मेरठ। मेरठ छावनी (Cantt) क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य हितों के लिए आरक्षित अरबों रुपये की 'रक्षा भूमि' (Defence Land) पर किए गए कथित अवैध कब्जों, अनधिकृत निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेरठ के ही बहुचर्चित 'सेंट्रल मार्केट' प्रकरण में दिए गए कड़े फैसले और दिशा-निर्देशों के बाद अब रक्षा संपदा विभाग (DEO) पूरी तरह आक्रामक रुख में है।READ ALSO:-मेरठ में नौतपा से पहले हीटवेव का हाहाकार: CMO ने बनाए ORS कॉर्नर, सरकारी अफसरों की गाड़ियों में रहेगी इमरजेंसी किट
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इसी क्रम में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) में 'गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल' से संबंधित लंबे समय से लंबित मामला खारिज होने के बाद, रक्षा संपदा अधिकारी (मेरठ मंडल) ने एक सख्त सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसके तहत वेस्ट एंड रोड पर स्थित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर पूरा परिसर खाली करने और प्रशासनिक बेदखली की प्रक्रिया में सहयोग करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है। तय समय सीमा में परिसर खाली न करने पर विभाग बलपूर्वक जमीन को अपने नियंत्रण में ले लेगा।
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रसूखदारों के 'अड्डे' भी निशाने पर: व्हीलर्स और रेस क्लब को कारण बताओ नोटिस

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रक्षा संपदा विभाग का यह व्यापक अभियान केवल स्कूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में कैंट क्षेत्र के वे रसूखदार और रईस संस्थान भी आ गए हैं जो दशकों से सैन्य भूमि का उपयोग कर रहे हैं।
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    दस्तावेजी सबूत तलब: डीईओ कार्यालय ने मेरठ के ऐतिहासिक 'उपनिवेश व्हीलर्स क्लब' (Wheelers Club) और 'रेस क्लब' (Race Club) को भी औपचारिक वैधानिक नोटिस जारी किए हैं।
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    कब्जे का आधार स्पष्ट करने के निर्देश: इन नोटिसों के माध्यम से दोनों क्लब प्रबंधनों से कड़े शब्दों में पूछा गया है कि वे किस वैधानिक नियम, वैध लीज या कानूनी अधिकार के तहत इतनी बड़ी सैन्य भूमि पर क्लबों का संचालन और कब्जा जमाए बैठे हैं। विभाग ने इनसे संचालन के मालिकाना हक से जुड़े सभी वैध दस्तावेज अविलंब प्रस्तुत करने को कहा है।
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32 साल पुराने कानूनी दांव-पेच का पूरा इतिहास (Bungalow No. 227 Legal Timeline)

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रक्षा भूमि के इस बड़े टुकड़े (बंगला नंबर 227) को खाली कराने की कानूनी लड़ाई लगभग तीन दशकों से अदालतों के चक्कर काट रही थी। डीईओ द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस पूरे मामले का कानूनी सफरनामा इस प्रकार है:
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कालक्रम / वर्ष
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विधिक घटनाक्रम और न्यायिक आदेश
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7 अक्टूबर 1994
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बंगला संख्या 227, जीएलआर सर्वे नंबर 375 स्थित रक्षा भूमि पर व्यापक अवैध निर्माण और अनधिकृत उपयोग पाए जाने पर लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 (PPE Act) की धारा 5-बी (1) के तहत पहली बार वैधानिक नोटिस जारी हुआ।
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18 जुलाई 1995
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विभाग की इस कार्रवाई के खिलाफ स्कूल प्रबंधन ने जिला न्यायालय मेरठ में 'मिसलेनियस अपील नंबर 284/1994' दाखिल की। जिला जज की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।
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26 मई 2010
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जिला कोर्ट के आदेश को स्कूल प्रबंधन ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 'रिट याचिका संख्या 43498/2000' (गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल बनाम एस्टेट ऑफिसर एवं अन्य) के जरिए चुनौती दी। हाई कोर्ट ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार इस रिट याचिका को निरस्त करते हुए पूर्व में दिए गए सभी अंतरिम आदेश और स्टे (Stay) समाप्त कर दिए।
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23 अप्रैल 2026
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उच्च न्यायालय से कानूनी संरक्षण पूरी तरह समाप्त होने के बाद, रक्षा संपदा विभाग ने इसी वर्ष 23 अप्रैल से दोबारा भौतिक बेदखली और वैधानिक जब्ती की कार्रवाई को धरातल पर सक्रिय (Active) कर दिया है।
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"रक्षा भूमि राष्ट्रीय धरोहर, नियम विरुद्ध गतिविधियों को संरक्षण नहीं" — रक्षा संपदा विभाग

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डीईओ कार्यालय ने अपनी सार्वजनिक सूचना में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के उन सभी नजीर बन चुके फैसलों का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जो सार्वजनिक और सैन्य संपत्तियों के संरक्षण को लेकर दिए गए हैं। विभाग की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि:
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"सार्वजनिक और रक्षा विभाग की भूमि सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी हुई एक अमूल्य 'राष्ट्रीय संपत्ति' है। इस पर किया गया कोई भी अवैध कब्जा, अनधिकृत पक्का निर्माण या लीज के नियमों का उल्लंघन करके चलाई जा रही गतिविधियों को किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। प्रशासन नियमों के तहत ऐसे सभी अतिक्रमणों को बलपूर्वक हटाने के लिए पूरी तरह कानूनी रूप से बाध्य है।"
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बिना एनओसी (NOC) चल रहे कैंट के स्कूल: बोर्ड की मान्यता पर संकट

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रक्षा संपदा विभाग के इस कड़े रुख ने मेरठ छावनी क्षेत्र के भीतर संचालित होने वाले कई अन्य प्रतिष्ठित निजी स्कूलों के प्रबंधनों और वहां पढ़ने वाले हजारों बच्चों के अभिभावकों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाला प्रशासनिक तथ्य सामने आया है।
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नियमों के मुताबिक, किसी भी स्कूल को केंद्रीय या प्रांतीय शिक्षा बोर्ड (CBSE/ICSE/UP Board) से मान्यता या उसके नवीनीकरण के लिए संबंधित भूमि के मालिकाना हक का 'लैंड रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट' (भूमि पंजीकरण प्रमाणपत्र) शिक्षा विभाग को सौंपना पड़ता है। लेकिन डीईओ कार्यालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, मेरठ कैंट के अंतर्गत आने वाले इन विवादित स्कूलों को रक्षा संपदा कार्यालय की तरफ से कभी कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी ही नहीं किया गया है।
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ऐसे में बिना वैध एनओसी और लैंड सर्टिफिकेट के ये स्कूल इतने सालों से शिक्षा बोर्डों से मान्यता कैसे प्राप्त कर रहे थे और कैसे चल रहे थे, यह अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक घालमेल है। सूत्रों का मानना है कि गुरु तेग बहादुर स्कूल पर होने वाली इस कार्रवाई के बाद कैंट के कई अन्य बड़े और रसूखदार अवैध निर्माणों व स्कूलों पर भी सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई की गाज गिरना तय है।
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