मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले बेगमपुल चौराहे पर शुक्रवार का दिन भारी गहमागहमी और विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और अन्य कई सहयोगी हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने यहां एकत्रित होकर बढ़ती 'जिहादी' गतिविधियों और साजिशों के खिलाफ अपना भारी आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप था कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हिंदू युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है, और इस पर लगाम कसने के लिए मौजूदा कानून नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस दौरान पूरे बेगमपुल क्षेत्र में जाम की स्थिति पैदा हो गई और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।READ ALSO:-'रोजी-रोटी छीन लो, पर छत मत छीनो!' सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दुकान बंद करने को तैयार महिलाएं, लेकिन सेटबैक के नाम पर हथौड़ा चलने से इंकार
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सड़क पर उतरा आक्रोश: मानव श्रृंखला बनाकर रोका यातायात

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शुक्रवार को दोपहर होते-होते बेगमपुल चौराहे पर केसरिया झंडे और बैनर लिए युवाओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटने लगी। यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित रोष का प्रकटीकरण था। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने अपनी एकजुटता और गुस्से का प्रदर्शन करने के लिए सड़क के बीचों-बीच एक विशाल मानव श्रृंखला (Human Chain) का निर्माण किया।
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सैकड़ों की संख्या में एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े इन कार्यकर्ताओं ने बेगमपुल जैसे व्यस्ततम मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया। चक्का जाम होने के कारण कुछ ही मिनटों में चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं था, बल्कि सोए हुए प्रशासन और सरकार तक अपनी आवाज को मजबूती से पहुंचाना था। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान जोरदार नारेबाजी की और मांग की कि समाज में जो एक विशेष प्रकार का अपराध पनप रहा है, उस पर तत्काल और निर्मम तरीके से रोक लगाई जाए।
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क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

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इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व बजरंग दल के महानगर संयोजक हिमांशु शर्मा कर रहे थे। उन्होंने मीडिया और वहां मौजूद भारी भीड़ को संबोधित करते हुए इस विरोध प्रदर्शन के मूल कारण पर विस्तार से प्रकाश डाला। हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह कोई स्थानीय या छिटपुट मुद्दा नहीं है, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा है जो पूरे देश में फैल चुका है।
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उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि, "आजकल एक विशेष समुदाय के कुछ असामाजिक तत्व अपनी असली पहचान छिपाकर और हिंदू नाम रखकर हमारी भोली-भाली हिंदू बहन-बेटियों को अपने प्रेम जाल में फंसा रहे हैं। यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है; इसके बाद उन युवतियों के साथ शारीरिक शोषण किया जाता है, उनकी अश्लील वीडियो बनाई जाती है और फिर उन्हें ब्लैकमेल करके इंटरनेट पर वायरल कर दिया जाता है।"
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बजरंग दल के नेताओं का कहना था कि यह एक प्रकार का 'जिहाद' है जो समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है और परिवारों की इज्जत को तार-तार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह प्रदर्शन सीधे तौर पर ऐसे कृत्य करने वाले अपराधियों के खिलाफ है।
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'दोषियों को मिले फांसी की सजा' - उठी सख्त कानून की मांग

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इस प्रदर्शन के दौरान जो सबसे प्रमुख मांग उभर कर सामने आई, वह थी न्याय प्रणाली में कठोरता लाने की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि ऐसे मामलों में साधारण सजा से अपराधियों के हौसले पस्त नहीं होंगे। महानगर संयोजक हिमांशु शर्मा ने मंच से गरजते हुए कहा, "जिन्होंने भी हमारी बहन-बेटियों की जिंदगी बर्बाद करने का दुस्साहस किया है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारी सरकार और न्यायपालिका से यह सीधी मांग है कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।"
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विश्व हिंदू परिषद (VHP) की वरिष्ठ नेत्री प्रियंका गुप्ता ने भी इस अवसर पर अपने विचार बेहद तल्ख अंदाज में रखे। प्रियंका गुप्ता ने कहा, "जिस प्रकार से समाज में प्रतिदिन ऐसे डरावने और शर्मनाक मामले सामने आ रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है। मौजूदा कानून व्यवस्था ऐसे शातिर अपराधियों में खौफ पैदा करने में विफल रही है। अब समय आ गया है कि प्रशासन और सरकार इन मामलों पर अपनी आंखें खोलें और सख्ती बरतें।" उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर एक ऐसा अत्यंत कठोर और विशेष कानून लाने की आवश्यकता है, जिसमें जमानत का कोई प्रावधान न हो और जो ऐसे अपराधियों के लिए एक नजीर बन सके।
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पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक: माहौल में आया तनाव

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जैसे ही बेगमपुल पर जाम लगा और नारेबाजी तेज हुई, प्रशासन हरकत में आया। क्षेत्र की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लालकुर्ती थाने की पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया और उनसे यातायात सुचारू करने की अपील की।
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हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए थे और वे बिना किसी ठोस आश्वासन के वहां से हटने को तैयार नहीं थे। इसी बीच, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को पीछे हटाने के प्रयास के दौरान बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और लालकुर्ती पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई थी। कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी करने लगे। पुलिस अधिकारियों को स्थिति संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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प्रशासन को अल्टीमेटम: 'देश भर में होगा उग्र आंदोलन'

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नोकझोंक के बाद वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की नजाकत को समझा। अधिकारियों ने हिंदू संगठनों के नेताओं से बातचीत की और उनकी मांगों का ज्ञापन स्वीकार किया। अधिकारियों द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि उनकी आवाज को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और स्थानीय स्तर पर ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी, तब जाकर प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कुछ शांत हुआ।
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लेकिन, प्रदर्शन समाप्त करने से पहले हिंदू संगठनों ने प्रशासन और सरकार को एक कड़ा अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया। हिमांशु शर्मा और प्रियंका गुप्ता ने संयुक्त रूप से चेतावनी देते हुए कहा, "हम आज प्रशासन के आश्वासन पर यह प्रदर्शन स्थगित कर रहे हैं, लेकिन अगर हमारी मांगों को अनसुना किया गया और जल्द से जल्द इस प्रकार के मामलों पर सख्ती का रुख नहीं अपनाया गया, तो यह आग सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य सभी हिंदू संगठन मिलकर पूरे देश भर में इसी प्रकार से उग्र चक्का जाम और प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।"
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करीब दो घंटे तक चले इस भारी हंगामे और प्रदर्शन के बाद आखिरकार प्रशासन स्थिति को पूरी तरह से सामान्य करने में सफल रहा। कार्यकर्ताओं द्वारा अपना ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने मानव श्रृंखला खोल दी और सड़क से हट गए। पुलिस ने तुरंत यातायात व्यवस्था को संभाला और रुके हुए वाहनों को वहां से निकाला।
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मेरठ के बेगमपुल पर हुआ यह प्रदर्शन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने एक बार फिर से समाज में चल रही गहरी चिंताओं और 'लव जिहाद' जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बहस को तेज कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार हिंदू संगठनों की इन चेतावनियों और मांगों पर भविष्य में क्या और कितना कड़ा कदम उठाती है। फिलहाल, शहर में शांति है लेकिन ऐसे मामलों को लेकर हिंदू संगठनों की सतर्कता और आक्रामकता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
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