मेरठ (खबरीलाल डेस्क): उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UP Roadways) की बसें आम जनता के सफर का सबसे भरोसेमंद और सुलभ साधन मानी जाती हैं। मेरठ का सोहराब गेट बस अड्डा इस पूरे नेटवर्क का एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त केंद्र है, जहां से हर रोज हजारों की संख्या में यात्री अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। लेकिन शुक्रवार को इसी व्यस्त और सार्वजनिक बस अड्डे का नजारा किसी नाइट क्लब या प्राइवेट डांस पार्टी जैसा हो गया। एक रोडवेज ड्राइवर की रिटायरमेंट पार्टी के नाम पर बस अड्डा परिसर में सरेआम एक महिला डांसर को बुलाया गया। तेज आवाज में बजते फिल्मी गानों, महिला डांसर के ठुमकों और उस पर नोट उड़ाते रोडवेज कर्मचारियों ने पूरे परिसर में ऐसा माहौल बना दिया जिससे वहां मौजूद महिला और परिवार वाले यात्री बेहद असहज हो गए। इस घटना ने परिवहन निगम की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन की भारी पोल खोल कर रख दी है।READ ALSO:-'गटर जेनरेशन' और 'गटर छाप' बयान पर फंसीं कंगना रनौत: आगरा के स्पेशल MP-MLA कोर्ट में परिवाद दायर, 5 अगस्त को होगी सुनवाई
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रिटायरमेंट पार्टी या सरेआम अश्लीलता का मंच?
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, यूपी रोडवेज के सोहराब गेट डिपो पर तैनात बस ड्राइवर पदम सिंह 31 जुलाई, 2026 को अपनी सेवाओं से रिटायर हुए थे। उनकी इसी विदाई को एक 'यादगार' स्वरूप देने के लिए शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे बस स्टैंड परिसर में ही एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम को आयोजित करने का जिम्मा कथित तौर पर यूपी रोडवेज एम्प्लाइज यूनियन की ओर से उठाया गया था।
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प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, बस स्टैंड परिसर के ठीक बीचों-बीच एक बड़ा मंच सजाया गया था। मंच पर बाकायदा यूपी रोडवेज एम्प्लाइज यूनियन का बड़ा सा बैनर टंगा हुआ था। इस मंच के ठीक सामने डिपो के कर्मचारियों और ड्राइवर के मेहमानों के लिए लगभग 150 से अधिक कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। अब तक सब कुछ एक सामान्य विदाई समारोह जैसा ही लग रहा था, लेकिन कुछ ही देर में इस कार्यक्रम ने एक फूहड़ रूप ले लिया। मंच पर एक महिला डांसर को बुलाया गया और कानफोड़ू आवाज में बजते डीजे पर फिल्मी और आइटम गानों पर डांस शुरू हो गया।
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कर्मचारियों ने उड़ाए नोट, जमकर हुई हूटिंग
\r\n\r\nजैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, वहां मौजूद कुछ रोडवेज कर्मचारियों और मेहमानों का उत्साह भी आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। महिला डांसर के अश्लील डांस मूव्स पर वहां मौजूद लोग जमकर हूटिंग करने लगे। बात सिर्फ हूटिंग तक ही सीमित नहीं रही; कई कर्मचारी और कार्यक्रम में शामिल लोग अपनी कुर्सियों से उठकर डांसर के साथ मंच के सामने ही थिरकने लगे। देखते ही देखते कुछ लोगों ने जेबों से पैसे निकालकर डांसर पर नोट उड़ाने शुरू कर दिए।
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यह सब कुछ एक बंद कमरे या किसी प्राइवेट बैंक्वेट हॉल में नहीं, बल्कि मेरठ के सबसे व्यस्त सोहराब गेट बस अड्डे के सार्वजनिक परिसर में हो रहा था। दिन के समय जब वहां हजारों यात्री अपनी बसों का इंतजार कर रहे थे, उस वक्त सरकारी कर्मचारियों की यह अनुशासनहीनता चरम पर थी।
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यात्रियों का फूटा गुस्सा, महिलाओं और परिवारों के लिए बनी असहज स्थिति
\r\n\r\nसोहराब गेट बस अड्डे पर दिन भर दिल्ली, मुरादाबाद, बिजनौर, देहरादून और प्रदेश के अन्य हिस्सों में जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, छात्राएं और बुजुर्ग शामिल होते हैं। शुक्रवार दोपहर जब यह फूहड़ डांस पार्टी चल रही थी, तब वहां मौजूद यात्री इस पूरे तमाशे को देखकर हतप्रभ थे।
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यात्रियों ने इस पूरे कृत्य पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। वहां अपने परिवार के साथ बस का इंतजार कर रहे एक यात्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, "यह एक सार्वजनिक जगह है। सरकार ने इसे लोगों की सुविधा के लिए बनाया है, न कि कर्मचारियों की निजी डांस पार्टियों के लिए। यहां महिलाएं खड़ी हैं, छोटे बच्चे हैं। ऐसे अश्लील गानों पर सरेआम डांस कराना और गंदे कमेंट्स करना कहां का न्याय है?" कई अन्य यात्रियों ने भी बताया कि भीड़ में से कुछ असामाजिक तत्व लगातार हूटिंग और गंदे कमेंट कर रहे थे, जिससे वहां खड़ी महिलाओं को नजरें झुकाने पर मजबूर होना पड़ा।
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अधिकारियों और यूनियन ने झाड़ा अपना पल्ला
\r\n\r\nजब यह मामला तूल पकड़ने लगा और यात्रियों का आक्रोश बढ़ने लगा, तो संबंधित अधिकारियों और यूनियन के पदाधिकारियों ने हमेशा की तरह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया।
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यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष की सफाई: इस पूरे विवाद पर जब यूपी रोडवेज एम्प्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष अमित चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने एक रटा-रटाया जवाब दिया। अमित चौधरी ने कहा, "यह सच है कि डिपो पर विदाई समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन यह डांस पार्टी संगठन की ओर से बिल्कुल नहीं कराई गई। ड्राइवर पदम सिंह और उनके गांव से जो लोग इस पार्टी में पहुंचे थे, उनके द्वारा यह डांस पार्टी शुरू कराई गई थी।" जब उनसे यह पूछा गया कि मंच पर तो यूनियन का बैनर लगा था, तो उनका कहना था कि, "विदाई समारोह का आयोजन तो हमने कराया था, लेकिन डांस या डांसर को बुलाए जाने से हमारा कोई मतलब नहीं है। जैसे ही हमें इस बात का पता चला, हमने तत्काल कार्यक्रम को बंद करा दिया। हम इस तरह के आयोजन की कड़ी निंदा करते हैं।"
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एआरएम (ARM) भी निकले बेखबर: इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हैरानी सोहराब गेट डिपो के एआरएम (Assistant Regional Manager) राजीव के बयान पर होती है। डिपो के सबसे बड़े अधिकारी होने के नाते उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा आयोजन हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी। एआरएम राजीव ने सफाई देते हुए कहा, "मुझे ड्राइवर की रिटायरमेंट पार्टी के आयोजन की जानकारी जरूर थी। लेकिन जिस वक्त बस अड्डे पर यह सब हंगामा और डांस हुआ, उस समय मैं एक महत्वपूर्ण विभागीय मीटिंग में व्यस्त था। जहां तक मेरी जानकारी है, यह पूरा आयोजन ड्राइवर के साथ आए उसके गांव के लोगों ने निजी तौर पर कराया था। रोडवेज डिपो या प्रशासन का इस डांस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।"
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सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल
\r\n\r\nअधिकारियों के ये बयान भले ही उन्हें तत्काल विवाद से बचाने के लिए दिए गए हों, लेकिन ये यूपी रोडवेज की पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं। खबरीलाल मीडिया के नजरिए से अगर इस पूरे प्रकरण का विश्लेषण किया जाए, तो कुछ बेहद अहम सवाल प्रशासन के सामने खड़े होते हैं:
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- \r\n सुरक्षा और अनुमति: बस अड्डा एक हाई-सिक्योरिटी और अति-व्यस्त सार्वजनिक परिसर है। वहां 150 कुर्सियां लगाना, बड़ा टेंट या मंच सजाना और बड़े-बड़े साउंड बॉक्स (डीजे) लगाना बिना किसी उच्च अधिकारी की अनुमति के कैसे संभव हो गया?\r\n \r\n
- \r\n प्रशासनिक लापरवाही: एआरएम का यह कहना कि वह मीटिंग में थे, उनके दायित्वों से उन्हें मुक्त नहीं करता। क्या डिपो में ऐसा कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी या सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था जो समय रहते इस भद्दे तमाशे को रोक सके?\r\n \r\n
- \r\n सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग: सरकारी जमीन और सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल निजी मनोरंजन और फूहड़ता फैलाने के लिए किया जाना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।\r\n \r\n
- \r\n यात्रियों की गरिमा: परिवहन निगम का पहला कर्तव्य अपने यात्रियों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना है। ऐसे में महिलाओं और परिवारों के सामने फूहड़ डांस क्या परिवहन निगम के यात्री-अनुकूल दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?\r\n \r\n
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आगे क्या?
\r\n\r\nमेरठ का यह मामला अब सिर्फ एक बस अड्डे की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी महकमों में फैल रही अनुशासनहीनता का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद रोडवेज विभाग की छवि धूमिल हुई है और आम जनता के बीच गहरा रोष है।
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अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हुए क्या सिर्फ खानापूर्ति वाली कार्रवाई करते हैं, या फिर उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त एक्शन लिया जाता है, जिनकी शह पर सरेआम एक सार्वजनिक बस अड्डे को डांस बार में तब्दील कर दिया गया। आम जनता और यात्रियों की यही मांग है कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक स्थल पर इस तरह के आयोजनों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगे और दोषियों के खिलाफ कड़ा जुर्माना और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि फिर कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.