Meerut Central Market Sealing: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में आज यानी 9 अप्रैल 2026 को अभूतपूर्व सन्नाटा पसरा हुआ है। शहर की धड़कन कहे जाने वाले मुख्य बाजार आज पूरी तरह से बंद हैं। यह बंदी किसी त्योहार या सरकारी अवकाश की वजह से नहीं, बल्कि शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में हुई एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सख्त आदेश के बाद बुधवार को जिला प्रशासन और आवास विकास परिषद ने सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सील कर दिया। इस Meerut Central Market Sealing की कार्रवाई ने स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त व्यापार संघ सहित शहर के 665 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने आज 'मेरठ बंद' (Meerut Bandh) का आह्वान किया है। आज इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई भी होनी है, जिस पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं।READ ALSO:-महाविनाशक बेमौसम बारिश: यूपी के 44 जिलों में आंधी-ओले का अलर्ट, कुदरत के कहर से सफेद हुई फसलें, सीएम योगी का एक्शन
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इस ध्वस्तीकरण और सीलिंग प्रकरण के विरोध में संयुक्त व्यापार संघ सहित 665 व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने आज 'मेरठ बंद' (Meerut Bandh) का शंखनाद किया है। सुबह से ही शहर के प्रमुख बाजारों में वीरानी छाई हुई है। दुकानों के शटर गिरे हैं और व्यापारी अपने प्रतिष्ठान बंद कर सेंट्रल मार्केट में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की गूंज अब दिल्ली दरबार और लखनऊ तक पहुंच गई है।
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 UP: Meerut closed in protest against sealing of Central Market, traders said - don't kick in the stomach

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बाजारों में पसरा सन्नाटा: आबू लेन से लेकर सेंट्रल मार्केट तक बंदी का असर

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ख़बरीलाल की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ के सबसे व्यस्त और पॉश मार्केट 'आबू लेन' पर आज सन्नाटा पसरा हुआ है। रोजाना सुबह 10 बजे से ही जहां ग्राहकों और गाड़ियों की भीड़ लग जाती थी, वहां आज सड़कें खाली पड़ी हैं। संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारी सुबह 5 बजे से ही टोलियों में निकल पड़े थे। गाड़ियों पर लाउडस्पीकर लगाकर सभी से अपनी दुकानें बंद रखने की अपील की गई, जिसका शहर में व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
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 UP: Meerut closed in protest against sealing of Central Market, traders said - don't kick in the stomach

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सेंट्रल मार्केट में बाकायदा टेंट लगाकर एक विशाल धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, व्यापारियों की भीड़ और उनका आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है। धरने पर बैठे व्यापारियों में स्थानीय जन प्रतिनिधियों (नेताओं) के प्रति भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब उनके जीवन भर की पूंजी से खड़े किए गए व्यापारिक प्रतिष्ठान सील किए जा रहे थे, तब किसी भी बड़े जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई।
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व्यापारियों के दर्द के साथ खड़ा हुआ पूरा शहर: IMA और किन्नर समाज का समर्थन

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इस संकट की घड़ी में व्यापारियों को समाज के हर वर्ग का भरपूर साथ मिल रहा है:
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    1200 डॉक्टरों ने बंद की OPD: मेरठ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने व्यापारियों के बंद का खुला समर्थन किया है। IMA के ऐलान के बाद शहर के करीब 1200 डॉक्टरों ने आज सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक अपनी ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह ठप रखने का फैसला किया है। हालांकि, मानवता के नाते अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं ताकि गंभीर मरीजों को कोई दिक्कत न हो।
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    भावुक हुआ किन्नर समाज: राजनीतिक और सामाजिक दलों के अलावा किन्नर समाज भी व्यापारियों का दर्द बांटने सेंट्रल मार्केट पहुंच गया। किन्नर शिवानी व्यापारियों की दुर्दशा देखकर भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "हम इन व्यापारियों का दर्द समझते हैं। अगर व्यापारी ही खुश नहीं रहेंगे, तो किन्नर समाज भी खुश नहीं रहेगा। हम दुआ करते हैं कि ऊपरवाला इन्हें इनका सब कुछ वापस लौटा दे।"
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    मेरठ बार एसोसिएशन का साथ: शहर के वकीलों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई में व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
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एक दिन पहले का खौफनाक मंजर: जब सील हुए बैंक, स्कूल और अस्पताल

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बुधवार का दिन सेंट्रल मार्केट के लिए "ब्लैक वेडनेसडे" साबित हुआ। सुबह ही आवास विकास परिषद की 7 टीमें भारी पुलिस बल के साथ सेंट्रल मार्केट पहुंचीं। सुधा हॉस्पिटल से सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुई और शाम 6:30 बजे तक सभी 44 दुकानों, मंडपों, स्कूलों और बैंकों पर सरकारी ताले जड़ दिए गए।
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कार्रवाई के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण था:
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    व्यापारी हुए बेहोश: सीलिंग का खौफ इस कदर था कि कई व्यापारी दहशत में आ गए। अशोक गिरधर नाम के एक कारोबारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। साथी व्यापारियों ने उन्हें टांगकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। हालांकि बाद में उनकी हालत में सुधार आ गया।
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    फूट-फूट कर रोईं महिलाएं: अपनी आंखों के सामने अपनी रोजी-रोटी को छिनता देख व्यापारी और उनके परिवार की महिलाएं सड़क पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगीं।
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    नेताओं से झड़प: हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी (SP) के नेता जीतू नागपाल वहां पहुंचे और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। इस पर एडीएम (ADM) सिटी ब्रजेश सिंह भड़क गए और सख्त लहजे में कहा, "राजनीति अपने घर जाकर करना। व्यापारियों की बात करनी है तो करो, राजनीति करोगे तो सीधा जेल भेज दूंगा।"
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व्यापारियों का गंभीर आरोप: "70 करोड़ देने के बाद भी मिला धोखा" एक बेबस कारोबारी ने रोते हुए बताया कि आवास विकास के अधिकारियों ने उन्हें पूरी तरह गुमराह किया है। व्यापारियों का दावा है कि उन्होंने आवासीय प्लॉट को कमर्शियल में बदलने के लिए विभाग को 70 करोड़ रुपए का भारी-भरकम शुल्क चुकाया था। इसके बावजूद उनके प्रतिष्ठानों को सील करके उन्हें आर्थिक मौत दे दी गई है।
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 UP: Meerut closed in protest against sealing of Central Market, traders said - don't kick in the stomach

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राजनीतिक उबाल: "दिल्ली की तरह मेरठ को भी एकजुट होना होगा"

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इस धरने ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष अवनीश काजला ने धरने को संबोधित करते हुए वर्ष 2006 में दिल्ली में हुई सीलिंग का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "जब दिल्ली में सीलिंग हुई थी, तब व्यापारियों के भारी विरोध के कारण सरकार को झुकना पड़ा था और एक नया बिल लाकर सीलिंग रोकनी पड़ी थी। मेरठ के व्यापारियों को भी उसी तरह एकजुट होना होगा, ताकि इस गूंगी-बहरी सरकार तक आवाज पहुंचे।"
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ख़बरीलाल इन-डेप्थ: आखिर क्या है पूरा मामला? (3 आसान पॉइंट में समझें)

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आखिर नौबत यहां तक कैसे पहुंची कि मेरठ का एक पूरा बाजार सील करना पड़ा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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    27 जनवरी 2026 - सुप्रीम कोर्ट का पहला झटका: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के आवासीय (Residential) प्लॉटों पर चल रही कमर्शियल गतिविधियों (दुकान, अस्पताल, बैंक) को अवैध मानते हुए उन्हें तुरंत बंद करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आवास विकास से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन विभाग तय समय में रिपोर्ट नहीं दे सका।
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    आवास विकास का 'समाधान' जो बन गया गले की फांस: बढ़ते बवाल को देखते हुए आवास विकास ने व्यापारियों को एक ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारी 36,000 रुपए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से शुल्क जमा करके अपने प्लॉट का लैंड यूज़ 'आवासीय' से 'कमर्शियल' करा सकते हैं। साथ ही दुकानों को सेटबैक नियम के तहत थोड़ा पीछे हटाना होगा। कई व्यापारियों ने यह बात मान ली, पैसे जमा कर दिए और तोड़फोड़ कर दुकानों को पीछे भी कर लिया।
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    6 अप्रैल 2026 - सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सीलिंग का आदेश: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर दोबारा सुनवाई की और भारी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मेरठ के पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद और आवास विकास के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद को तलब किया। कोर्ट ने पूछा- "किस आधार पर आपने ध्वस्तीकरण को रोकने का आदेश दिया?" जब अधिकारियों ने इसे 'सुझाव' बताया, तो कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर 44 संपत्तियों को बिना किसी छूट के सील करने का फरमान जारी कर दिया।
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आगे क्या? (आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें)

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आज (गुरुवार) सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे प्रकरण की एक बार फिर अहम सुनवाई होनी है। आवास विकास परिषद कल की गई 44 संपत्तियों की सीलिंग की 'कम्प्लायंस रिपोर्ट' (अनुपालन रिपोर्ट) शीर्ष अदालत में पेश करेगा।
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पूरे मेरठ की सांसें आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। क्या व्यापारियों को कोई कानूनी राहत मिलेगी? क्या राज्य सरकार कोई बीच का रास्ता निकालेगी? या फिर यह 'मेरठ बंद' एक लंबे और उग्र आंदोलन की शुरुआत भर है?
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