खबरीलाल विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) महानगर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शुमार शास्त्री नगर (Shastri Nagar) का सेंट्रल मार्केट इन दिनों भारी उथल-पुथल और तनाव के दौर से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों के अनुपालन के नाम पर प्रशासन और विकास प्राधिकरण द्वारा की जा रही 'सेटबैक' (Setback) छोड़ने और भवनों को सील करने की कार्रवाई ने सैकड़ों व्यापारी परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। अपने रोजगार और आशियाने को उजड़ता देख व्यवसायी परिवारों की महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं।READ ALSO:-सोने-चांदी की चमक ने तोड़े रिकॉर्ड: इस हफ्ते दामों में भारी उछाल, सोना 1.52 लाख और चांदी 2.50 लाख के पार
\r\n\r\n\r\n\r\n
शनिवार को इन महिलाओं का धरना प्रदर्शन लगातार 9वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। तपती धूप और प्रशासन के दबाव के बावजूद इन महिलाओं का हौसला कम नहीं हुआ है। दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण ने अब तूल पकड़ लिया है। संयुक्त व्यापार संघ के बैनर तले मेरठ के व्यापारियों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बड़ा और वाजिब सवाल खड़ा कर दिया है। व्यापारियों का साफ कहना है कि अगर अवैध निर्माण के लिए वे दोषी हैं, तो वे 53 सरकारी अधिकारी क्यों खुले घूम रहे हैं, जिनकी नाक के नीचे और जिनके कार्यकाल में यह पूरा सेंट्रल मार्केट खड़ा हुआ था? खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए समझते हैं इस पूरे विवाद की जड़ और व्यापारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
9 दिन से सड़क पर महिलाएं: रोजगार और छत छिनने का डर
\r\n\r\nशास्त्री नगर के सेक्टर-2 स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) में बीते 9 दिनों से टेंट लगाकर महिलाएं धरने पर बैठी हैं। ये कोई राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि उन छोटे-मोटे व्यापारियों की पत्नियां, माताएं और बेटियां हैं, जिनकी दुकानें इस मार्केट में स्थित हैं। प्रशासन की डिमोलिशन (Demolition) और सीलिंग की कार्रवाई से इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई इन छोटी-छोटी दुकानों और मकानों में लगा दी है। अब अचानक से प्रशासन नियम-कानून का हवाला देकर उनके प्रतिष्ठानों पर ताला जड़ रहा है या उन्हें तोड़ने की धमकी दे रहा है। महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और उनके रोजगार की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना यूं ही जारी रहेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सियासी हलचल: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को नोएडा में रोका गया
\r\n\r\nइस बड़े व्यापारी आंदोलन को अब राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलने लगा है। इसी कड़ी में शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) मेरठ के सेंट्रल मार्केट में धरने पर बैठी महिलाओं और पीड़ित व्यापारियों से मुलाकात करने के लिए आ रहे थे। लेकिन, मामले की संवेदनशीलता और संभावित हंगामे को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई। अजय राय के मेरठ पहुंचने से पहले ही भारी पुलिस बल ने उन्हें नोएडा की सीमा पर ही रोक लिया और आगे नहीं बढ़ने दिया। प्रशासन के इस कदम से व्यापारियों में और अधिक रोष फैल गया है। उनका आरोप है कि प्रशासन न केवल उनकी रोजी-रोटी छीन रहा है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से उन्हें अपना दुख-दर्द साझा करने और समर्थन जुटाने से भी रोक रहा है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
एक बिल्डिंग जमींदोज, 44 पर जड़े गए ताले
\r\n\r\nमेरठ प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख का हवाला देते हुए सेंट्रल मार्केट में ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक इस मार्केट में एक पूरी कमर्शियल बिल्डिंग को जमींदोज (Demolish) किया जा चुका है। इसके अलावा, नियमों के उल्लंघन और सेटबैक न छोड़ने के आरोप में 44 अन्य व्यावसायिक और आवासीय भवनों को सील करने की बड़ी कार्रवाई की गई है। इस सीलिंग के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
व्यापारियों का कहना है कि जब सीलिंग की जा रही थी, तब पुलिस ने व्यापारियों की एक नहीं सुनी। जो व्यापारी दशकों से वहां अपना छोटा-मोटा कारोबार कर रहे थे, उन्हें अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। रातों-रात 44 प्रतिष्ठानों पर ताले लटकने से सैकड़ों कर्मचारी और मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
53 अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? व्यापारियों का सीधा सवाल
\r\n\r\nइस पूरे आंदोलन का सबसे मजबूत और तार्किक पहलू संयुक्त व्यापार संघ द्वारा उठाया गया है। शनिवार को धरने के बीच संयुक्त व्यापार संगठन के शीर्ष प्रतिनिधियों ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात की। इस मुलाकात में व्यापारियों ने अपना दुखड़ा तो सुनाया ही, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उस हिस्से की याद दिलाई, जिसे प्रशासन कथित तौर पर नजरअंदाज कर रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष व कद्दावर व्यापारी नेता अजय गुप्ता ने मीडिया और पुलिस को बताया कि सेंट्रल मार्केट प्रकरण में 17 अक्टूबर (बीते वर्ष) को आवास विकास परिषद और प्राधिकरण के उन 53 अधिकारियों के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे, जिनके कार्यकाल में इस मार्केट में यह तथाकथित अवैध निर्माण हुआ था। अजय गुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा, "लगभग 6 महीने का लंबा समय गुजर चुका है, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने अभी तक भी उन दागी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है। गिरफ़्तारी तो दूर, किसी एक अधिकारी के खिलाफ अब तक चार्जशीट (Charge sheet) तक न्यायालय में दाखिल नहीं की गई है।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
व्यापारियों का आक्रोश इसी बात को लेकर है कि हजारों परिवारों को तो सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन जिन भ्रष्ट अधिकारियों ने पैसे लेकर या आंखें मूंदकर इन निर्माणों को होने दिया, वे आज भी अपने वातानुकूलित कमरों में आराम फरमा रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
'अगर व्यापारी दोषी, तो अफसर भी बराबर के हिस्सेदार'
\r\n\r\nव्यापारी नेता अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जब यह पूरा मार्केट बस रहा था, तब आवास विकास और संबंधित विभागों के इंजीनियर और अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या उन्हें यह निर्माण दिखाई नहीं दिया? अगर व्यापारियों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर बिल्डिंग बनाई, तो अधिकारियों ने उस समय उन्हें नोटिस क्यों नहीं दिया या निर्माण क्यों नहीं रुकवाया? इसका सीधा मतलब है कि उस समय के अधिकारियों की पूरी मिलीभगत थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अजय गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर एकतरफा कार्रवाई करते हुए व्यापारियों की संपत्तियों को सील किया जा रहा है और तोड़ा जा रहा है, तो उन 53 नामजद अधिकारियों की संपत्तियों की भी तत्काल प्रभाव से कुर्की (Attachment of Property) होनी चाहिए। कानून के तराजू में व्यापारी और अधिकारी का वजन अलग-अलग नहीं हो सकता।
\r\n\r\n\r\n\r\n
छोटे मकानों में चल रहा था जीवन-यापन: पवन मित्तल
\r\n\r\nधरना स्थल पर मौजूद संयुक्त व्यापार संघ के कोषाध्यक्ष पवन मित्तल ने इस पूरे मामले के मानवीय पहलू को उजागर किया। उन्होंने बताया कि शास्त्री नगर का यह इलाका कोई हाई-प्रोफाइल मॉल वाला क्षेत्र नहीं है। यहां 25 वर्ग मीटर, 32 वर्ग मीटर और अधिकतम 60 वर्ग मीटर के बेहद छोटे-छोटे मकान और प्लॉट हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मित्तल ने कहा, "इन छोटे मकानों के आगे के हिस्से में लोगों ने अपनी जरूरत के हिसाब से छोटी-मोटी दुकानें खोल ली थीं, ताकि वे अपने परिवार का सम्मानजनक तरीके से गुजारा कर सकें। जिस वक्त यानी आज से कई दशक पहले ये मकान बने थे, उस वक्त सेटबैक छोड़ने या इस तरह के कड़े नियम न तो आम जनता को पता थे और न ही प्रशासन ने उन्हें कभी लागू करवाने की जहमत उठाई। अब अचानक से दशकों पुराने निर्माणों पर बुलडोजर चलाना या सील करना सरासर अन्याय है।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति की हो जांच: दलजीत सिंह
\r\n\r\nव्यापारी नेता दलजीत सिंह ने प्रशासन के दोहरे रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब 44 बिल्डिंग सील की गईं, तो वहां भारी पुलिस बल मौजूद था। प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत व्यापारियों को दबाने में लगा दी। लेकिन, जब बात अधिकारियों पर कार्रवाई की आती है, तो पुलिस के हाथ बंध जाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
दलजीत सिंह ने बेहद गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा, "इनमें से कई दोषी अफसर तो आज भी इसी शास्त्री नगर और मेरठ के पॉश इलाकों में आलीशान कोठियों में रह रहे हैं। जब सेंट्रल मार्केट में आम व्यापारियों के प्रतिष्ठान पल भर में सील किए जा सकते हैं, तो इन नामजद अफसरों के घरों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? उनके खिलाफ कोई एक्शन न लिया जाना प्रशासन की नीयत पर गहरे सवाल खड़े करता है। हम मांग करते हैं कि इन अधिकारियों की अकूत संपत्ति की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगे क्या? प्रशासन के लिए खड़ी हुई बड़ी चुनौती
\r\n\r\nशास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट का यह सेटबैक विवाद अब केवल एक अतिक्रमण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी और व्यापारियों के संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। 9 दिनों से लगातार चल रहे महिलाओं के धरने ने पुलिस और प्रशासन पर भारी नैतिक दबाव बना दिया है। संयुक्त व्यापार संघ ने भी साफ चेतावनी दे दी है कि यदि 53 दोषी अधिकारियों पर जल्द से जल्द कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं की गई और व्यापारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) के अन्य जिलों में भी फैल सकता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
फिलहाल, सेंट्रल मार्केट में पुलिस का पहरा है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या मेरठ प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आड़ में केवल व्यापारियों पर ही चाबुक चलाता रहेगा, या फिर अपने ही विभाग के उन दागी अधिकारियों के गिरेबान तक भी हाथ पहुंचाएगा, जिनके पापों की सजा आज सेंट्रल मार्केट के निर्दोष परिवार भुगत रहे हैं। खबरीलाल (Khabreelal) की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार ग्राउंड जीरो से नजर बनाए हुए है। हर प्रामाणिक और विस्तृत अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
Sabse pehle comment karne wale banein.