उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक रूह कंपा देने वाली और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। शिक्षा के मंदिर (कॉलेज) जाने के लिए घर से निकली एक 20 वर्षीय बेटी दरिंदों का शिकार हो गई। तीन दिन से लापता BA की इस छात्रा का निर्वस्त्र (Nude) शव गन्ने के खेत में पड़ा मिला। परिजनों का सीधा आरोप है कि गांव के ही तीन मनबढ़ शोहदों ने उसका अपहरण किया, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर लाश को खेत में फेंक दिया। इस खौफनाक वारदात ने पूरे मेरठ को झकझोर कर रख दिया है और महिला सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Read also:-बिजली उपभोक्ताओं को 440 वोल्ट का झटका: AC-पंखे बंद रखने पर भी चुकाना होगा भारी भरकम बिल! सरकार फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने की कर रही तैयारी
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आइए, इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड की शुरुआत से लेकर अब तक की पूरी कहानी और इसके पीछे छिपे उन गुनहगारों के काले सच को विस्तार से जानते हैं।
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कैसे शुरू हुआ खौफनाक घटनाक्रम? 3 दिन पहले घर से निकली थी बेटी

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यह दर्दनाक घटना मेरठ के टीपीनगर (TP Nagar) थाना क्षेत्र की है। 20 वर्षीय मृतका शहर के प्रतिष्ठित आरजी डिग्री कॉलेज (RG Degree College) में बीए सेकंड ईयर (BA 2nd Year) की छात्रा थी। इन दिनों कॉलेज में वार्षिक परीक्षाएं चल रही थीं।
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परिजनों के अनुसार, तीन दिन पहले सुबह के समय वह हमेशा की तरह अपनी बीए सेकंड ईयर की परीक्षा देने के लिए घर से कॉलेज के लिए निकली थी। परिवार को लगा कि वह परीक्षा देकर दोपहर या शाम तक वापस आ जाएगी। लेकिन जब शाम ढल गई और रात गहराने लगी, तब भी वह घर नहीं लौटी।
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बेटी के वापस न आने पर परिवार में घबराहट फैल गई। माता-पिता और भाइयों ने सबसे पहले उसकी सहेलियों और साथ पढ़ने वाली लड़कियों को फोन मिलाया, लेकिन किसी को भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अगले दिन बदहवास परिवार आरजी डिग्री कॉलेज पहुंचा, वहां भी पूछताछ की गई लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। जब हारकर परिवार ने टीपीनगर थाने का रुख किया और बेटी की गुमशुदगी की तहरीर दी।
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रोहटा के गन्ने के खेत में मिला रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर

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पुलिस और परिवार छात्रा की तलाश कर ही रहे थे कि रविवार को एक मनहूस खबर आई। टीपीनगर से करीब 15 किलोमीटर दूर रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव में यह खौफनाक राज खुला।
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रविवार की सुबह उकसिया गांव का रहने वाला किसान पप्पू अपने गन्ने के खेत में गन्ना छीलने (काटने) के लिए पहुंचा था। जब वह घने खेत के अंदर घुसा, तो वहां का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। खेत के बीचों-बीच एक युवती का शव औंधे मुंह पड़ा था। शव पूरी तरह से निर्वस्त्र (Nude) था और उस पर चोटों के निशान थे।
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पप्पू ने तुरंत गांव वालों और रोहटा थाना पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लिया गया और आस-पास के थानों में गुमशुदा लड़कियों की डिटेल खंगाली गई। शाम करीब 4 बजे, टीपीनगर से लापता छात्रा के परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया गया। कपड़ों (जो आस-पास फेंके गए थे) और चेहरे से पिता ने अपनी लाड़ली की पहचान कर ली। शिनाख्त होते ही परिवार में कोहराम मच गया।
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दूरी का रहस्य: छात्रा का शव उसके घर से 15 किलोमीटर और उसके कॉलेज से 20 किलोमीटर दूर मिला है। यह इस बात का साफ इशारा है कि छात्रा का कॉलेज के रास्ते से ही एक सोची-समझी साजिश के तहत गाड़ी से अपहरण (Kidnapping) किया गया और फिर एक सुनसान जगह ले जाकर वारदात को अंजाम दिया गया।
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कौन हैं कातिल? 2 साल पहले की वो 'समझौते' वाली भूल जो बन गई मौत का कारण

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इस हत्याकांड में सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि कातिल कोई अनजान नहीं थे, बल्कि वे पहले से ही छात्रा के लिए खतरा बने हुए थे। छात्रा के रोते-बिलखते पिता ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में उन दरिंदों का पूरा काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है।
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पिता ने बताया कि उनके ही पड़ोस के गांव कल्याणपुर का रहने वाला युवक अंकुश मुख्य आरोपी है।
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    2 साल पहले की घटना: अंकुश ने आज से करीब दो साल पहले भी उनकी बेटी का अपहरण करने का प्रयास किया था और उसके साथ बुरी तरह छेड़छाड़ की थी। उस समय मामला पुलिस तक पहुंचने वाला था, लेकिन गांव के कुछ तथाकथित 'जिम्मेदार' लोगों और पंचायत ने दबाव डालकर दोनों पक्षों में समझौता (Compromise) करा दिया था।
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    लगातार छेड़छाड़ और धमकी: समझौता होने के बाद भी अंकुश की नीयत नहीं सुधरी। वह अपने दो अन्य दोस्तों— अंकित और निशांत के साथ मिलकर हर रोज छात्रा का रास्ता रोकता था और फब्तियां कसता था। छात्रा ने यह बात अपने माता-पिता को बताई थी।
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    डर से छोड़ दिया था कॉलेज: मनबढ़ अंकुश ने हाल ही में छात्रा को बीच रास्ते से दोबारा किडनैप करने की खुली धमकी दी थी। दरिंदों के इस खौफ के कारण छात्रा ने कई महीनों तक अपना कॉलेज जाना ही छोड़ दिया था। वह घर में ही कैद रहने लगी थी।
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    चूंकि अब बीए की फाइनल परीक्षाएं चल रही थीं, इसलिए अपना साल बचाने के लिए उसने हिम्मत करके कुछ दिन पहले ही दोबारा कॉलेज जाना शुरू किया था। और इसी मौके की ताक में बैठे दरिंदों ने उसे अपना शिकार बना लिया।
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पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

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पिता की नामजद तहरीर के आधार पर मेरठ पुलिस ने तीनों आरोपियों (अंकुश, अंकित और निशांत) के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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चूंकि छात्रा का शव पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में मिला है, इसलिए गैंगरेप (सामूहिक दुष्कर्म) की पूरी आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे कड़ी सुरक्षा के बीच पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण और दुष्कर्म की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी, जिसके बाद एफआईआर (FIR) में पॉक्सो या दुष्कर्म की धाराएं भी बढ़ा दी जाएंगी। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
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सड़क पर उतरी 'भीम आर्मी', थाने का किया घेराव

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इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही इलाके में फैली, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। दलित समाज से आने वाली इस छात्रा के न्याय के लिए भीम आर्मी (Bhim Army) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारी संख्या में टीपीनगर थाने पहुंच गए।
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    थाने पर धरना: भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए थाने के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर 2 साल पहले छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की होती, तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
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    आश्वासन के बाद माने प्रदर्शनकारी: प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन्हें फांसी की सजा दिलाई जाए और उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन हो। पुलिस के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर भीम आर्मी के नेताओं को शांत कराया और 48 घंटे के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी का ठोस आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद ही धरना समाप्त किया गया।
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मेरठ की यह घटना एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि छेड़छाड़ और मनचलों के मामलों में पंचायत द्वारा कराए गए 'समझौते' अक्सर अपराधियों का मनोबल बढ़ाते हैं। अगर 2 साल पहले उस 'समझौते' की जगह 'सजा' दी गई होती, तो आज एक 20 साल की बेटी जिंदा होती। अब देखना यह है कि मेरठ पुलिस कितनी जल्दी इन हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाकर इस पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाती है।
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