मेरठ (खबरीलाल लोकल इन्वेस्टिगेशन डेस्क): पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) का मेरठ शहर हमेशा से ही छात्र राजनीति और बड़े आंदोलनों की जन्मस्थली रहा है। जब भी देश के युवाओं या किसानों के हकों पर आंच आती है, तो मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के छात्र सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटते।READ ALSO:-"झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए!": जंतर-मंतर से CJP के 'कॉकरोच' ने सरकार का गुरूर तोड़ा, जाते-जाते सुस्त विपक्ष को भी दे गए राजनीति का असली पाठ
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शनिवार का दिन भारतीय छात्र राजनीति के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ गया। पिछले एक महीने से अधिक समय से चले आ रहे राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन (Student Protest) और भारी जन-दबाव के आगे झुकते हुए आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा (Resignation) देना पड़ा। इस इस्तीफे की खबर ने मेरठ के युवाओं में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया है। 'खबरीलाल' की टीम ने CCSU परिसर के बाहर हो रहे इस महा-जश्न का जायजा लिया और छात्रों की नब्ज टटोली।
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CCSU गेट पर उमड़ा सैलाब: बंटी मिठाइयां और गूंजे जयकारे

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शनिवार दोपहर जैसे ही राष्ट्रीय समाचार माध्यमों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पुष्टि हुई, CCSU परिसर और उसके आस-पास के छात्रावासों (Hostels) से छात्र मुख्य द्वार की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार एक बड़े जश्न के मैदान में तब्दील हो गया।
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    मिठाइयों से मुंह मीठा: छात्रों ने कई किलो मिठाइयां मंगवाईं और एक-दूसरे को खिलाकर इस बड़ी जीत की बधाई दी।
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    नारेबाजी और उल्लास: "छात्र एकता जिंदाबाद" और "लोकतंत्र की जीत" के नारों से पूरा विश्वविद्यालय मार्ग गूंज उठा। इस जश्न का नेतृत्व कर रहे प्रमुख छात्रनेता आदेश प्रधान (Adesh Pradhan) के साथ बड़ी संख्या में युवा और विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारी एकजुट नजर आए।
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आदेश प्रधान की हुंकार: "लोकतंत्र में जनता और छात्र की आवाज सबसे बड़ी"

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इस विशाल जश्न को संबोधित करते हुए छात्रनेता आदेश प्रधान ने कहा कि यह इस्तीफा सरकार की कोई मेहरबानी नहीं है, बल्कि यह सड़कों पर लाठियां खाने वाले उन लाखों छात्रों के संघर्ष का परिणाम है।
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आदेश प्रधान ने कहा:

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"सरकार को आखिरकार छात्रों की आवाज सुननी ही पड़ी। लोकतंत्र में सत्ता का अहंकार नहीं, बल्कि जनता और युवाओं की आवाज सबसे बड़ी होती है। जब छात्र एकजुट होकर अपने अधिकारों, अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष करते हैं, तो उसका असर सत्ता के शीर्ष तक जरूर दिखाई देता है। यह साबित हो गया है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन कभी व्यर्थ नहीं जाते।"
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उन्होंने कहा कि यह जीत यह दर्शाती है कि अगर युवा ठान लें, तो वे किसी भी भ्रष्ट सिस्टम को घुटनों पर ला सकते हैं।
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लाखों छात्रों के संघर्ष और बलिदान की जीत

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CCSU में जश्न मना रहे छात्रों के चेहरों पर जहां एक तरफ खुशी थी, वहीं दूसरी तरफ उन दिनों की टीस भी थी, जब वे चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में धरने पर बैठे थे।
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छात्रों का स्पष्ट कहना था कि यह जीत किसी एक छात्र संगठन, किसी एक राजनेता या किसी एक व्यक्ति की नहीं है। यह जीत उन लाखों ग्रामीण और शहरी छात्रों की है, जिनके माता-पिता ने अपना पेट काटकर उन्हें पढ़ने के लिए मेरठ और अन्य शहरों में भेजा था, लेकिन पेपर लीक (Paper Leak) माफियाओं ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। आंदोलन के दौरान कई छात्रों ने दिन-रात धरना दिया, पुलिस की बर्बरता का सामना किया, लेकिन उन्होंने अपने भविष्य की इस लड़ाई को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
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"पिक्चर अभी बाकी है": शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद

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भले ही छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जश्न मनाया, लेकिन उनका विजन बिल्कुल स्पष्ट है। कार्यक्रम के दौरान कई युवा छात्रों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि एक मंत्री का हटना सिर्फ पहला कदम है, असली मंजिल अभी दूर है।
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    पारदर्शिता की मांग: छात्रों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार अब NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) जैसी संस्थाओं को भंग कर या उनमें कड़े सुधार कर एक पारदर्शी और 'लीक-प्रूफ' परीक्षा प्रणाली बनाएगी।
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    अन्य मांगों पर विचार: छात्रों का कहना है कि सरकार को उन सभी छात्रों की अन्य जायज मांगों (जैसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों की वापसी) पर भी पूरी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) में शनिवार को मना यह जश्न सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम का समापन नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। यह जीत इस बात की गवाही देती है कि लोकतांत्रिक तरीके से, बिना किसी हिंसा के अपनी बात रखने की ताकत आज भी भारत में जिंदा है। आदेश प्रधान जैसे युवा नेताओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि मेरठ की धरती से उठी हर आवाज दिल्ली के तख्त तक अपनी गूंज जरूर पहुंचाती है।
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अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय की नई कमान संभालने वाले मंत्री पश्चिमी यूपी और देश भर के छात्रों की इन उम्मीदों पर कैसे खरा उतरते हैं।
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