उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ भ्रष्टाचार निवारण (एंटी करप्शन) टीम ने एक भ्रष्ट सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथ दबोचा है। मेरठ में दरोगा गिरफ्तार होने की यह घटना मंगलवार दोपहर की है। गंगानगर थाने में तैनात इस दरोगा ने विवेचना के नाम पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। उसने रिश्वत मांगने के लिए 'अनार' के खास कोडवर्ड का इस्तेमाल किया था।READ ALSO:-WhatsApp का ऐतिहासिक प्राइवेसी रिवॉल्यूशन: अब बिना मोबाइल नंबर दिए होगी ताबड़तोड़ चैटिंग, लॉन्च हुआ मोस्ट-अवेउंटेड 'यूज़रनेम' फीचर!
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कैसे हुआ मेरठ में दरोगा गिरफ्तार?

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मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच पुलिस लाइन के पास यह बड़ी कार्रवाई हुई। एंटी करप्शन टीम ने पहले से ही जाल बिछा रखा था। 1991 बैच के दरोगा प्रकाश चंद्र ने पीड़ित को पैसे लेकर पुलिस लाइन के गेट नंबर 3 के पास बुलाया था।
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 एंटी करप्शन टीम दरोगा को पकड़कर सिविल लाइंस थाने ले गई।

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पीड़ित दीपक वहां पहुंचा और गाड़ी के पास खड़े दरोगा को जैसे ही 20 हजार रुपए की गड्डी थमाई, टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी दरोगा को तुरंत सिविल लाइंस थाने ले जाया गया। वहां पुलिस के आला अधिकारी उससे सघन पूछताछ कर रहे हैं।
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'2 किलो अनार' के कोडवर्ड में मांगी थी रिश्वत

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इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात दरोगा का कोडवर्ड था। आरोपी दरोगा प्रकाश चंद्र ने सीधे पैसे मांगने के बजाय शातिर तरीके से कोडवर्ड का इस्तेमाल किया। उसने शुरुआत में पीड़ित से कहा था कि वह अपने साथ 'दो किलो अनार' लेकर आए।
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जब पीड़ित ने इस बात का मतलब पूछा, तो दरोगा ने उसे खुलकर समझाया। दरोगा ने कहा कि अनार बहुत महंगा है और यह 10 हजार रुपए किलो है। इस तरह 20 हजार रुपये के लिए 2 किलो अनार लाने की डिमांड की गई थी।
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जमीन विवाद और फर्जी मुकदमे से जुड़ी है कहानी

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इस घूसकांड की जड़ें मुजफ्फरनगर के एक जमीन विवाद से जुड़ी हैं। शामली स्थित घटायन गांव की रहने वाली संगीता ने पैसों की तंगी के चलते अपनी जमीन का सौदा रिश्तेदार नमन चौधरी से किया था। नमन समय पर पूरे पैसे नहीं दे पाया, जिससे यह सौदा रद्द हो गया।
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पंचायत में मामला सुलझने और पैसे लौटाने की बात तय होने के बावजूद नमन ने साजिश रची। उसने 31 मई 2026 को संगीता, उनके पति पवन और बेटे नवनीत के खिलाफ गंगानगर थाने में धोखाधड़ी का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया।
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विवेचना में सच लिखने के मांगे थे 2 लाख

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इस फर्जी मुकदमे की जांच गंगानगर थाने के दरोगा प्रकाश चंद्र को सौंपी गई। जब संगीता के भांजे दीपक ने थाने जाकर दरोगा से मुलाकात की और बताया कि यह मुकदमा पूरी तरह झूठा है, तो दरोगा ने एक न सुनी।
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दरोगा ने सच्ची विवेचना करने और परिवार का नाम निकालने के एवज में दीपक से सीधे 2 लाख रुपए की भारी भरकम मांग कर डाली। दीपक ने इतनी बड़ी रकम देने में साफ तौर पर असमर्थता जता दी।
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बारगेनिंग के बाद 20 हजार में तय हुआ था सौदा

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जब दीपक ने पैसे देने में लाचारी दिखाई, तो दरोगा ने बारगेनिंग शुरू कर दी। दरोगा ने पहले 1 लाख रुपए मांगे और फिर रकम घटाकर 50 हजार रुपए कर दी। अंततः 23 जून को दीपक ने दरोगा से कहा कि वह केवल 20 हजार रुपए का ही इंतजाम कर सकता है।
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दरोगा 20 हजार रुपए लेने को तैयार हो गया। लेकिन, इस बीच दीपक ने इसकी गुप्त शिकायत एंटी करप्शन टीम को कर दी। 30 जून की सुबह दीपक ने दरोगा को फोन किया और ट्रैप के अनुसार उसे पकड़वा दिया। मेरठ में दरोगा गिरफ्तार होने की खबर से अब पूरे थाने में हड़कंप मचा हुआ है।
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मेरठ में दरोगा गिरफ्तार होने की यह घटना साबित करती है कि प्रशासन में अभी भी भ्रष्टाचार की जड़ें मौजूद हैं। हालांकि, पीड़ित की जागरूकता और एंटी करप्शन टीम की त्वरित कार्रवाई से एक भ्रष्ट अधिकारी सलाखों के पीछे पहुंच गया। अब विभागीय जांच के बाद आरोपी दरोगा पर और भी सख्त कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
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