खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की धड़कन कहे जाने वाले 'सेंट्रल मार्केट' में इन दिनों सन्नाटा और खौफ पसरा हुआ है। जो बाजार कभी ग्राहकों की चहल-पहल और रौनक से गुलजार रहता था, वह आज पुलिस की छावनी में तब्दील हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद से मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। आवासीय भू-खंडों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने और सैट बैक (Set Back) करने के सुप्रीम कोर्ट के फरमान के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। गुरुवार को यह ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन अपने 7वें दिन में प्रवेश कर गया है। व्यापारी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं।READ ALSO:-लखनऊ के पॉश इलाके में खौफनाक अग्निकांड: राख में तब्दील हुए 250 आशियाने, 2 मासूमों की मौत, पीड़ितों का आरोप- 'धमकी के बाद कोठीवालों ने लगाई आग'
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आज सुबह से ही प्रशासन ने बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की बैरिकेडिंग और पीएसी (PAC) बल की तैनाती ने माहौल को और भी ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। भारी पुलिस बल को देखकर व्यापारियों में अब यह आशंका गहरी हो गई है कि प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे उनके धरने को जबरन कुचलने की कोशिश कर सकता है।
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पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग: व्यापारियों में खौफ और आक्रोश का माहौल

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गुरुवार की सुबह जब व्यापारी अपना प्रदर्शन जारी रखने के लिए सेंट्रल मार्केट पहुंचे, तो वहां का नजारा पूरी तरह से बदला हुआ था। रातों-रात पूरे इलाके में लोहे की भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पीएसी (Provincial Armed Constabulary) के जवानों को पूरी तरह से दंगा-निरोधी उपकरणों (हेलमेट, ढाल और डंडों) के साथ तैनात कर दिया गया है।
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अचानक बढ़ाई गई इस सुरक्षा व्यवस्था ने व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। धरने पर बैठे कई प्रमुख व्यापारियों ने खबरीलाल से बातचीत में अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया। उनका कहना है, "हम पिछले 7 दिनों से बिल्कुल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। हमने न तो कोई सड़क जाम की है और न ही कानून व्यवस्था को हाथ में लिया है। फिर यह पीएसी और पुलिस का जमावड़ा क्यों? यह साफ तौर पर प्रशासन की एक चाल है ताकि हमारे मन में खौफ पैदा किया जा सके और हमें डरा-धमका कर जबरन यहां से उठाया जा सके।" व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि पुलिस बल की इस बढ़ती मौजूदगी से बाजार में अकारण ही तनाव और दहशत का माहौल पैदा हो रहा है, जो किसी भी वक्त एक बड़े टकराव का रूप ले सकता है।
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क्या है पूरा मामला? क्यों छिन रही है सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी?

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मेरठ के इस पूरे बवाल की जड़ में 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया एक बेहद सख्त आदेश है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के 859 ऐसे आवासीय भू-खंडों (Residential Plots) के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है, जिनमें व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। आदेश के तहत इन व्यावसायिक गतिविधियों को तुरंत बंद करने और दुकानों/प्रतिष्ठानों को 'सैट बैक' (तय सीमा तक पीछे हटाना या तोड़ना) करने का निर्देश दिया गया है।
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सेंट्रल मार्केट मेरठ के सबसे पुराने और व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। यहां दशकों से लोग अपना व्यापार कर रहे हैं। इस आदेश का सीधा मतलब है कि सैकड़ों दुकानें टूट जाएंगी या बंद हो जाएंगी। व्यापारियों का कहना है कि उनकी पीढ़ियों ने इस बाजार को सींचा है। अब अचानक से दुकानों को तोड़ने या बंद करने के आदेश से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आखिर वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे करेंगे? इसी काले साये से बचने के लिए व्यापारी और स्थानीय निवासी एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं।
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एडीएम सिटी की समझाइश रही बेअसर, नहीं निकला कोई ठोस समाधान

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प्रशासन भी इस मामले की गंभीरता को समझ रहा है, लेकिन उनके हाथ भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधे हुए हैं। बुधवार को प्रदर्शन के दौरान माहौल को शांत करने के लिए एडीएम सिटी (ADM City) बृजेश कुमार सिंह भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने धरने पर बैठे व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से लंबी बातचीत की और उन्हें समझाने का भरसक प्रयास किया।
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एडीएम ने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनके प्रति सहानुभूति रखता है, लेकिन कानूनी बाध्यताओं के चलते उन्हें सहयोग करना चाहिए। हालांकि, यह बातचीत पूरी तरह से बेनतीजा रही। व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें खोखले आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कानूनी राहत की जरूरत है। जब तक सरकार या प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल कर उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं दिलाता, उनका यह धरना खत्म नहीं होगा। वार्ता विफल होने के ठीक बाद गुरुवार सुबह प्रशासन ने पुलिस बल की तैनाती और भी ज्यादा बढ़ा दी, जिसने आग में घी डालने का काम किया है।
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दिल्ली कूच की तैयारी और हिंदू नेता सचिन सिरोही की पदयात्रा पर पुलिस का पहरा

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इस व्यापारी आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। इसी कड़ी में, व्यापारियों की पीड़ा को देखते हुए प्रमुख हिंदू संगठन के नेता सचिन सिरोही ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सचिन सिरोही ने ऐलान किया था कि अगर व्यापारियों को न्याय नहीं मिला, तो वे मेरठ से देश की राजधानी दिल्ली तक एक विशाल पैदल यात्रा (Padyatra) निकालेंगे और इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे।
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हालांकि, मेरठ का पुलिस और प्रशासनिक अमला किसी भी तरह के बड़े राजनीतिक या सामाजिक बवाल से बचने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। सचिन सिरोही के ऐलान के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और उनकी दिल्ली पदयात्रा को शुरू होने से पहले ही सख्ती से रोक दिया गया। पुलिस का मानना है कि इस तरह की यात्रा से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और माहौल और ज्यादा खराब हो सकता है।
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आधी आबादी भी मैदान में: महिलाओं ने संभाला मोर्चा

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इस धरने की सबसे खास और भावुक कर देने वाली तस्वीर यह है कि अब इस आंदोलन में आधी आबादी यानी महिलाओं ने भी पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया है। जिन व्यापारियों की दुकानों पर तलवार लटकी है, उनके परिवारों की महिलाएं, माताएं और बहनें भी धरने पर डट गई हैं।
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जब सचिन सिरोही की पदयात्रा को रोका गया और पुलिस का दबाव बढ़ने लगा, तब प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी। महिलाओं ने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया कि उनका किसी राजनीतिक दल या किसी पदयात्रा से कोई लेना-देना नहीं है। उनका एकमात्र मकसद अपनी रोजी-रोटी और अपने बच्चों का भविष्य बचाना है। महिलाओं ने हुंकार भरते हुए कहा, "हम अपनी दुकानों और अपने प्रतिष्ठानों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं देंगे। हम इसी सेंट्रल मार्केट में धरने पर बैठी रहेंगी, चाहे प्रशासन लाठी चलाए या हमें गिरफ्तार कर ले। हमारी मांगें पूरी होने तक हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगी।"
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आगे क्या? मेरठ की अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट

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लगातार 7 दिनों से सेंट्रल मार्केट के पूरी तरह बंद रहने से मेरठ की अर्थव्यवस्था को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हो चुका है। यह मार्केट न केवल स्थानीय बल्कि आसपास के कई जिलों के ग्राहकों के लिए खरीदारी का मुख्य केंद्र है। शादियों का सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए इस बंदी ने अन्य व्यापारियों की कमर भी तोड़ दी है।
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फिलहाल, मेरठ के सेंट्रल मार्केट का नजारा किसी छावनी से कम नहीं है। एक तरफ भारी-भरकम पुलिस फोर्स और पीएसी के जवान मुस्तैद हैं, तो दूसरी तरफ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे व्यापारी और उनके परिवार। हर पल एक अजीब सी खामोशी और डर का माहौल है कि प्रशासन अगला क्या कदम उठाएगा। क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखेगी? क्या इस ऐतिहासिक बाजार का वजूद बच पाएगा? या फिर प्रशासन को मजबूरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराते हुए बल प्रयोग करना पड़ेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल खबरीलाल की इस ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ का यह व्यापारी महासंग्राम अभी आसानी से थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।
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