मेरठ (8 अप्रैल 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र 'सेंट्रल मार्केट' (शास्त्रीनगर) आज चीख-पुकार, आक्रोश और आंसुओं के समंदर में डूब गया। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद बुधवार सुबह से ही आवास विकास परिषद और भारी पुलिस बल ने सेंट्रल मार्केट में सीलिंग का महा-अभियान शुरू कर दिया। लगातार दूसरे दिन चल रही इस भारी-भरकम कार्रवाई ने व्यापारियों की जीवनभर की पूंजी और रोजी-रोटी को एक झटके में खत्म कर दिया है।READ ALSO:-सर्राफा बाजार में भूचाल: अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच सोना-चांदी हुआ बेकाबू, 1.52 लाख के पार पहुंचा 10 ग्राम सोना!
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अधिकारियों की टीम जब दुकानों पर सील लगाने पहुंची, तो नाराज और बेबस कारोबारी सड़क पर धरने पर बैठ गए। प्रशासन और व्यापारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसी बीच एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे माहौल को मातम और भयंकर गुस्से में बदल दिया—अपनी आंखों के सामने अपनी दुकान को सील होता देख एक व्यापारी को गंभीर हार्ट अटैक आ गया।
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आंखों के सामने उजड़ती दुकान और रुक गई दिल की धड़कन!

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कार्रवाई के दौरान ग्राउंड जीरो पर स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब 663/6 नंबर की दुकान के मालिक अशोक गिरधर अचानक सीने पर हाथ रखकर जमीन पर गिर पड़े। अशोक गिरधर की यहाँ कपड़े की दुकान थी। सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों का पालन करते हुए उन्होंने अपनी दुकान के कुछ हिस्से को पहले ही खुद तुड़वा दिया था, ताकि नियमों का पालन हो सके। लेकिन बुधवार को जब सीलिंग टीम उनके बचे हुए प्रतिष्ठान पर ताला जड़ने पहुंची, तो वे इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके।
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उन्हें मौके पर ही हार्ट अटैक आ गया और वे बेहोश हो गए। वहां मौजूद साथी कारोबारियों में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के बीच साथी व्यापारी उन्हें अपने कंधों पर टांगकर एम्बुलेंस तक ले गए। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद से व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
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"सरकार ने हमें मार दिया..." बिलख उठीं महिलाएं

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सीलिंग की यह कार्रवाई केवल ईंट-पत्थर या शटर पर नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगियों पर हो रही है। परिसर संख्या 498/3 में पूजा सामग्री की छोटी सी दुकान चलाने वाली एक महिला अपनी दुकान पर सील लगता देख फूट-फूट कर रोने लगी। उसका क्रंदन सुनकर वहां खड़े पुलिसकर्मियों की भी आंखें नम हो गईं।
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गुस्साए और रोते हुए व्यापारियों ने आवास विकास परिषद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक वरिष्ठ कारोबारी ने रूंधे गले से कहा:
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"सरकार और आवास विकास के अधिकारियों ने हमारे साथ बेईमानी की है। हमें महीनों तक गुमराह किया गया। हमने प्रशासन के कहने पर अपनी संपत्तियों को बचाने के लिए लगभग 70 करोड़ रुपए शमन शुल्क (Compound Fee) के रूप में जमा किए। इतने पैसे वसूलने के बाद भी आज हमारी दुकानों को सील किया जा रहा है। सरकार ने हमें जिंदा मार दिया है।"
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सियासी ड्रामा: ADM सिटी का पारा हाई, सपा नेता को दी जेल भेजने की धमकी

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व्यापारियों के भारी हंगामे और चीख-पुकार के बीच सेंट्रल मार्केट में राजनीति भी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ता देख समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता जीतू नागपाल अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे।
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 मेरठ में महिला फूट-फूटकर रोई; व्यापारी बोले- अफसरों की बेईमानी ने मार दिया

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स्थिति को बिगड़ता देख वहां मौजूद ADM (सिटी) ब्रजेश सिंह भड़क गए। उन्होंने माइक और पुलिस बल के बीच से सपा नेता को कड़ी फटकार लगाते हुए खदेड़ दिया। ADM ब्रजेश सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा, "अपनी यह राजनीति अपने घर जाकर करना। यहां अगर बात करनी है तो सिर्फ व्यापारियों की समस्याओं पर करो। अगर यहां माहौल बिगाड़ने या राजनीति करने की कोशिश की, तो सीधा जेल भेज दूंगा।" इसके जवाब में सपा नेता ने बचाव करते हुए कहा, "हम भी व्यापारी हैं और यहाँ केवल व्यापारी हित की ही बात करने आए हैं।" हालांकि, पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
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44 संपत्तियों पर गिरनी है गाज: अब तक 39 सील, बैंक-अस्पताल भी शामिल

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आवास विकास के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल कुमार ने इस पूरी कार्रवाई पर आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि 44 चिन्हित संपत्तियों को तुरंत सील किया जाए। बुधवार दोपहर तक प्रशासन ने 44 में से 39 संपत्तियों को सील कर दिया है।
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सुधा हॉस्पिटल से शुरू हुई इस सीलिंग कार्रवाई के दायरे में केवल दुकानें ही नहीं हैं, बल्कि 3 बड़े बैंक, 6 नामी स्कूल और 6 हॉस्पिटल भी शामिल हैं। प्रशासन ने किसी को नहीं बख्शा है और इन सभी संस्थानों पर भी ताला जड़ दिया गया है, जिससे मरीजों और छात्रों के सामने भी भारी संकट खड़ा हो गया है।
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बुधवार दोपहर को अचानक तेज बारिश शुरू होने के कारण सीलिंग की कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा। हालांकि, अफसरों ने स्पष्ट कर दिया है कि बारिश रुकते ही बची हुई 5 संपत्तियों पर भी बिना किसी रियायत के सील लगा दी जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट की वो भयंकर फटकार, जिसने बदल दिया पूरा खेल

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दरअसल, यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस सख्त रुख का नतीजा है, जो सोमवार (6 अप्रैल) को देखने को मिला। कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और आवास विकास के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद को दिल्ली तलब किया था और दोनों वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से सीधे सवाल किया था: "आपने किस अधिकार और किस आधार पर ध्वस्तीकरण (Demolition) को रोकने का आदेश दिया?" बचाव में पूर्व कमिश्नर ने तर्क दिया कि दुकान 661/6 के ध्वस्तीकरण के बाद शांति बनाए रखने के लिए कारोबारियों की बैठक बुलाई गई थी, और जो दस्तावेज जारी हुए वे केवल 'सुझाव' (Minutes of Meeting) थे, कोई आधिकारिक 'आदेश' नहीं।
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इस पर कोर्ट का गुस्सा और भड़क गया। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, "क्या आप इसे मिनट्स कहते हैं?" वहीं, आवास विकास के चेयरमैन गुरुप्रसाद ने कोर्ट को बताया कि कमिश्नर के उसी पत्र के कारण वे आगे की कार्रवाई नहीं कर सके थे। अंततः, कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर को अपनी गलती मानते हुए स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया और 24 घंटे के भीतर सीलिंग का फरमान सुना दिया।
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3 पॉइंट्स में समझिए क्या है सेंट्रल मार्केट सीलिंग का पूरा विवाद:

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    27 जनवरी का झटका: 27 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के 80 भूखंड मालिकों को बड़ा झटका देते हुए आवासीय प्लॉट (Residential Plots) पर चल रही सभी कमर्शियल गतिविधियों को अवैध करार देकर बंद करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आवास विकास से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन विभाग समय पर रिपोर्ट नहीं दे सका।
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    आवास विकास का 'धोखा' और 36 हजार का शुल्क: व्यापारियों के धरने को खत्म कराने के लिए आवास विकास ने एक समाधान का रास्ता निकाला। व्यापारियों को नोटिस देकर कहा गया कि वे 36 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क जमा करके अपने प्लॉट को आवासीय से कमर्शियल में बदल सकते हैं (लैंड यूज चेंज)। दर्जनों व्यापारियों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यह भारी-भरकम फीस जमा कर दी और सेटबैक नियम के तहत अपनी दुकानों को पीछे भी कर लिया।
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    6 अप्रैल का 'डेथ वारंट': सब कुछ शांत लग रहा था कि अचानक 6 अप्रैल (सोमवार) को सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सख्ती दिखाई। कोर्ट ने आवास विकास की उस 'समझौता नीति' को दरकिनार करते हुए 24 घंटे के भीतर उन 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दे दिया, जिनमें बैंक, स्कूल और अस्पताल भी चल रहे थे।
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आगे क्या? गुरुवार को 'मेरठ बंद' की हुंकार!

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सेंट्रल मार्केट में आज जो कुछ भी हुआ है, उसने पूरे मेरठ शहर के व्यापारिक परिदृश्य को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ आवास विकास प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के डंडे के डर से बेतहाशा सीलिंग कर रहा है, तो दूसरी तरफ व्यापारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है।
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अपने साथी को हार्ट अटैक आने और महिलाओं को सड़कों पर रोता देख व्यापारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संयुक्त व्यापार संघ ने सेंट्रल मार्केट के समर्थन में कल यानी बृहस्पतिवार (9 अप्रैल 2026) को पूर्ण 'मेरठ बंद' का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया है। शहर भर में रिक्शों और लाउडस्पीकरों के माध्यम से बंदी का सघन प्रचार किया जा रहा है। बेगम पुल व्यापार संघ सहित शहर के तमाम छोटे-बड़े बाजार कल अपने शटर नहीं उठाएंगे।
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प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कल (9 अप्रैल) के 'मेरठ बंद' के दौरान शहर की कानून व्यवस्था को बनाए रखने की होगी, क्योंकि जिस तरह से आज व्यापारियों का गुस्सा सड़कों पर उबला है, वह किसी बड़े भूचाल का स्पष्ट संकेत दे रहा है।
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(मेरठ सीलिंग प्रकरण और कल होने वाले 'मेरठ बंद' की पल-पल की लाइव कवरेज के लिए हमारे साथ बने रहें!)
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