मेरठ (सिटी डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शहर के सबसे व्यस्त और पॉश बाजारों में शुमार 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market) इन दिनों ध्वस्तीकरण की मार झेल रहा है। पिछले 15 दिनों से मार्केट को बचाने के लिए चल रहा धरना-प्रदर्शन अब पूरी तरह से खत्म हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के कड़े रुख और सख्त आदेशों के बाद स्थानीय प्रशासन और आवास एवं विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गए हैं।READ ALSO:-26 साल की फरारी, यूट्यूबर का चोला और एक कत्ल का राज: दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आया मोस्ट वांटेड 'सलीम वास्तिक', बच्चे की बोली मां बोली-फांसी हो
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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करते हुए आवास विकास ने प्रभावित संपत्तियों पर नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई तेज कर दी है। इन नोटिसों में स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया है कि भवन स्वामियों को नियमानुसार 'सेटबैक' (भवन के चारों ओर छोड़ी जाने वाली खाली जगह) छोड़ना होगा और आवासीय परिसरों (Residential Areas) में चल रही सभी तरह की व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से बंद करना होगा।
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बुलडोजर के खौफ से लोगों ने खुद शुरू किया ध्वस्तीकरण

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आवास विकास परिषद द्वारा नोटिस मिलने के बाद सेंट्रल मार्केट के निवासियों और व्यापारियों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। सरकारी बुलडोजर की कार्रवाई और उसके बाद वसूले जाने वाले भारी-भरकम जुर्माने के डर से लोगों ने अब खुद ही अपने मकानों और दुकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है।
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गलियों और मुख्य मार्गों पर हथौड़ों और मशीनों की आवाजें गूंज रही हैं। लोग भरे मन से अपनी उन संपत्तियों के हिस्से गिरा रहे हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई से बनाया था। परिषद ने सख्त हिदायत दी है कि यदि दिए गए 15 दिनों के भीतर भवन स्वामियों ने खुद सेटबैक के नियमों का पालन करते हुए अतिक्रमण नहीं हटाया, तो 16वें दिन से आवास विकास की टीमें पुलिस बल के साथ पहुंचेंगी और खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम देंगी।
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उजड़ गया मेरठ के ऐतिहासिक सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व

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एक समय था जब मेरठ का सेंट्रल मार्केट शहर के मुख्य बाजारों की शान हुआ करता था। यहां की रौनक और व्यावसायिक गतिविधियां पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मशहूर थीं। लेकिन आज, यह पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील होता नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद इस मार्केट का वजूद लगभग खत्म हो चुका है।
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प्रशासनिक कार्रवाई के तहत इससे पहले भी एक कॉम्प्लेक्स में बनी 22 दुकानों को जमींदोज किया जा चुका है। इसके अलावा 44 अन्य संपत्तियों को सील करने की बड़ी कार्रवाई भी हो चुकी है। बीते 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए एक और सख्त आदेश के बाद बची हुई संपत्तियों पर भी हथौड़ा चलना तय हो गया है। हर किसी को अब सेटबैक के नियमों के दायरे में आना ही होगा।
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8 विशेष टीमें कर रहीं नोटिस चस्पा करने का काम

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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से और समय सीमा के भीतर पालन सुनिश्चित करने के लिए आवास विकास परिषद ने कमर कस ली है। इस वृहद कार्य को अंजाम देने के लिए विभाग ने 8 अलग-अलग टीमों का गठन किया है। मामला बड़ा होने के कारण और कार्य में तेजी लाने के लिए अन्य जिलों से भी विशेष स्टाफ को मेरठ बुलाया गया है। ये टीमें गली-गली घूमकर संपत्तियों का चिह्नीकरण कर रही हैं और कानूनी नोटिस चस्पा कर रही हैं।
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भ्रम की स्थिति साफ: क्या 60 मीटर वालों को है छूट?

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सेंट्रल मार्केट में पिछले काफी समय से सेटबैक के नियमों को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रम फैले हुए थे। कुछ लोगों द्वारा यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा था कि 60 वर्ग मीटर तक के छोटे आवासीय प्लॉटों के लिए सेटबैक छोड़ना जरूरी नहीं है।
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लेकिन, विभागीय सूत्रों और अधिकारियों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं। चाहे घर बड़ा हो या छोटा, सेटबैक के नियम सभी पर लागू होंगे। यदि किसी ने छोटे आवास में भी नियम तोड़े हैं, तो उस पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होना पूर्ण रूप से तय है।
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आसान भाषा में समझें सेटबैक का पूरा गणित (Setback Rules Explained)

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अक्सर लोग 'सेटबैक' शब्द को लेकर उलझन में रहते हैं। भवन निर्माण के नियमों के अनुसार सेटबैक वह न्यूनतम खाली दूरी है, जो किसी भी प्लॉट की सीमा और उस पर बने निर्माण (भवन) के बीच छोड़ी जानी अनिवार्य होती है।
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    फ्रंट सेटबैक (Front Setback - F): घर के मुख्य द्वार यानी सामने की सड़क और भवन की दीवार के बीच छोड़ी जाने वाली दूरी।
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    रियर सेटबैक (Rear Setback - R): घर के ठीक पीछे के हिस्से में, प्लॉट की पिछली सीमा और भवन के बीच की दूरी।
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    साइड सेटबैक (Side Setback - S1): घर के दाएं और बाएं किनारों पर, पड़ोसी के प्लॉट की सीमा और आपके भवन के बीच की दूरी।
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    स्ट्रीट सेटबैक (Street Setback - S2): कॉर्नर (कोने) के प्लॉट के मामले में, मुख्य सड़क के अतिरिक्त जो दूसरी सड़क लगती है, उस ओर छोड़ी जाने वाली जगह।
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सेंट्रल मार्केट के लिए तय किए गए सेटबैक के मानक

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प्रशासन ने आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए क्षेत्रफल के आधार पर अलग-अलग नियम तय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
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आवासीय संपत्तियों (Residential) के लिए:

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    150 वर्ग मीटर तक: फ्रंट सेटबैक 1 मीटर रहेगा। इसके अलावा रियर, साइड और स्ट्रीट सेटबैक शून्य (Zero) रहेगा।
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    151 वर्ग मीटर से 300 वर्ग मीटर तक: फ्रंट सेटबैक 3 मीटर और रियर सेटबैक 1.5 मीटर छोड़ना अनिवार्य है। (साइड और स्ट्रीट शून्य)।
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    300 वर्ग मीटर से 500 वर्ग मीटर तक: फ्रंट और रियर दोनों तरफ 3-3 मीटर का सेटबैक छोड़ना होगा। (साइड और स्ट्रीट शून्य)।
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व्यावसायिक संपत्तियों (Commercial) के लिए:

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    100 वर्ग मीटर तक: फ्रंट सेटबैक 1.5 मीटर रहेगा। (अन्य सभी शून्य)।
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    101 वर्ग मीटर से 300 वर्ग मीटर तक: फ्रंट में 3 मीटर की जगह छोड़नी होगी। (अन्य सभी शून्य)।
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    301 वर्ग मीटर से 1000 वर्ग मीटर तक: फ्रंट में 4.5 मीटर और रियर (पीछे) 3 मीटर का सेटबैक छोड़ना अनिवार्य है। (अन्य सभी शून्य)।
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अधिकारियों का स्पष्ट संदेश: 16वें दिन गिरेगी गाज

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इस पूरी कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन संपत्तियों के संबंध में बेहद स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग द्वारा धड़ल्ले से नोटिस तैयार किए जा रहे हैं और उनका वितरण कार्य भी जोरों पर है।
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उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "नोटिस मिलने के बाद संपत्ति स्वामी को स्वयं कार्रवाई करने के लिए केवल 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि वे इस अवधि में अपनी संपत्ति को नियमानुसार ठीक नहीं करते हैं, तो 16वें दिन से आवास एवं विकास परिषद अपनी मशीनरी के साथ मौके पर पहुंचेगा और अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा।"
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मेरठ के सेंट्रल मार्केट का यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो नियमों को ताक पर रखकर बिना सेटबैक छोड़े या नक्शे के विपरीत निर्माण कार्य करते हैं। कानून की नजर में आज नहीं तो कल, अवैध निर्माण पर गाज गिरना तय होता है।
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