उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने रिश्तों की अहमियत और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक कलयुगी बेटे ने मामूली कहासुनी के बाद अपनी ही सगी मां की बेदर्दी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आज मेरठ हस्तिनापुर मर्डर न्यूज़ (Meerut Hastinapur Murder News) की ही चर्चा है। हत्यारे बेटे ने अपने जघन्य अपराध को छिपाने के लिए एक बेहद शातिर कहानी रची और गांव वालों को गुमराह करने की कोशिश की कि उसकी मां की मौत 'हार्ट अटैक' (दिल का दौरा) पड़ने से हुई है।READ ALSO:-मेरठ में 'जाट शक्ति' का शंखनाद: 2000 ट्रैक्टर, लाखों की भीड़ और देसी भट्ठियों पर पकता खाना; जानें इंटरनेशनल जाट पार्लियामेंट की पूरी इनसाइड स्टोरी
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन कहते हैं कि जुर्म कभी छिपता नहीं है। ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस हत्यारे की पूरी पोल खोल दी। ख़बरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम आपको इस हत्याकांड की पूरी कहानी, आरोपी के काले अतीत और पुलिस की जांच से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू से रूबरू कराएंगे।
\r\n\r\n 
हस्तिनापुर के अकबरपुर गढ़ी की खौफनाक वारदात
\r\n\r\nयह पूरी घटना मेरठ जिले के ऐतिहासिक क्षेत्र हस्तिनापुर थाना अंतर्गत आने वाले अकबरपुर गढ़ी स्थित 'गढ़ी कॉलोनी' की है। शनिवार का दिन इस शांत कॉलोनी के लिए एक खौफनाक मंजर लेकर आया। गढ़ी कॉलोनी में 50 वर्षीय निर्मला देवी अपने बेटे संजय दास के साथ एक छोटे से मकान में रहती थीं। घर में केवल मां और बेटा ही रहते थे। जानकारी के अनुसार, संजय का एक और भाई है, जो रोजगार के सिलसिले में गांव से बाहर रहकर नौकरी करता है। घर में केवल दो ही सदस्य होने के कारण अक्सर उनके बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
शनिवार की सुबह भी कुछ ऐसी ही थी। पड़ोसियों के मुताबिक, मां-बेटे के बीच सुबह किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते यह कहासुनी एक हिंसक झड़प में बदल गई। दोपहर करीब 12 बजे गुस्से में आगबबूला होकर संजय दास ने अपनी 50 वर्षीय बूढ़ी मां निर्मला पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए अपनी जन्मदात्री मां का गला घोंट दिया, जिससे निर्मला की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
'हार्ट अटैक' का रचा था झूठा नाटक
\r\n\r\nइस मेरठ हस्तिनापुर मर्डर न्यूज़ में सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी का वह शातिर दिमाग है, जिससे उसने पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंकने की साजिश रची। अपनी मां को मौत के घाट उतारने के बाद संजय दास बिल्कुल शांत हो गया। उसने शव को घर के अंदर ही चारपाई पर लिटा दिया और बाहर आकर गांव वालों के सामने रोने का नाटक करने लगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जब पड़ोसियों ने उससे निर्मला की तबीयत के बारे में पूछा, तो उसने बड़ी ही चालाकी से यह अफवाह फैला दी कि उसकी मां को अचानक 'हार्ट अटैक' (Heart Attack) आया था, जिसके कारण उनकी जान चली गई। शुरुआत में कुछ ग्रामीणों ने उसकी बातों पर यकीन भी कर लिया, क्योंकि निर्मला की उम्र 50 वर्ष थी और अक्सर इस उम्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। संजय दास ने सोचा था कि वह इस झूठी कहानी के दम पर अपनी मां का अंतिम संस्कार करवा देगा और उसके अपराध का किसी को पता भी नहीं चलेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों की सतर्कता से खुला राज: शाम तक नहीं की अंतिम संस्कार की तैयारी
\r\n\r\nहत्यारे की योजना भले ही कितनी भी शातिर क्यों न रही हो, लेकिन गांव वालों की पैनी नजरों से वह बच नहीं सका। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, यदि किसी की मृत्यु दिन में हो जाती है, तो अमूमन शाम ढलने से पहले उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। लेकिन शनिवार की शाम तक संजय दास ने अपनी मां के अंतिम संस्कार की कोई भी तैयारी शुरू नहीं की थी। न तो उसने लकड़ियों का इंतजाम किया और न ही रिश्तेदारों को कोई स्पष्ट जानकारी दी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उसकी इस संदिग्ध गतिविधि और बेचैनी ने ग्रामीणों के मन में शक के बीज बो दिए। जब कुछ बुजुर्ग महिलाओं और पड़ोसियों ने घर के अंदर जाकर निर्मला के शव को करीब से देखा, तो उनके गले पर कुछ संदिग्ध निशान दिखाई दिए। इसके बाद ग्रामीणों का शक यकीन में बदल गया कि निर्मला की मौत कोई प्राकृतिक मौत या हार्ट अटैक नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी हत्या है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों ने बिना देर किए तुरंत हस्तिनापुर थाना पुलिस को इस मामले की गुप्त सूचना दे दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम दल-बल के साथ गढ़ी कॉलोनी स्थित घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस को देखते ही आरोपी संजय दास के चेहरे की हवाइयां उड़ने लगीं। पुलिस ने तुरंत शव को अपने कब्जे में ले लिया और जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो आरोपी टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
18 महीने पहले अपने ही बेटे की ले चुका था जान: एक खूंखार अतीत
\r\n\r\nइस पूरी घटना की जांच कर रही पुलिस और ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सदमा तब लगा जब संजय दास का पुराना आपराधिक इतिहास (Criminal History) सामने आया। यह कोई पहला मौका नहीं था जब संजय ने किसी की जान ली हो। करीब 18 महीने (डेढ़ साल) पहले इसी दरिंदे ने अपने सगे मासूम बेटे की भी निर्ममता से हत्या कर दी थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जानकारी के अनुसार, उस वक्त भी संजय ने घरेलू विवाद के चलते अपने ही खून से हाथ रंगे थे। बेटे की हत्या के जुर्म में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया की कुछ खामियों या अन्य कारणों के चलते वह लगभग सात महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद जमानत (Bail) पर बाहर आ गया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एक हत्यारा जब समाज में वापस लौटता है, तो उसका मानसिक संतुलन कैसा होता है, संजय दास उसका एक जीता-जागता उदाहरण है। बेटे की हत्या के बाद उसकी पत्नी बुरी तरह टूट गई थी। एक मां के लिए अपने ही पति द्वारा अपने बच्चे की हत्या के सदमे को बर्दाश्त करना नामुमकिन था। यही कारण था कि जेल से छूटने के बाद संजय की पत्नी हमेशा के लिए उसे छोड़कर मायके चली गई थी। पत्नी के जाने के बाद वह अपनी मां निर्मला के साथ ही रह रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अपराधी का आक्रामक स्वभाव और समाज का गुस्सा
\r\n\r\nस्थानीय निवासियों का कहना है कि संजय दास का स्वभाव शुरू से ही बेहद चिड़चिड़ा, हिंसक और आक्रामक रहा है। वह छोटी-छोटी बातों पर लड़ने-मरने पर उतारू हो जाता था। पड़ोसियों ने बताया कि वह अक्सर अपनी मां निर्मला के साथ भी मारपीट और गाली-गलौज करता था। लेकिन एक मां की ममता ही थी कि वह अपने अपराधी बेटे के जुल्म सहकर भी उसके साथ रह रही थी और उसे खाना खिला रही थी। बदले में उस कलयुगी बेटे ने अपनी उसी मां की जीवन लीला समाप्त कर दी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस मेरठ हस्तिनापुर मर्डर न्यूज़ के सामने आने के बाद अकबरपुर गढ़ी और आसपास के गांवों में भारी आक्रोश का माहौल है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि ऐसे खूंखार और आदतन अपराधी (Habitual Offender) को समाज में खुला घूमने का कोई अधिकार नहीं है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Court) में सुनवाई हो और आरोपी को फांसी की सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी इंसान ऐसे जघन्य अपराध करने की हिम्मत न कर सके।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
\r\n\r\nहस्तिनापुर थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी संजय दास को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ हत्या (Murder) और साक्ष्य मिटाने (Destruction of Evidence) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया है और वहां से कुछ अहम सुबूत भी जुटाए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
निर्मला के शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम (Post-Mortem) के लिए मेरठ के जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट हो पाएगा, जो अदालत में इस केस को मजबूत बनाने के लिए सबसे अहम दस्तावेज साबित होगा। इसके साथ ही पुलिस उन परिस्थितियों की भी जांच कर रही है जिनके तहत एक हत्या के आरोपी को महज सात महीने में जमानत मिल गई थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पारिवारिक रिश्तों के पतन का एक डरावना सच
\r\n\r\nआजकल समाज में जिस तेजी से पारिवारिक अपराधों (Family Crimes) का ग्राफ बढ़ रहा है, वह एक बेहद चिंताजनक विषय है। मेरठ के हस्तिनापुर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत और रिश्तों की मर्यादाएं किस कदर तार-तार हो रही हैं। एक पिता अपने बच्चे की हत्या कर देता है और वही इंसान फिर अपनी बूढ़ी मां को मार डालता है। यह घटना समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के लिए भी शोध का विषय है कि आखिर एक इंसान का दिमाग इतना हिंसक कैसे हो सकता है कि उसे अपने सगे खून के प्रति भी कोई दया महसूस न हो।
\r\n\r\n\r\n\r\n
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदतन अपराधियों के पीछे अक्सर नशा, गहरी मानसिक विकृति, बेरोजगारी या फिर कोई गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार (Psychological Disorder) छिपा होता है। जब ऐसे लोग एक बार अपराध करने के बाद आसानी से कानूनी शिकंजे से छूटकर बाहर आ जाते हैं, तो उनके हौसले और ज्यादा बुलंद हो जाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस वेरिफिकेशन और रिहैबिलिटेशन (Rehabilitation) की प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
न्याय की गुहार और एक कठोर सबक
\r\n\r\nमेरठ के अकबरपुर गढ़ी में हुई निर्मला की हत्या की यह मेरठ हस्तिनापुर मर्डर न्यूज़ केवल एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना दिखाती है कि अगर एक बार अपराध को नजरअंदाज किया जाए या अपराधी को आसानी से छोड़ दिया जाए, तो वह भविष्य में और भी बड़े और खौफनाक अपराध कर सकता है। अगर 18 महीने पहले बेटे की हत्या के मामले में आरोपी संजय दास को कठोरतम सजा मिल गई होती, तो शायद आज एक बेकसूर और बेबस मां की जान नहीं जाती।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अब पुलिस और न्यायपालिका की यह जिम्मेदारी है कि इस दरिंदे को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए। ग्रामीणों की सतर्कता और बहादुरी भी इस मामले में काबिले तारीफ है, जिन्होंने एक हत्यारे के बुने हुए 'हार्ट अटैक' के झूठे जाल को समय रहते भांप लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। ख़बरीलाल की टीम इस मामले की हर अपडेट पर अपनी नजर बनाए रखेगी और प्रशासन से यह उम्मीद करती है कि पीड़ित परिवार (मृतका के दूसरे बेटे) को न्याय मिलेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हस्तिनापुर थाना क्षेत्र (अकबरपुर गढ़ी) में एक कलयुगी बेटे, संजय दास ने घरेलू विवाद के चलते अपनी 50 वर्षीय मां निर्मला की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने गांव वालों को गुमराह करने के लिए हार्ट अटैक की झूठी कहानी रची। हालांकि, अंतिम संस्कार की कोई तैयारी न करने पर ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को बुला लिया। पुलिस जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया कि यह आरोपी 18 महीने पहले अपने ही सगे बेटे की हत्या के आरोप में 7 महीने जेल काट चुका है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.