सरधना (मेरठ)। यदि आप मेरठ-करनाल हाईवे (Meerut-Karnal Highway) से होकर गुजरते हैं और आपकी गाड़ी की रफ्तार सामान्य हाईवे की तरह 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली खबर है। इस हाईवे पर आबादी वाले और ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाले हिस्सों में यातायात पुलिस ने अचानक गति सीमा (Speed Limit) को घटाकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया है।READ ALSO:-मेरठ में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़: होटल टाउन एंड रेस्टोरेंट पर पुलिस का छापा, जबरन धंधे में धकेली गईं 8 युवतियां रेस्क्यू; मुख्य आरोपी से पिस्टल बरामद
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सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस नए नियम और गति सीमा में किए गए बदलाव की आधिकारिक जानकारी आम जनता और वाहन चालकों को नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, हाईवे पर दौड़ने वाले वाहनों के धड़ल्ले से 'ई-चालान' कट रहे हैं, जिससे आम जनता की जेब पर भारी चपत लग रही है और चालकों में भारी आक्रोश है।
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78 की स्पीड पर कटा चालान: पीड़ित बोले—"हाईवे पर 100 की लिमिट तो चालान क्यों?"

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इस अव्यवस्था का शिकार हुए हेमंत नाम के एक कार चालक ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि बीती 17 मई को दोपहर करीब एक बजे वह अपनी कार से करनाल हाईवे के रास्ते जा रहे थे। जेवरी गांव के निकट अचानक उनके मोबाइल पर ई-चालान का मैसेज आया, जिसमें उनके वाहन की गति 78 किमी प्रति घंटा दर्शाई गई थी और स्पीड लिमिट उल्लंघन का जुर्माना लगाया गया था।
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पीड़ित हेमंत का कहना है कि:

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"सामान्य तौर पर किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग या बड़े हाईवे पर हल्के वाहनों की गति सीमा 80 से 100 किमी प्रति घंटा तय होती है। मेरी गाड़ी की रफ्तार तो महज 78 किमी प्रति घंटा थी, जो कि सुरक्षित दायरे में आती है। इसके बावजूद बिना किसी पूर्व चेतावनी या स्पष्ट डिस्प्ले बोर्ड के चालान काट दिया गया, जो सीधे तौर पर जनता का आर्थिक शोषण है।"
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जब इस मामले की जमीनी पड़ताल की गई, तो पता चला कि यह अकेले हेमंत की कहानी नहीं है, बल्कि इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले सैकड़ों लोग इस अघोषित नियम के कारण जुर्माने का शिकार बन रहे हैं।
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SP ट्रैफिक के निरीक्षण के बाद बदले नियम, टोल कंपनी की दलील

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इस पूरे मामले के पीछे प्रशासनिक और सुरक्षात्मक कारण बताए जा रहे हैं। मामले की जांच में सामने आया कि पुलिस अधीक्षक (यातायात) राजेश श्रीवास्तव ने हाल ही में इस पूरे मार्ग का गहन निरीक्षण किया था।
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    मेंटेनेंस इंचार्ज का बयान: हाईवे की रखरखाव और पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी संभाल रही दिनेश चंद्रा अग्रवाल कंपनी के मेंटेनेंस इंचार्ज बबलू यादव ने बताया कि एसपी ट्रैफिक के आदेशानुसार ही गांवों और आबादी क्षेत्र वाले संवेदनशील हिस्सों में वाहनों की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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    क्षतिग्रस्त हुए सांकेतिक बोर्ड: भूनी टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर अभिनव यादव ने पुलिस के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आबादी क्षेत्र में नियंत्रित गति से वाहन चलने पर सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी। जब उनसे पूछा गया कि चालकों को इस गति सीमा की जानकारी देने वाले बोर्ड कहां हैं? तो उन्होंने माना कि कई स्थानों पर हादसों के कारण बोर्ड क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिन्हें जल्द ही दोबारा लगवाया जाएगा। हालांकि, अधिकारी इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए कि बिना बोर्ड लगाए चालान काटना कितना न्यायसंगत है।
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क्यों लिया गया यह फैसला? जानिए इसके पीछे की मुख्य वजह

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मेरठ के एसपी यातायात राजेश श्रीवास्तव ने इस नए नियम की अनिवार्यता को स्पष्ट करते हुए इसके पीछे का मुख्य कारण 'यातायात का बढ़ता दबाव' बताया है।
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1. दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे का प्रभाव

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जब से दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे (Delhi-Dehradun Greenfield Highway) का संचालन शुरू हुआ है, तब से मेरठ-करनाल हाईवे पर वाहनों का आवागमन अप्रत्याशित रूप से दोगुना हो गया है। देहरादून और हरिद्वार जाने वाले भारी और हल्के वाहनों का एक बड़ा हिस्सा इस रूट पर डायवर्ट हुआ है।
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2. दुर्घटनाओं के आंकड़ों में वृद्धि

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वाहनों की संख्या दोगुनी होने के साथ ही मेरठ-करनाल मार्ग पर स्थित ब्लैक स्पॉट्स (हादसों वाले क्षेत्र) और ग्रामीण कटों पर सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। इसे रोकने के लिए मेरठ की प्रशासनिक सीमा के भीतर आने वाले सभी आबादी क्षेत्रों में अधिकतम गति 60 किमी प्रति घंटा तय की गई है।
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जल्द लगेंगे 'स्पीड कैमरे' और नए साइन बोर्ड: प्रशासन

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आगामी योजना/कदम
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वर्तमान स्थिति
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प्रभाव
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स्पीड कैमरों की स्थापना
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एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों से वार्ता जारी
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आटोमेटिक स्पीड कैप्चरिंग और चालान
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सांकेतिक बोर्डों का री-इंस्टॉलेशन
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क्षतिग्रस्त बोर्डों को बदलने का काम शुरू
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चालकों को समय रहते मिलेगी गति की जानकारी
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गश्ती दल की सक्रियता
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जानी और सरधना पुलिस द्वारा मैनुअल निगरानी
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नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई
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एसपी ट्रैफिक ने साफ किया है कि वर्तमान में टोल कंपनी के माध्यम से महत्वपूर्ण मोड़ों पर सांकेतिक बोर्ड लगवाए जा रहे हैं। साथ ही, हाईवे पर परमानेंट स्पीड कैमरे लगाने के लिए एनएचएआई के उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। फिलहाल, डिजिटल राडार और कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ा दी गई है और 60 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार मिलने पर ई-चालान की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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वाहन चालकों के लिए सलाह: जब तक मेरठ-करनाल हाईवे पर पूरी तरह से स्पष्ट साइन बोर्ड नहीं लग जाते, तब तक किसी भी ग्रामीण आबादी, स्कूल या कट के नजदीक पहुंचते ही अपनी गाड़ी की रफ्तार को 50-60 किमी प्रति घंटा के दायरे में ले आएं, ताकि आप किसी अनचाहे चालान और दुर्घटना से बच सकें।
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