भगवान शिव के भक्तों का सबसे बड़ा पर्व जल्द ही शुरू होने वाला है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने अपनी तैयारियां पूरी तरह से तेज कर दी हैं। आगामी 30 जुलाई से प्रस्तावित इस विशाल धार्मिक यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए शासन-प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। गुरुवार की रात पुलिस लाइन सभागार में मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने सभी आला अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की गई। मेरठ कांवड़ यात्रा के दौरान देश भर से शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए इस बार अभूतपूर्व और हाई-टेक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।READ ALSO:-मेरठ में भारी बवाल: ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने सिवाया टोल पर रोका, धरने पर बैठे सांसद
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एडीजी की समीक्षा बैठक और हाई-टेक सुरक्षा का खाका

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कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए यूपी पुलिस ने तकनीक का भरपूर सहारा लिया है। एडीजी भानु भास्कर ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मेरठ कांवड़ यात्रा के दौरान चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए पूरे कांवड़ मार्ग और संवेदनशील स्थानों पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, आसमान से चप्पे-चप्पे की निगरानी के लिए भारी संख्या में ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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बैठक में डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडे समेत पुलिस और प्रशासन के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वे शिवभक्तों की सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखें। पुलिस कंट्रोल रूम को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा गया है, ताकि यात्रा के दौरान हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। 
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मेरठ कांवड़ यात्रा: 184 जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात

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भीड़ प्रबंधन और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी की गई है। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि इस बार मेरठ कांवड़ यात्रा में व्यवस्थाओं की कड़ी निगरानी के लिए पूरे जिले को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर 184 जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है।
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ये मजिस्ट्रेट यात्रा शुरू होने वाले दिन से लेकर शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक होने तक अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में 24 घंटे मुस्तैद रहेंगे। जनसुविधाओं, जैसे पीने का शुद्ध पानी, चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस, और विश्राम शिविरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना भी इन्हीं अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। यह एक अत्यंत संवेदनशील और विशाल आयोजन है, इसलिए प्रशासन ने सभी स्तर के अधिकारियों की सख्त जवाबदेही तय कर दी है।
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दो शिफ्टों में रहेगी अधिकारियों की ड्यूटी

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प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि कांवड़ मार्गों पर एक पल के लिए भी जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी न हो। इसके लिए अधिकारियों की ड्यूटी को दो अलग-अलग शिफ्टों (दिन और रात) में बांटा गया है। शहरी क्षेत्रों में सिटी मजिस्ट्रेट और चारों एसीएम (ACM) सुपर जोनल मजिस्ट्रेट की अहम जिम्मेदारी निभाएंगे। 
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वहीं, ग्रामीण इलाकों में संबंधित एसडीएम (SDM) को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। प्रशासन का साफ और सख्त निर्देश है कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर ये अधिकारी सबसे पहले मौके पर पहुंचेंगे और तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे, ताकि मेरठ कांवड़ यात्रा में कोई विघ्न न पड़े।
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एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल स्टेशनों पर खास फोकस

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इस बार यातायात के नए साधनों, विशेषकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और हाल ही में शुरू हुई रैपिड रेल (नमो भारत) के स्टेशनों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। एडीजी भानु भास्कर ने स्पष्ट किया कि इन महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
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चूंकि एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल स्टेशनों के पास से बड़ी संख्या में कांवड़िये गुजरेंगे, इसलिए वहां अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवान तैनात किए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कांवड़ियों को कोई असुविधा न हो और साथ ही एक्सप्रेसवे या रैपिड रेल से यात्रा करने वाले आम यात्रियों और रोजमर्रा के मुसाफिरों का सफर भी सुरक्षित और निर्बाध चलता रहे।
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डायवर्जन प्लान और सोशल मीडिया की निगरानी

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हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। इससे निपटने के लिए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने यातायात विभाग के अधिकारियों को समय रहते एक फुलप्रूफ रूट डायवर्जन प्लान लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं। भारी और व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश कांवड़ मार्गों पर पूरी तरह से वर्जित रहेगा। इसके लिए रूट मैप जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
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इसके अलावा, पुलिस की एक विशेष साइबर सेल मेरठ कांवड़ यात्रा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स, और व्हाट्सएप पर लगातार पैनी नजर रखेगी। डीआईजी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि माहौल बिगाड़ने या कोई भी भ्रामक अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कांवड़ मार्गों पर लगने वाले सेवा शिविरों की भी पुलिस और प्रशासन द्वारा नियमित तौर पर जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन हो सके।
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निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि 30 जुलाई से शुरू होने जा रही मेरठ कांवड़ यात्रा के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ चुका है। सीसीटीवी कैमरों का जाल, आसमान से ड्रोन की निगरानी, 184 मजिस्ट्रेटों की फौज और एक सख्त ट्रैफिक डायवर्जन प्लान के साथ, प्रशासन का एकमात्र लक्ष्य इस धार्मिक यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है। उम्मीद है कि पुलिस की इन चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के चलते कांवड़ियों और आम नागरिकों दोनों को एक सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिलेगा, जिससे यह यात्रा हर साल की तरह ऐतिहासिक रूप से सफल होगी।
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30 जुलाई से शुरू हो रही मेरठ कांवड़ यात्रा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा चाक-चौबंद कर ली है। एडीजी की समीक्षा बैठक के बाद जिले में 184 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। एक्सप्रेसवे व रैपिड रेल पर विशेष नजर रहेगी, जबकि सीसीटीवी और ड्रोन से पूरे कांवड़ रूट की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। प्रशासन ने अफवाहों से निपटने के लिए साइबर सेल को भी अलर्ट कर दिया है।
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