उत्तर प्रदेश के मेरठ से अपराध और धोखाधड़ी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार सुबह मेरठ में नकली तार का एक बड़ा जखीरा पकड़ा गया है। मुंबई की एक प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी की गुप्त शिकायत पर टीपीनगर थाना पुलिस ने यह अहम कार्रवाई की है। इस छापेमारी में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचे जा रहे करीब 12 लाख रुपए कीमत के नकली तार बरामद किए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे सघन पूछताछ की जा रही है।READ ALSO:-'20 किलो अनार लेकर आना...': मेरठ में 1991 बैच के दरोगा का अनोखा रिश्वत कांड, कोडवर्ड डिकोड कर एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ दबोचा!
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मुंबई की डिटेक्टिव एजेंसी ने की पुलिस से शिकायत

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मुंबई स्थित आईपी इन्वेस्टिगेशन एंड डिटेक्टिव सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के फील्ड मैनेजर ललित कुमार ने इस पूरे मामले की अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी यह प्राइवेट एजेंसी पैनासोनिक, वी-गार्ड, पॉलीकैब, क्रॉम्पटन और गोल्ड मेडल जैसी नामी इलेक्ट्रिकल कंपनियों के नकली उत्पादों की गहन जांच करती है।
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दरअसल, एजेंसी को गुप्त सूचना मिली थी कि मेरठ के बाजारों में इन ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली बिजली के तार भारी मात्रा में सप्लाई किए जा रहे हैं। इस गंभीर सूचना के बाद, एजेंसी ने अपनी जांच तेज कर दी और सबूत जुटाकर सीधे स्थानीय पुलिस को जानकारी दी।
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टीपीनगर पुलिस की मेरठ में नकली तार पर बड़ी छापेमारी

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एजेंसी से पुख्ता सूचना प्राप्त होने के बाद टीपीनगर पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। इसके बाद, पुलिस और डिटेक्टिव एजेंसी की टीम ने मिलकर ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में संयुक्त रूप से एक बड़ी छापेमारी की। इस दौरान एक युवक संदिग्ध अवस्था में मिला, जिसके पास कई बोरे रखे हुए थे।
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जब पुलिस ने युवक के पास मौजूद सामान की तलाशी ली, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। मौके पर भारी मात्रा में मेरठ में नकली तार पकड़े गए। पुलिस ने बिना कोई देरी किए युवक को मौके से ही हिरासत में ले लिया और सारा संदिग्ध माल जब्त कर थाने ले आई।
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पांच नामी कंपनियों के 351 बंडल हुए बरामद

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पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मोहित शर्मा बताया। वह मेरठ जिले के ही सरधना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खेड़ा गांव का निवासी है। पुलिस ने आरोपी के पास से मौके पर कुल पांच बोरे बरामद किए थे।
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जब थाने लाकर इनकी गिनती की गई, तो इनमें से बिजली के तारों के कुल 351 बंडल निकले। बरामद माल में गोल्ड मेडल के 69, वी-गार्ड के 71, पॉलीकैब के 74, क्रॉम्पटन के 66 और एंकर के 71 बंडल शामिल थे।
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यह सभी मेरठ में नकली तार थे, जिनकी पैकिंग हुबहू असली जैसी की गई थी। इसे देखकर आम ग्राहक के लिए असली-नकली का फर्क करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। मोहित न तो माल का कोई पक्का बिल दिखा सका और न ही संतोषजनक जवाब दे पाया।
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दिल्ली से आता था माल, मेरठ में बदलती थी पैकिंग

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पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी मोहित शर्मा ने अपने काम करने के तरीके को लेकर बड़े खुलासे किए। उसने बताया कि वह यह सारा नकली माल दिल्ली से थोक में खरीदकर लाता था। उसे दिल्ली के बाजार में एक बंडल मात्र 700 रुपए में मिल जाता था।
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इसके अलावा, दिल्ली से ही नामी कंपनियों के नाम वाले खाली डिब्बे भी खरीद लिए जाते थे। फिर मेरठ लाकर इन्हीं डिब्बों में तारों की पैकिंग की जाती थी।
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इसके बाद, वह अपने परिचित दुकानदारों को 1000 से 1200 रुपए प्रति बंडल में इसे बेचता था। लालच में आकर दुकानदार इसे ग्राहकों को 2200 से 2300 रुपए तक में बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे।
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टीपीनगर इलाके में पहले भी पकड़ा गया था फर्जी सामान

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एजेंसी के फील्ड मैनेजर ललित कुमार ने बताया कि इस इलाके में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी ट्रांसपोर्ट नगर इलाके से ही ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचे जा रहे नकली मिक्सर-ग्राइंडर भारी मात्रा में बरामद किए गए थे।
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एक ही इलाके से बार-बार नकली सामान मिलने के बाद एजेंसी और पुलिस चौकन्नी हो गई है। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद एजेंसी ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे बाजार से सामान खरीदते समय ज्यादा सावधानी बरतें।
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असली और नकली तारों की पैकिंग में कैसे करें अंतर?

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ललित कुमार ने बताया कि असली और नकली पैकिंग में बहुत बारीक अंतर होता है, जिसे ध्यान से देखने पर आसानी से पहचाना जा सकता है। असली पैकिंग का कलर कॉम्बिनेशन एकदम साफ होता है और कंपनी का नाम थ्री-डी (3D) इफेक्ट में उभरा होता है।
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दूसरी ओर, नकली पैकिंग में इसकी नकल करने की पूरी कोशिश की जाती है, लेकिन उसकी फिनिशिंग असली जैसी नहीं होती। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे हमेशा अधिकृत दुकानों (Authorized Dealers) से ही सामान खरीदें और खरीदारी के बाद पक्का बिल (GST Invoice) जरूर मांगें।
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निष्कर्ष के तौर पर, मेरठ में नकली तार का यह भंडाफोड़ पुलिस और डिटेक्टिव एजेंसी की एक बड़ी कामयाबी है। आरोपी मोहित शर्मा के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने सभी बोरों की सैंपलिंग कर उन्हें सील कर दिया है। यह कार्रवाई ग्राहकों को नकली उत्पादों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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