रिपोर्टर: खबरीलाल ग्राउंड रिपोर्टिंग डेस्क
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स्थान: शास्त्रीनगर, मेरठ (उत्तर प्रदेश)
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मेरठ। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का 'बुलडोजर एक्शन' लगातार सुर्खियों में रहता है। इसी कड़ी में अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ (Meerut) का पॉश इलाका 'शास्त्रीनगर' चर्चा के केंद्र में आ गया है। यहाँ आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) की जमीन और सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए एक महा-अभियान की शुरुआत की गई है।READ ALSO:-"बेटियों को छेड़ने वाला सीधे यमराज के घर जाएगा", बुंदेलखंड से सीएम योगी की हुंकार; सपा पर कांवड़ यात्रा और कृष्ण जन्मोत्सव रोकने का बड़ा आरोप
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रविवार की सुबह जब लोग अपनी छुट्टी का आनंद ले रहे थे, तब अचानक भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों के साथ आवास विकास के अधिकारियों का काफिला और गरजते हुए बुलडोजर शास्त्रीनगर की सड़कों पर उतर आए। प्रशासन के इस सख्त रवैये को देखकर पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्या है यह 'सेटबैक' विवाद और क्यों प्रशासन को इतनी बड़ी कार्रवाई करनी पड़ रही है।
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लगातार दूसरे दिन जारी रहा बुलडोजर का प्रहार

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शनिवार को शुरू हुआ ध्वस्तीकरण का यह सिलसिला रविवार को भी बिना किसी ब्रेक के जारी रहा। सुबह से ही आवास विकास परिषद के अधिकारी, मजिस्ट्रेट और भारी संख्या में पुलिस बल शास्त्रीनगर के विभिन्न सेक्टरों में पहुंच गए।
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प्रशासन ने पहले से ही उन संपत्तियों को लाल निशान से चिन्हित (Marked) कर रखा था, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर सेटबैक (मकान के आगे खाली छोड़ी जाने वाली अनिवार्य जगह) में पक्का निर्माण कर लिया था या वहां दुकानें खोल ली थीं।
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    दुकानदारों और मकान मालिकों का विरोध: जैसे ही बुलडोजर ने अवैध दुकानों और दीवारों को गिराना शुरू किया, वहां मौजूद कुछ दुकानदारों और मकान मालिकों ने इसका कड़ा विरोध किया। कुछ जगहों पर अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस भी देखने को मिली।
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    पुलिस बल की मुस्तैदी: लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को सख्त हिदायत दी कि सरकारी काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की इस सख्ती के कारण अंततः अभियान बिना किसी बड़ी बाधा के सुचारू रूप से चलता रहा और कई अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए गए।
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क्या है सेटबैक (Setback) का नियम?

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कई लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर यह 'सेटबैक' क्या है? दरअसल, आवास विकास या किसी भी विकास प्राधिकरण से जब आप नक्शा पास कराते हैं, तो मकान के सामने, पीछे या किनारों पर कुछ फीट की जगह खाली छोड़नी होती है। इसे 'सेटबैक' कहा जाता है। यह जगह आपातकालीन स्थितियों (जैसे फायर ब्रिगेड की गाड़ी आने), हवा-रोशनी और सड़क चौड़ीकरण के लिए भविष्य के सुरक्षित रखी जाती है। लेकिन शास्त्रीनगर में सैकड़ों लोगों ने इस खुली जगह पर अवैध रूप से कमरे, गैरेज या पक्की दुकानें बना ली थीं।
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सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: 14 जुलाई की डेडलाइन

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आवास विकास परिषद की यह कार्रवाई कोई सामान्य अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं है। इसके पीछे देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) का एक सख्त आदेश है।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका/मामला लंबित है, जिसकी अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 14 जुलाई 2026 को होनी है। इस सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को अपनी 'कंप्लायंस रिपोर्ट' (अनुपालन रिपोर्ट) दाखिल करनी है। कोर्ट को यह बताना है कि चिन्हित की गई अवैध संपत्तियों का सेटबैक खाली कराया गया है या नहीं।
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चूंकि 14 जुलाई की तारीख बेहद करीब है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का जोखिम कोई भी अधिकारी नहीं उठाना चाहता, इसीलिए परिषद ने अब उन सभी लोगों के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' शुरू कर दिया है, जिन्होंने स्वेच्छा से अपना अतिक्रमण नहीं हटाया था।
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860 संपत्तियों पर लटकी है तलवार, प्रशासन के कड़े तेवर

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यह अभियान केवल दो-चार मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है। आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) अभिषेक राज ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिन का अभियान नहीं है।
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    860 संपत्तियों का बड़ा आंकड़ा: अभिषेक राज के मुताबिक, पूरे शास्त्रीनगर इलाके में कुल 860 संपत्तियों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने सेटबैक के नियमों का खुला उल्लंघन किया है।
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    अभियान रुकने वाला नहीं: उन्होंने साफ तौर पर कहा, "जब तक इन सभी 860 चिन्हित स्थानों पर पूरी तरह से सेटबैक खाली नहीं करा लिया जाता, तब तक हमारा यह ध्वस्तीकरण अभियान लगातार जारी रहेगा। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"
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    पूर्व में दिए गए थे नोटिस: अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। कार्रवाई से कई सप्ताह पहले सभी संबंधित 860 संपत्ति स्वामियों को कानूनी नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें स्वयं अपना सेटबैक खाली करने और अवैध निर्माण तोड़ने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।
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    शनिवार की कार्रवाई: इससे पहले शनिवार को अभियान के पहले दिन करीब 12 बड़े भूखंडों पर कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा दो संपत्ति स्वामियों को चेतावनी देते हुए स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए 72 घंटे (तीन दिन) का आखिरी समय दिया गया था।
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जनता का आक्रोश: सेक्टर-2 में महिलाओं का अनिश्चितकालीन धरना

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एक तरफ जहां प्रशासन बुलडोजर से ईंट-गारे की दीवारें गिरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है। अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई से बनाए गए निर्माण को अपनी आंखों के सामने टूटता देख लोगों की आंखों में आंसू और जुबान पर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी है।
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    महिलाओं ने खोला मोर्चा: बुलडोजर कार्रवाई के बीच भी शास्त्रीनगर के सेक्टर 2, 3 और 4 की सैकड़ों महिलाएं एकताबद्ध होकर लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपना सेटबैक नहीं छोड़ेंगी। महिलाओं का आरोप है कि सालों पहले जब यह निर्माण हो रहा था, तब विभाग के अधिकारी कहां सो रहे थे?
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    सुंदरकांड के पाठ से आध्यात्मिक शक्ति: अपने इस विरोध प्रदर्शन को एक नया और शांतिपूर्ण मोड़ देते हुए, सेक्टर 2 की महिलाओं ने यह ऐलान किया है कि वे लगातार एक हफ्ते तक धरना स्थल पर 'सुंदरकांड' (Sundarkand) का पाठ करेंगी। उनका मानना है कि इस विपत्ति के समय में केवल बजरंगबली ही उनकी मदद कर सकते हैं और शायद इस धार्मिक अनुष्ठान से प्रशासन को कुछ सद्बुद्धि आए।
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आगे क्या होगा?

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मेरठ का शास्त्रीनगर इस समय एक छावनी में तब्दील हो चुका है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट डंडा है, जिसके कारण प्रशासन हर हाल में 14 जुलाई से पहले 860 संपत्तियों का सेटबैक खाली कराना चाहता है। वहीं दूसरी ओर, महिलाओं का धरना और लोगों की भावनाएं हैं, जो अपनी संपत्तियों को बचाने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करने को तैयार हैं। आने वाले कुछ दिन मेरठ प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नजरिए से बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। देखना यह होगा कि क्या लोग खुद अपना निर्माण तोड़ेंगे, या फिर बाबा का बुलडोजर इसी तरह गरजता रहेगा।
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