मेरठ (स्पेशल डेस्क): उत्तर भारत समेत पूरे उत्तर प्रदेश में इस समय सूर्य देव अपना रौद्र रूप दिखा रहे हैं। आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली 'लू' (Heatwave) ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मई का महीना खत्म होने को है और जून की तपिश का खौफ अभी से लोगों के दिलों में बैठ गया है। मौसम विभाग का भी अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में और अधिक वृद्धि हो सकती है। इस जानलेवा गर्मी का सबसे अधिक असर हमारे स्कूली बच्चों, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों पर पड़ रहा है।READ ALSO:-UP Weather Red-Hot: आसमान से बरस रही 'आग', यूपी बना भट्टी! बांदा में पारा 47.6°C पार, 39 जिलों में 'लू' का महा-अलर्ट
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इसी गंभीर और संवेदनशील स्थिति को देखते हुए मेरठ शहर के प्रमुख समाजसेवी और बेगम पुल व्यापार संघ व प्रयास वेलफेयर सोसाइटी के महामंत्री श्री पुनीत शर्मा ने एक बेहद अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने शहर और प्रदेश के सभी विद्यालय प्रबंधनों से एक मार्मिक और तर्कसंगत अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों में तत्काल प्रभाव से ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) घोषित करें या फिर ऑनलाइन कक्षाओं (Online Classes) का संचालन शुरू करें।
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माननीय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों का दिया हवाला

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पुनीत शर्मा ने अपनी अपील में स्पष्ट किया है कि यह केवल एक व्यक्तिगत मांग नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की भी यही मंशा है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जारी किए गए गर्मी से बचाव के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है। सरकार बार-बार यह एडवाइजरी जारी कर रही है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, लोग तेज धूप और लू में घर से बाहर न निकलें।
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ऐसे में छोटे-छोटे बच्चों को चिलचिलाती धूप में स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। प्रशासन और सरकार लगातार लोगों को हीटवेव (Heatstroke) से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। पुनीत शर्मा का कहना है कि जब सरकार इतनी संवेदनशील है, तो निजी और सरकारी स्कूल प्रबंधनों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और बिना किसी देरी के स्कूलों को बंद करके ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प अपनाना चाहिए।
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छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि

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वर्तमान समय में सुबह 8 बजे से ही तेज धूप चुभने लगती है और दोपहर होते-होते तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है। जब बच्चे स्कूल से लौटते हैं, वह समय दिन का सबसे गर्म प्रहर होता है। इस दौरान बच्चों के लू की चपेट में आने का सबसे अधिक खतरा रहता है। डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, नाक से खून आना (नकसीर), उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी समस्याएं बच्चों में तेजी से बढ़ रही हैं।
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पुनीत शर्मा जी ने अपनी अपील में केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि अध्यापकों और स्कूल के अन्य कर्मचारियों (जैसे बस ड्राइवर, कंडक्टर, गार्ड, और सफाई कर्मचारी) की सुरक्षा की भी बात कही है। ये कर्मचारी दिन भर गर्मी में कड़ी मेहनत करते हैं। यदि स्कूलों में अवकाश घोषित होता है या ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जाती हैं, तो इन सभी की जान को भीषण गर्मी के प्रकोप से बचाया जा सकता है।
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ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई का भी नहीं होगा नुकसान

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कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने देखा कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल कितनी प्रभावी रूप से किया जा सकता है। आज लगभग सभी स्कूलों और अभिभावकों के पास ऑनलाइन शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। पुनीत शर्मा जी का सुझाव है कि यदि स्कूल प्रबंधन तुरंत छुट्टियां घोषित नहीं करना चाहते हैं, तो कम से कम जून माह तक ऑनलाइन क्लास का संचालन किया जाए।
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इससे बच्चों की पढ़ाई का कोई नुकसान नहीं होगा, सिलेबस समय पर पूरा होता रहेगा, और सबसे महत्वपूर्ण बात—बच्चे अपने घरों में सुरक्षित रहेंगे। अभिभावक भी इस विकल्प को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं क्योंकि वे अपने नौनिहालों को इस झुलसाती धूप में बाहर भेजने से डर रहे हैं।
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ऊर्जा की बचत: एक दूरगामी और पर्यावरण-हितैषी सोच

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पुनीत शर्मा के इस संदेश में एक बहुत ही गहरा और दूरगामी विचार भी छिपा है—ऊर्जा की बचत (Energy Conservation)। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत अपने उच्चतम स्तर पर होती है। स्कूलों में बड़ी संख्या में पंखे, एयर कंडीशनर (AC), कूलर, लाइटें और वॉटर कूलर लगातार चलते हैं। इसके अलावा बच्चों को लाने-ले जाने वाली सैकड़ों स्कूल बसों, वैन और निजी वाहनों में हजारों लीटर ईंधन (पेट्रोल/डीजल) रोजाना खर्च होता है।
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यदि स्कूल बंद कर दिए जाते हैं या ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होती हैं, तो स्कूल परिसरों में होने वाली बिजली की भारी खपत को रोका जा सकेगा। इससे पावर ग्रिड पर दबाव कम होगा और शहर में हो रही अघोषित बिजली कटौती से आम जनता को राहत मिलेगी। इसके साथ ही वाहनों का आवागमन कम होने से कार्बन एमिशन (प्रदूषण) में भी कमी आएगी। यह कदम न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि पर्यावरण और राष्ट्रीय संसाधनों की बचत के लिए भी एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
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अभिभावकों में भी है भारी चिंता

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जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूल बसों में एसी नहीं होते, और जो होते हैं वो इतनी भीषण गर्मी में काम नहीं करते। स्कूल से घर आते समय ऑटो और रिक्शा में बच्चों का गर्मी से बुरा हाल हो जाता है। अस्पतालों में हीटस्ट्रोक से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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शहर के कई सामाजिक संगठनों ने पुनीत शर्मा जी की इस पहल का पुरजोर समर्थन किया है। व्यापार संघ के अन्य सदस्यों का भी मानना है कि समाज के हर वर्ग को इस समय बच्चों की सुरक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।
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प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

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इस अपील के माध्यम से न केवल स्कूल प्रबंधनों को जगाने का प्रयास किया गया है, बल्कि जिला प्रशासन (DM) और शिक्षा विभाग (DIOS/BSA) का ध्यान भी इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया गया है। यदि स्कूल प्रबंधन स्वेच्छा से इस पर निर्णय नहीं लेते हैं, तो जिलाधिकारी को अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से पूरे जिले के विद्यालयों में अवकाश घोषित कर देना चाहिए।
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समय की मांग है त्वरित निर्णय

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पुनीत शर्मा (महामंत्री - बेगम पुल व्यापार संघ व प्रयास वेलफेयर सोसाइटी, मेरठ) द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह से जनहित में है। गर्मी का यह प्रकोप कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) का रूप ले चुका है। ऐसी विषम परिस्थितियों में जिद या औपचारिकताओं को किनारे रखकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
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सभी स्कूल प्रबंधनों, शिक्षा अधिकारियों और जिला प्रशासन को इस अपील पर गंभीरता से विचार करते हुए बिना किसी देरी के ग्रीष्मकालीन अवकाश या ऑनलाइन कक्षाओं का शासनादेश जारी करना चाहिए। बच्चों का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब उनका वर्तमान और उनका स्वास्थ्य पूरी तरह से सुरक्षित होगा। एक सही समय पर लिया गया फैसला कई मासूम जिंदगियों को 'लू' के इस जानलेवा कहर से बचा सकता है।
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