मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में सोमवार को एक बड़ा और दिल दहला देने वाला हादसा होते-होते टल गया। गर्मी के मौसम में वाहनों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में मेरठ के जानी थाना (Jani Police Station) क्षेत्र में बागपत रोड (Baghpat Road) पर सवारियों से भरी एक सीएनजी बस (CNG Bus) अचानक धू-धू कर जल उठी। कुछ ही पलों में पूरी बस 'आग के गोले' में तब्दील हो गई।READ ALSO:-बिजनौर में 'रफ्तार' का जानलेवा कहर: नूरपुर रोड पर दो बाइकों की भीषण भिड़ंत, 2 युवकों की दर्दनाक मौत; खून से लाल हुई सड़क
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गनीमत यह रही कि इस भयंकर अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि (Casualty) नहीं हुई। बस के चालक और परिचालक (ड्राइवर-कंडक्टर) की सूझबूझ और फुर्ती के चलते बस में सवार सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अगर यात्रियों को बस से बाहर निकलने में कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो यह एक बेहद दर्दनाक त्रासदी में बदल सकता था। इस घटना के बाद से यात्रियों में भारी दहशत है और इलाके में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा।
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 Latest Meerut News (मेरठ न्यूज़): पढ़ें 20 अप्रैल के ताज़ा समाचार दैनिक  भास्कर पर

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कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा? इंजन से शुरू हुआ धुआं

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प्राप्त जानकारी और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना सोमवार को बागपत रोड पर कुराली धर्मशाला के पास घटित हुई। एक प्राइवेट यात्री बस (जिसका नंबर UP 17 T3005 बताया जा रहा है) मेरठ से बागपत की ओर जा रही थी। बस में उस वक्त कई यात्री सवार थे। बस जैसे ही कुराली धर्मशाला के पास पहुंची, अचानक बस के अगले हिस्से (इंजन के पास) से तेज धुआं उठने लगा।
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शुरुआत में यात्रियों को लगा कि यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी है, लेकिन गर्मी और सीएनजी के प्रभाव के कारण धुएं ने चंद सेकंडों में ही भयंकर आग का रूप ले लिया। आग की लपटें तेजी से बस के केबिन की तरफ बढ़ने लगीं। इंजन से उठती इन डरावनी लपटों को देखकर बस के अंदर सवार यात्रियों में चीख-पुकार और भारी भगदड़ मच गई। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए दरवाजे और खिड़कियों की तरफ भागने लगा।
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ड्राइवर और कंडक्टर बने तारणहार, तुरंत खाली कराई बस

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इस आपातकालीन स्थिति में बस के चालक और परिचालक ने गजब की हिम्मत और सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही उन्हें इंजन में आग लगने का अहसास हुआ, उन्होंने तुरंत बस को सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर रोका। बिना एक पल की भी देरी किए, उन्होंने बस के दोनों दरवाजे खोल दिए और यात्रियों से अपील की कि वे अपना सामान छोड़कर जल्द से जल्द बस से नीचे उतर जाएं।
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चालक और परिचालक खुद बस में खड़े रहकर लोगों को बाहर निकालते रहे। उनकी इसी तत्परता के कारण, आग के विकराल रूप धारण करने से पहले ही, बस में सवार सभी बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित बाहर आ गए। जैसे ही आखिरी यात्री बस से नीचे उतरा, आग ने पूरी बस को अपनी भयानक चपेट में ले लिया और बस धू-धू कर जलने लगी।
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दमकल विभाग की मशक्कत और ट्रैफिक जाम

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सड़क के बीचों-बीच आग का गोला बनी बस को देखकर बागपत रोड पर दोनों ओर का यातायात (Traffic) पूरी तरह से थम गया। राहगीरों और आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) को इस घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और उन्होंने सबसे पहले भीड़ को बस से दूर किया, क्योंकि सीएनजी सिलेंडर में ब्लास्ट होने का भारी खतरा बना हुआ था।
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कुछ ही देर में दमकल विभाग की गाड़ियां भी सायरन बजाते हुए घटनास्थल पर पहुंच गईं। फायर फाइटर्स ने तेजी से पानी और फोम की बौछारें शुरू कीं। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। लेकिन, जब तक आग बुझाई गई, तब तक बस का अधिकांश हिस्सा (सीटें, छत और अंदरूनी ढांचा) पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था।
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बस के जलने और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बागपत रोड पर लंबा जाम लग गया था, जिससे राहगीरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस ने क्रेन की मदद से बस के जले हुए ढांचे को सड़क से किनारे हटवाया और यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया।
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ARTO ने शुरू की जांच: क्या थी आग लगने की असली वजह?

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इस घटना के बाद परिवहन विभाग (Transport Department) भी तुरंत हरकत में आ गया है। मेरठ के एआरटीओ (प्रवर्तन) राजेश कुमार ने इस पूरी घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने राहत की सांस लेते हुए बताया कि सबसे अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है।
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एआरटीओ राजेश कुमार ने बस के दस्तावेजों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बस की फिटनेस (Fitness) पूरी तरह से सही पाई गई है। इसके अलावा, बस के पास मेरठ-बागपत मार्ग पर चलने का एक वैध परमिट (Valid Permit) भी मौजूद है।
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शॉर्ट सर्किट और सीएनजी किट पर उठे सवाल: आग लगने के कारणों को लेकर एआरटीओ ने बताया कि प्राथमिक जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आग बस की वायरिंग में हुए किसी शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) के कारण लगी होगी। हालांकि, परिवहन विभाग की तकनीकी टीम इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। सबसे अहम जांच इस बात की हो रही है कि बस में जो 'सीएनजी किट' (CNG Kit) लगा हुआ था, क्या वह कंपनी फिटेड (OEM) था, या फिर बस मालिक द्वारा पैसे बचाने के लिए बाद में किसी स्थानीय मैकेनिक से रेट्रोफिट (बाहर से) करवाया गया था? अक्सर बाहर से लगाए गए सीएनजी किट या पुरानी वायरिंग गर्मी के मौसम में इस तरह के जानलेवा हादसों का कारण बनते हैं।
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मेरठ-बागपत मार्ग पर दौड़ती हैं 75 गाड़ियां, सुरक्षा पर उठे सवाल

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इस घटना ने एक बार फिर से सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा और वाहनों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में मेरठ-बागपत मार्ग पर यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए लगभग 75 ऐसी छोटी-बड़ी गाड़ियां और बसें संचालित होती हैं। इनमें से कुछ बसें डीजल से चलती हैं, जबकि अधिकतर अब सीएनजी (CNG) पर निर्भर हैं।
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गर्मियों के मौसम में सीएनजी वाहनों में आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि अत्यधिक तापमान के कारण वायरिंग पिघलने और गैस लीकेज की संभावना रहती है। ऐसे में परिवहन विभाग को इस मार्ग पर चलने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों की सघन चेकिंग और उनके सीएनजी किट का 'सेफ्टी ऑडिट' (Safety Audit) कराने की आवश्यकता है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी बस ऑपरेटर नियमित रूप से अपनी बसों की सर्विसिंग कराएं और बसों के अंदर 'फायर एक्सटिंग्विशर' (Fire Extinguisher) चालू हालत में मौजूद रहें, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके।
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