाने से ललिता का मोबाइल फोन ले लिया। मोबाइल चेक करते समय उसने ललिता के फोन में कुछ तस्वीरें और चैट्स देखीं, जिन्हें देखकर उसके मन में गहरा शक पैदा हो गया। उसे लगा कि ललिता उसे धोखा दे रही है। इसी शक और गुस्से में आकर अंकुश ने ललिता की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद, शव को ठिकाने लगाने के लिए उसने रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के पास एक सुनसान गन्ने के खेत में उसे फेंक दिया और वहां से फरार हो गया।
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गन्ने के खेत में शव की बरामदगी और परिवार का हंगामा

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अंकुश के इस इकबालिया बयान के बाद पुलिस टीम तुरंत भारी फोर्स के साथ रोहटा के उकसिया गांव पहुंची। अंकुश की निशानदेही पर पुलिस ने गन्ने के खेत में तलाशी अभियान चलाया और कुछ ही देर में ललिता गौतम का शव बरामद कर लिया।
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जैसे ही ललिता का शव मिलने की खबर गगन एनक्लेव और उसके पैतृक गांव थिरोट पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटी की इस निर्मम हत्या से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया। परिवार का स्पष्ट आरोप था कि इस हत्याकांड में केवल अंकुश शामिल नहीं है, बल्कि उसके साथ अन्य लोग भी मौजूद थे। परिजनों के दबाव और कई दिनों तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। 
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पीएसी जवान भाई अंकित चौधरी की गिरफ्तारी

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मृतका के परिजनों के हंगामे और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद इस ललिता गौतम हत्याकांड में एक नया मोड़ आया। जांच में अंकुश के भाई अंकित चौधरी का नाम सामने आया। अंकित उत्तर प्रदेश पुलिस की मुरादाबाद पीएसी (PAC) बटालियन में तैनात है।
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शुरुआत में पुलिस को संदेह था कि अंकित ने केवल साक्ष्य मिटाने में अपने भाई की मदद की है। लेकिन, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस दिन (15 मई) ललिता की हत्या हुई, उस दिन अंकित मुरादाबाद से छुट्टी लेकर मेरठ आया हुआ था। उसकी लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने उसकी संलिप्तता की ओर पुख्ता इशारा किया।
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इस खुलासे के तुरंत बाद, मंगलवार देर रात मेरठ पुलिस की एक विशेष टीम ने मुरादाबाद पीएसी के उच्च अधिकारियों से संपर्क किया। उन्हें पूरे मामले की गंभीरता से अवगत कराने के बाद पीएसी कैंपस से ही जवान अंकित चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया। 
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कोर्ट में पेशी और जेल

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चूंकि मामला बेहद संवेदनशील था और परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश था, इसलिए पुलिस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मंगलवार देर रात ही मेरठ पुलिस गिरफ्तार पीएसी जवान अंकित चौधरी को लेकर मुरादाबाद से मेरठ पहुंच गई थी।
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बुधवार की सुबह-सुबह, बिना किसी शोर-शराबे के अंकित का मेडिकल परीक्षण (डॉक्टरी जांच) कराया गया। इसके तुरंत बाद, पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच उसे गुपचुप तरीके से स्थानीय अदालत में पेश कर दिया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी अंकित चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है।
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ललिता गौतम हत्याकांड ने पूरे मेरठ शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक युवा छात्रा की सिर्फ शक के आधार पर बेरहमी से हत्या और उसमें एक सुरक्षाकर्मी (पीएसी जवान) का शामिल होना समाज की मानसिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। मुख्य आरोपी अंकुश और उसके भाई अंकित के जेल जाने से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय की उम्मीद बंधी है। हालांकि, पुलिस अब इस मामले में तीसरे आरोपी की भूमिका की सरगर्मी से जांच कर रही है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस इस जघन्य हत्याकांड से जुड़े और क्या सनसनीखेज खुलासे करती है।
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