मेरठ (उत्तर प्रदेश)। ऐतिहासिक शहर मेरठ अब एक विश्वस्तरीय और 'स्मार्ट' शहर (Smart City) बनने की राह पर तेजी से दौड़ रहा है। ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और सड़कों को चौड़ा करने के लिए लाई गई उत्तर प्रदेश सरकार की 'मुख्यमंत्री ग्रिड योजना' (CM Grid Scheme) अब शहर की आबोहवा भी बदलने जा रही है। विकास की इस रफ्तार में सड़क चौड़ीकरण के दौरान जिन 435 पेड़ों को काटा गया था, अब उनकी भरपाई एक बेहद शानदार और हाईटेक तरीके से की जाएगी।READ ALSO:-Bigg Boss 20 Trailer Out: सलमान खान का नया 'ब्रह्मास्त्र', घर में मिलेगी दूसरी जिंदगी! जानें 'एक्स्ट्रा जीवनदान' का पूरा सच और कंटेस्टेंट्स की लिस्ट
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स्थानीय प्रशासन ने केवल पौधे लगाने की पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर शहर के चार प्रमुख और सबसे व्यस्त मार्गों पर 'अत्याधुनिक ग्रीन बेल्ट' (Modern Green Belt) विकसित करने का ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया है। वन विभाग, मेरठ नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के साझा प्रयासों से अगले मात्र 3 महीनों के भीतर मेरठ की सड़कें किसी विदेशी शहर के बुलेवार्ड (Boulevard) जैसी नजर आएंगी।
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तीन विभागों का 'मेगा जॉइंट वेंचर': सिर्फ हरियाली नहीं, मिलेगा सुकून

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प्रशासन का स्पष्ट विजन है कि यह प्रोजेक्ट केवल पेड़ों की गिनती पूरी करने के लिए नहीं है, बल्कि शहरवासियों को एक ऐसा 'ईको-फ्रेंडली स्पेस' (Eco-Friendly Space) देना है जहां वे सुकून के पल बिता सकें।
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इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए तीन प्रमुख विभाग एक साथ आए हैं:

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    वन विभाग (Forest Department): जो उच्च गुणवत्ता वाले पौधों, हरियाली और वानिकी कार्यों की देखरेख करेगा।
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    मेरठ विकास प्राधिकरण (MEDA): जो सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग की रूपरेखा तैयार करेगा।
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    नगर निगम (Nagar Nigam): जो नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे (रेलिंग, फुटपाथ आदि) का निर्माण करेगा।
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क्या होगा खास? ग्रीन बेल्ट में मिलेंगी ये 9 'स्मार्ट' सुविधाएं

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यह ग्रीन बेल्ट आम डिवाइडर या सड़क किनारे की घास से बिल्कुल अलग होगी। इसे एक 'लीनियर पार्क' (Linear Park) के कॉन्सेप्ट पर डिजाइन किया गया है। नागरिकों के लिए इसमें निम्नलिखित अत्याधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं:
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    सुरक्षा के लिए 6 फीट ऊंची रेलिंग: पौधों को आवारा पशुओं और अतिक्रमण से बचाने के लिए पूरे मार्ग पर मजबूत और डिजाइनर 6 फीट ऊंची रेलिंग लगाई जाएगी।
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    स्मार्ट फुटपाथ (Walkways): मॉर्निंग वॉक करने वालों और राहगीरों के लिए सुरक्षित, इंटरलॉकिंग टाइल्स से बने चौड़े फुटपाथ बनाए जाएंगे।
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    आरामदायक सिटिंग एरिया: जगह-जगह पर बुजुर्गों और राहगीरों के बैठने के लिए खूबसूरत बेंच और सीटें स्थापित की जाएंगी।
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    आकर्षक लैंडस्केपिंग: विशेषज्ञ लैंडस्केप डिजाइनरों की मदद से सजावटी झाड़ियां, फूलदार पौधे और विभिन्न प्रजातियों के पेड़ एक खास पैटर्न में लगाए जाएंगे।
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    स्प्रिंकलर सिस्टम (स्वचालित सिंचाई): पौधों को तपती गर्मी में भी हरा-भरा रखने के लिए फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation) प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे पानी की बर्बादी भी रुकेगी।
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    दीवारों पर शानदार 3D पेंटिंग: ग्रीन बेल्ट के आसपास की नीरस दीवारों को कैनवस में बदलकर उन पर मनमोहक और सांस्कृतिक पेंटिंग उकेरी जाएंगी।
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    छोटे फव्वारे (Mini Fountains): हरियाली के बीच बहते पानी का अहसास कराने के लिए जगह-जगह छोटे और आकर्षक फव्वारे लगाए जाएंगे।
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    रंग-बिरंगी फसाड लाइटें: रात के समय ग्रीन बेल्ट की सुंदरता को कई गुना बढ़ाने के लिए स्मार्ट एलईडी और रंग-बिरंगी लाइट्स (RGB Lighting) का इस्तेमाल किया जाएगा।
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    सघन पौधरोपण: सड़क के किनारे माइक्रो-फॉरेस्ट (Micro-Forest) की तर्ज पर सघन पौधरोपण किया जाएगा ताकि प्रदूषण के स्तर (AQI) को कम किया जा सके।
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4 प्रमुख मार्गों का चयन: जानिए कहां खर्च होंगे कितने करोड़ रुपये

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मेरठ शहर के ट्रैफिक और जनसंख्या घनत्व को देखते हुए इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पहले चरण में 4 सबसे अहम रूट चुने गए हैं। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 6.60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।
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1. कमिश्नरी आवास चौराहे से जेलचुंगी चौराहा (वीआईपी मार्ग)

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यह शहर का सबसे अहम प्रशासनिक रूट है। यहां सुंदरता और सुरक्षा दोनों पर जोर रहेगा।
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    सिविल कार्य की लागत: ₹1,71,73,493
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    ग्रीन बेल्ट (हरियाली) लागत: ₹31,88,456
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    कुल खर्च: लगभग ₹2.03 करोड़
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2. गंगानगर मुख्य डिवाइडर रोड (आवासीय हब)

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गंगानगर जैसे पॉश और बड़े आवासीय क्षेत्र के निवासियों के लिए यह एक वरदान साबित होगा।
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    सिविल कार्य की लागत: ₹1,63,73,022
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    ग्रीन बेल्ट (हरियाली) लागत: ₹32,55,594
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    कुल खर्च: लगभग ₹1.96 करोड़
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3. एल ब्लॉक तिराहे से एमसीसी अस्पताल होते हुए पीएससी ग्राउंड

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अस्पताल और पीएससी ग्राउंड होने के कारण यहां स्वच्छ हवा की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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    सिविल कार्य की लागत: ₹63,64,051
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    ग्रीन बेल्ट (हरियाली) लागत: ₹14,34,260
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    कुल खर्च: लगभग ₹77.98 लाख
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4. तेजगढ़ी से एल ब्लॉक तिराहा (कॉमर्शियल जंक्शन)

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व्यापारिक गतिविधियों और भारी ट्रैफिक वाले इस रूट पर यह ग्रीन बेल्ट प्रदूषण सोखने का काम करेगी।
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    सिविल कार्य की लागत: ₹1,44,77,713
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    ग्रीन बेल्ट (हरियाली) लागत: ₹37,29,541
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    कुल खर्च: लगभग ₹1.82 करोड़
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टेंडर प्रक्रिया तैयार: 3 महीने की सख्त डेडलाइन

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प्रशासन इस प्रोजेक्ट को लेकर जरा भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। काम की गुणवत्ता और तेजी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई गई है।
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इस संबंध में जानकारी देते हुए मेरठ की प्रभागीय निदेशक वानिकी (DFO), वंदना फोगाट ने बताया:

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"सीएम ग्रिड योजना के तहत जो पेड़ काटे गए थे, उनकी जगह उससे कहीं अधिक सुंदर और सुसज्जित ग्रीन बेल्ट विकसित कर पौधे लगाए जाएंगे। यह एक संयुक्त अभियान है जो नगर निगम और मेडा के सहयोग से पूरा होगा। काम में पूरी पारदर्शिता और विशेषज्ञता बनाए रखने के लिए सिविल निर्माण कार्य (रेलिंग, फुटपाथ) और ग्रीन बेल्ट विकास कार्य (पौधरोपण, सजावट) के टेंडर अलग-अलग जारी किए जाएंगे। जिस भी कार्यदायी संस्था (Agency) को यह ठेका मिलेगा, उसके लिए कार्य पूरा करने की सख्त समयावधि 3 माह तय की गई है।"
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एक नए युग की शुरुआत

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विकास के लिए अक्सर प्रकृति को कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन मेरठ प्रशासन का यह कदम साबित करता है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और एनवायरनमेंट (Infrastructure and Environment) दोनों एक साथ कदमताल कर सकते हैं। सीएम ग्रिड योजना ने जहां एक तरफ मेरठ की सड़कों को चौड़ा कर जाम के झाम से मुक्ति दिलाई है, वहीं अब इन 4 हाईटेक ग्रीन बेल्ट्स के बनने से शहर का 'सौंदर्यबोध' (Aesthetics) पूरी तरह से बदल जाएगा।
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महज 90 दिनों (3 महीने) के बाद, जब मेरठवासी इन मार्गों से गुजरेंगे, तो फव्वारों की ठंडक, रंग-बिरंगी रोशनी और लहलहाते पौधे उन्हें एक 'स्मार्ट सिटी' के सच्चे मायने समझाएंगे। यह पहल पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी शहरी-वानिकी (Urban Forestry) का एक बेहतरीन मॉडल बनने जा रही है।
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