उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की धड़कन कहे जाने वाले मेरठ जिले में रविवार (29 मार्च 2026) को एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व नजारा देखने को मिल रहा है। मेरठ के सकौती टांडा स्थित हितकारी किसान इंटर कॉलेज के विशाल मैदान में मेरठ जाट संसद (International Jat Parliament) का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही पूरे पश्चिमी यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब से हजारों की संख्या में जाट समाज के लोग यहां जुटने लगे हैं। इस महाकुंभ का मुख्य आकर्षण वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल (Maharaja Surajmal) की उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण है। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए अब तक करीब 2000 से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला आयोजन स्थल पर पहुंच चुका है।Read also:-मेरठ के सूर्य प्लाजा में आधी रात का तांडव: मोबाइल दुकानों में लगी भीषण आग, लाखों का सामान जलकर खाक, बाल-बाल बचा पूरा कॉम्प्लेक्स
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पंडाल में लगाई गईं 10 हजार कुर्सियां मुख्य अतिथियों के पहुंचने से पहले ही खचाखच भर चुकी हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) शिरकत कर रहे हैं। उनके साथ राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) की मौजूदगी ने इस आयोजन के सियासी और सामाजिक दोनों ही पैमानों को बेहद अहम बना दिया है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस मेरठ जाट संसद के हर पहलू, इसकी तैयारियों, महाराजा सूरजमल के इतिहास और इसके राजनीतिक व सामाजिक मायनों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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 सकौती में जाट संसद के लिए बनाया गया पंडाल फुल हो गया है। करीब 10 हजार कुर्सियां लगाई गई हैं।

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मेरठ जाट संसद: 2000 ट्रैक्टरों का काफिला और ढोल-नगाड़ों की गूंज

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रविवार सुबह से ही दिल्ली-देहरादून हाईवे और मेरठ के तमाम संपर्क मार्गों पर एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। मेरठ जाट संसद में हिस्सा लेने के लिए किसान और युवा अपने पारंपरिक अंदाज में पहुंच रहे हैं। अब तक आयोजन स्थल की विशाल पार्किंग में 2000 से अधिक ट्रैक्टर खड़े हो चुके हैं। ट्रैक्टरों पर सवार युवा ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते हुए आयोजन स्थल की ओर बढ़ रहे हैं।
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 ट्रैक्टरों में लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए चल रहे हैं।

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आयोजनकर्ताओं के अनुसार, इस भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनसभा स्थल के पंडाल में लगाई गई 10 हजार कुर्सियां सुबह 10 बजे से पहले ही भर गईं। जो लोग बाद में आ रहे हैं, वे पंडाल के बाहर और ट्रैक्टरों पर खड़े होकर मंच की ओर देख रहे हैं। यह सिर्फ एक जनसभा नहीं है, बल्कि जाट समाज की एकजुटता, उनकी सांस्कृतिक विरासत और उनके गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत प्रदर्शन है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर और सहारनपुर से भारी तादाद में लोग पहुंचे हैं।
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महाराजा सूरजमल की 14वीं पीढ़ी के वंशज करेंगे अध्यक्षता

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इस मेरठ जाट संसद के कार्यक्रम की रूपरेखा बेहद सोच-समझकर और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। जाट समाज के अजेय योद्धा महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण का यह कार्यक्रम कोई साधारण इवेंट नहीं है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की अध्यक्षता खुद महाराजा विश्वेंद्र सिंह कर रहे हैं। महाराजा विश्वेंद्र सिंह राजस्थान सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे महाराजा सूरजमल की 14वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज हैं।
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उनका इस मंच पर होना पूरे जाट समुदाय के लिए एक भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण है। उनके अलावा मंच पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई बड़े जाट नेता मौजूद रहेंगे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, और अन्य कई दिग्गज शामिल हैं। इन सभी नेताओं का एक मंच पर आना जाट राजनीति की दिशा में एक नया संकेत भी दे रहा है।
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 महाराजा सूरजमल की प्रतिमा। इसी का अनावरण किया जाना है।

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सिलेंडर की किल्लत: लकड़ी और कोयले की भट्‌ठी पर बन रहा 11 हजार लोगों का भोजन

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इतने बड़े स्तर पर जब कोई आयोजन होता है, तो उसकी लॉजिस्टिक्स और व्यवस्थाएं संभालना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। मेरठ जाट संसद में एक दिलचस्प और जमीनी हकीकत भी देखने को मिली। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद थी, इसलिए खाने की व्यवस्था भी उसी स्तर की गई थी। लेकिन अंतिम समय में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई।
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इस समस्या ने हलवाइयों और आयोजनकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी थीं, लेकिन किसान और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों ने तुरंत इसका देसी समाधान निकाल लिया। जनसभा स्थल के पीछे बने विशाल भोजनालय में गैस के बजाय पारंपरिक लकड़ी और कोयले की भट्‌ठियों पर खाना पकाया जा रहा है।
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खाना बनाने वाले मुख्य हलवाई सुनील वर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, "गैस सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में मिल नहीं रहे थे और भीड़ हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा है। हम पिछले तीन दिनों से लगातार खाना बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। हमने तुरंत लकड़ी और कोयले की भट्‌ठियों का इंतजाम किया। अब तक हम 11 हजार से अधिक लोगों के लिए शुद्ध देसी घी का भोजन तैयार कर चुके हैं और काम अभी भी लगातार जारी है।" यह घटना दिखाती है कि जाट समाज किसी भी परिस्थिति में हार न मानकर, उसका तुरंत विकल्प खोजने में माहिर है।
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अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापकों का विजन और उद्देश्य

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इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने वाले अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक रामावतार पलसानिया और राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी दांतल का विजन बेहद स्पष्ट है। रामावतार पलसानिया ने मीडिया से बात करते हुए बताया, "आज का दिन हमारे समाज के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। आज पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, राजस्थान के कद्दावर सांसद हनुमान बेनीवाल, संजीव बालियान सहित वेस्ट यूपी और देशभर के प्रतिष्ठित जाट समाज के लोग यहां एकजुट हो रहे हैं। आज लाखों की संख्या में लोग पहुंचकर हमारे पुरखे महाराजा सूरजमल को नमन करेंगे।"
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मनु चौधरी दांतल ने बताया कि यह उत्तर प्रदेश में महाराजा सूरजमल की स्थापित होने वाली सबसे बड़ी प्रतिमा है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं है, बल्कि यह हमारे युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां महाराजा सूरजमल के शौर्य, उनके न्यायपूर्ण शासन और उनकी धर्मनिरपेक्ष नीतियों के बारे में जानें। अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद का उद्देश्य दुनियाभर में फैले जाट समाज को एक वैचारिक मंच पर लाना और उनके राजनीतिक व सामाजिक अधिकारों के लिए आवाज उठाना है।"
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कौन थे महाराजा सूरजमल? (Maharaja Surajmal: The Invincible Jat Ruler)

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मेरठ जाट संसद के मंच से जिस महान व्यक्तित्व की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है, उनका भारतीय इतिहास में एक अमिट और स्वर्णिम स्थान है। महाराजा सूरजमल (1707–1763) भरतपुर (राजस्थान) के एक प्रतापी जाट शासक थे। उन्हें उनके समकालीन इतिहासकारों ने "जाटों का प्लेटो" (Plato of the Jat tribe) और "जाट यूलिसिस" (Jat Ulysses) की उपाधि दी थी।
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उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 80 से अधिक युद्ध लड़े, लेकिन किसी भी युद्ध में उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ा। मुगलों, मराठों और अफगानों (अहमद शाह अब्दाली) जैसी बड़ी ताकतों के बीच उन्होंने न केवल अपने साम्राज्य (भरतपुर, धौलपुर, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, मेरठ, रोहतक तक) को सुरक्षित रखा, बल्कि उसका विस्तार भी किया। उनका बनवाया हुआ भरतपुर का 'लोहागढ़ किला' (Lohagarh Fort) भारत के उन चुनिंदा किलों में से एक है जिसे अंग्रेज भी कभी नहीं जीत सके। आज की युवा पीढ़ी को ऐसे अजेय योद्धा के इतिहास से जोड़ने के लिए ही यह विशाल प्रतिमा स्थापित की जा रही है।
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भगवंत मान और हनुमान बेनीवाल की उपस्थिति के सियासी मायने

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हालांकि मंच से यह कहा जा रहा है कि यह एक गैर-राजनीतिक और विशुद्ध सामाजिक कार्यक्रम है, लेकिन जब राजनीति के इतने बड़े चेहरे एक साथ एक मंच पर आएं, तो सियासी चर्चाएं होना लाजमी है।
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भगवंत मान: पंजाब से वेस्ट यूपी तक का कनेक्शन

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का मेरठ जाट संसद में मुख्य अतिथि के तौर पर आना कई मायनों में अहम है। पंजाब में जाट सिख एक बहुत ही मजबूत और प्रभावशाली समुदाय है। आम आदमी पार्टी (AAP) पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी अपनी जमीन तलाश रही है, जहां जाट वोटर हार-जीत तय करते हैं। भगवंत मान का इस मंच से समाज को संबोधित करना अप्रत्यक्ष रूप से आप (AAP) की किसान हितैषी और जाट हितैषी छवि को मजबूत करने का एक प्रयास माना जा रहा है।
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हनुमान बेनीवाल: युवाओं के बीच बढ़ता क्रेज

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दूसरी ओर, नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल युवाओं के बीच अपनी बेबाक और आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान में आरएलपी (RLP) के जरिए उन्होंने जाट राजनीति में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। उनका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आना और युवाओं द्वारा उनका जोशीला स्वागत इस बात का प्रमाण है कि वे अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव उत्तर भारत के अन्य जाट बहुल इलाकों में भी बढ़ रहा है।
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इन दोनों नेताओं का एक साथ आना और भाजपा (BJP) तथा रालोद (RLD) के गढ़ माने जाने वाले मेरठ में इतना बड़ा शक्ति प्रदर्शन करना, आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए कई नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।
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सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन

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इस मेरठ जाट संसद में एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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    ट्रैफिक व्यवस्था: भारी भीड़ और 2000 से अधिक ट्रैक्टरों के आगमन को देखते हुए दिल्ली-देहरादून हाईवे (NH-58) पर भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया है। रूट डायवर्जन लागू किया गया है ताकि आम जनता को जाम का सामना न करना पड़े।
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    पुलिस बल की तैनाती: आयोजन स्थल के आसपास कई थानों की फोर्स, पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
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    ड्रोन कैमरों से निगरानी: भीड़ को नियंत्रित करने और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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    पार्किंग: ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के लिए आयोजन स्थल से कुछ दूरी पर कई एकड़ में अस्थायी पार्किंग बनाई गई है ताकि मुख्य मार्ग बाधित न हो।
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प्रशासन की पूरी कोशिश है कि यह भव्य कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति का केंद्र

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से ही किसान और जाट राजनीति का 'एपिसेंटर' रहा है। चौधरी चरण सिंह से लेकर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत तक, इस धरती ने देश को कई बड़े किसान नेता दिए हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी और भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता इस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते हैं।
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ऐसे में मेरठ जाट संसद का आयोजन यह दर्शाता है कि जाट समाज अब केवल क्षेत्रीय राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह एक राष्ट्रीय स्तर का दबाव समूह (Pressure Group) और सामाजिक संगठन बनकर उभरना चाहता है। इस संसद के जरिए समाज के भीतर चल रही कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार व व्यवसाय की ओर प्रेरित करने के प्रस्ताव भी पारित किए जा सकते हैं।
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आयोजन स्थल का माहौल: एक उत्सव जैसा नजारा

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सकौती टांडा का हितकारी किसान इंटर कॉलेज आज किसी मेले के मैदान जैसा लग रहा है। पंडाल को तिरंगे और समाज के पारंपरिक झंडों से सजाया गया है। मंच पर महाराजा सूरजमल की एक विशाल तस्वीर लगाई गई है। चारों तरफ से आ रहे ट्रैक्टरों पर डीजे (DJ) और बड़े-बड़े स्पीकर लगे हैं जिन पर देशभक्ति और जाट समाज के गौरवशाली इतिहास से जुड़े गीत बज रहे हैं।
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बुजुर्ग हुक्का गुड़गुड़ाते हुए पुरानी पंचायत की यादें ताजा कर रहे हैं, तो युवा अपने मोबाइल से इस ऐतिहासिक पल की तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर लाइव कर रहे हैं। महिलाओं की भी एक बड़ी संख्या इस कार्यक्रम में पहुंची है, जो यह दर्शाता है कि समाज में अब लैंगिक समानता और महिलाओं की सामाजिक आयोजनों में भागीदारी भी बढ़ रही है।
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मेरठ के सकौती में आयोजित यह मेरठ जाट संसद निस्संदेह इस वर्ष के सबसे बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। 2000 से अधिक ट्रैक्टरों का पहुंचना, 10 हजार कुर्सियों का सुबह ही भर जाना, और लकड़ी-कोयले की भट्ठियों पर 11 हजार लोगों का भोजन बनना—यह सब इस आयोजन की विशालता और समाज की अटूट एकजुटता को दर्शाता है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद हनुमान बेनीवाल के हाथों महाराजा सूरजमल की उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण जाट इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल महाराजा सूरजमल के शौर्य और उनके अजेय इतिहास को याद करने का एक मंच है, बल्कि यह भविष्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन भी है। आने वाले दिनों में इस जाट संसद की गूंज यूपी ही नहीं, बल्कि दिल्ली की सियासत तक सुनाई देगी।
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संक्षिप्त सारांश (Summary): मेरठ के सकौती में आयोजित 'मेरठ जाट संसद' में उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया जा रहा है। कार्यक्रम में पंजाब के सीएम भगवंत मान और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल मुख्य रूप से शामिल हो रहे हैं। इस महासम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 2000 से ज्यादा ट्रैक्टरों से लोग पहुंचे हैं और 10,000 कुर्सियों वाला पंडाल खचाखच भर चुका है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण 11 हजार लोगों का खाना लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर बनाया गया। यह आयोजन जाट समाज की एकजुटता और उनके गौरवशाली इतिहास का एक भव्य प्रतीक बन गया है।
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