मेरठ (क्राइम डेस्क): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम करते हुए भ्रष्टाचार पर लगातार कड़ा प्रहार कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो आम जनता न्याय की गुहार लगाने आखिर कहां जाए? ऐसा ही एक चौंकाने वाला और पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से सामने आया है।READ ALSO:-नजीबाबाद के ग्राम इस्सेपुर में मातम: आम के बाग में फंदे से झूलता मिला व्यक्ति का शव, आत्महत्या के कारणों की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस
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जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सर्जिकल कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम (Anti-Corruption Bureau - ACB) ने पल्लवपुरम थाने (Pallavpuram Police Station) में तैनात एक दरोगा (Sub-Inspector) को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह 'काली कमाई' का खेल कहीं बाहर नहीं, बल्कि कानून के मंदिर यानी थाने के भीतर ही चल रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद से पूरे मेरठ पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और विभागीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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कौन है आरोपी दरोगा? (Profile of the Accused)
\r\n\r\nएंटी करप्शन टीम के अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी दरोगा का नाम छत्रपाल सिंह है।
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- \r\n बैच और तैनाती: आरोपी दरोगा छत्रपाल सिंह वर्ष 2023 बैच का नया रिक्रूट (New Recruit) है। इतनी कम उम्र और सेवाकाल के शुरुआती दौर में ही भ्रष्टाचार की राह पकड़ लेने से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। वर्तमान में उसकी तैनाती मेरठ जिले के थाना पल्लवपुरम में थी।\r\n \r\n
- \r\n मूल निवासी: आरोपी दरोगा मूल रूप से ग्राम लाभेड़ा दुर्गाप्रसाद, तहसील मीरगंज, जनपद बरेली (Bareilly) का रहने वाला है।\r\n \r\n
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क्या था पूरा मामला? NDPS का खौफ दिखाकर चल रही थी वसूली
\r\n\r\nइस पूरी घटना की जड़ एक गंभीर आपराधिक मामला था। शिकायतकर्ता (पीड़ित), जो कि मेरठ के ही मेडिकल थाना (Medical Police Station) क्षेत्र का निवासी है, के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act - Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत एक पुराना मुकदमा दर्ज था। NDPS एक्ट नशीले पदार्थों की तस्करी और रोकथाम से जुड़ा एक बेहद सख्त कानून है, जिसमें आसानी से जमानत नहीं मिलती और सजा के कड़े प्रावधान हैं।
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आरोपी दरोगा छत्रपाल सिंह इसी सख्त कानून का खौफ दिखाकर पीड़ित का मानसिक और आर्थिक शोषण कर रहा था। शिकायत के अनुसार, दरोगा छत्रपाल इस पुराने केस में पीड़ित को कानूनी राहत देने, चार्जशीट में मदद करने और मुकदमे को रफा-दफा (सेटल) करने के नाम पर लगातार एक 'मोटी रकम' की डिमांड कर रहा था।
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परेशान होकर पीड़ित ने उठाया बड़ा कदम: एंटी करप्शन से की शिकायत
\r\n\r\nदरोगा की लगातार बढ़ती रुपयों की मांग और धमकियों से पीड़ित व्यक्ति बुरी तरह टूट चुका था। जब उसे लगा कि पुलिस की वर्दी में बैठा यह अधिकारी उसे न्याय देने के बजाय उसे निचोड़ने पर तुला है, तो उसने हिम्मत दिखाते हुए सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का दरवाजा खटखटाया।
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पीड़ित ने एंटी करप्शन टीम के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर दरोगा छत्रपाल सिंह की पूरी करतूत और रिश्वत की मांग के ऑडियो/कॉल रिकॉर्डिंग व अन्य साक्ष्य सौंपे। एंटी करप्शन टीम ने शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया और शुरुआती जांच में शिकायत को सही पाए जाने के बाद दरोगा को रंगे हाथों पकड़ने का एक फुलप्रूफ 'जाल' (Trap) बुना।
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ऑपरेशन 'रेड-हैंड': थाने की तीसरी मंजिल पर बिछाया गया जाल
\r\n\r\nएंटी करप्शन टीम ने एक बेहद गुप्त और योजनाबद्ध तरीके से इस 'ट्रैप ऑपरेशन' को अंजाम दिया।
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- \r\n केमिकल लगे नोटों की गड्डी: योजना के अनुसार, पीड़ित को एंटी करप्शन टीम द्वारा विशेष केमिकल लगे हुए 10,000 रुपये के नोट दिए गए और उसे दरोगा को देने के लिए थाने भेजा गया।\r\n \r\n
- \r\n थाने के अंदर हुई 'डील': शुक्रवार को दरोगा छत्रपाल सिंह पल्लवपुरम थाने की तीसरी मंजिल पर स्थित अपने निजी कमरे (विवेचना कक्ष) में बैठा था। उसे जरा भी इल्म नहीं था कि उसका शिकार आज शिकारी बनकर आया है।\r\n \r\n
- \r\n रंगे हाथों गिरफ्तारी: पीड़ित जैसे ही तीसरी मंजिल पर पहुंचा और उसने दरोगा छत्रपाल के हाथों में रिश्वत के 10,000 रुपये थमाए, पहले से सादी वर्दी में आसपास मुस्तैद एंटी करप्शन की टीम ने तुरंत धावा बोल दिया। दरोगा को संभलने का एक पल का भी मौका नहीं मिला और उसे नोटों के साथ रंगे हाथों दबोच लिया गया। जब दरोगा के हाथ धुलवाए गए, तो पानी का रंग लाल हो गया, जो कि रिश्वत लेने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक और कानूनी सुबूत होता है।\r\n \r\n
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पल्लवपुरम थाने में मची अफरातफरी, पुलिसकर्मियों के उड़े होश
\r\n\r\nजिस वक्त एंटी करप्शन टीम ने इस छापेमारी को अंजाम दिया, थाने के भीतर का माहौल देखने लायक था। आम तौर पर जहां पुलिस दूसरों पर कार्रवाई करती है, वहीं आज उनके अपने ही थाने में, उनके ही एक साथी को भ्रष्टाचार के आरोप में घसीटकर ले जाया जा रहा था। इस अचानक हुई छापेमारी से पल्लवपुरम थाने में तैनात अन्य पुलिसकर्मियों और अधिकारियों में भारी अफरातफरी मच गई। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक यह क्या हो गया।
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कंकरखेड़ा थाने में दर्ज हुई FIR: आगे की कानूनी कार्रवाई
\r\n\r\nरंगे हाथों गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी दरोगा छत्रपाल सिंह को लेकर तुरंत थाने से निकल गई ताकि कोई स्थानीय पुलिस का हस्तक्षेप न हो सके।
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इसके बाद, आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत और सख्त धाराओं के तहत मेरठ के ही कंकरखेड़ा थाना (Kankarkhera Police Station) में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। अब एंटी करप्शन टीम दरोगा को भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत (Anti-Corruption Court) में पेश करेगी, जहां से उसे न्यायिक हिरासत (जेल) भेजा जाना तय है।
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पुलिस की साख पर उठे गंभीर सवाल: आखिर कब थमेगा भ्रष्टाचार?
\r\n\r\nमेरठ जिले में हाल के दिनों में खाकी वर्दी को दागदार करने वाला यह कोई पहला मामला नहीं है। लगातार पुलिसकर्मियों पर गिरती एंटी करप्शन की गाज ने विभाग के भीतर अनुशासन, नैतिकता और ईमानदारी पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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- \r\n युवा अधिकारियों का यह हाल क्यों? सबसे चिंताजनक बात यह है कि छत्रपाल सिंह 2023 बैच का नया दरोगा है। यदि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से हाल ही में निकले युवा अधिकारी ही सिस्टम में आते ही भ्रष्टाचार के दलदल में धंस जाएंगे, तो पुलिस महकमे का भविष्य क्या होगा?\r\n \r\n
- \r\n आम जनता का विश्वास: जब रक्षक ही थानों के भीतर बैठकर सौदेबाजी करने लगें, तो आम आदमी पुलिस पर कैसे भरोसा करेगा?\r\n \r\n
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इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी लड़ी जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (SSP/ADG) ने भी इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया है और जल्द ही आरोपी दरोगा को सेवा से निलंबित (Suspend) कर उसके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और भ्रष्टाचार की कीमत उन्हें अपनी नौकरी और इज्जत गवां कर चुकानी पड़ेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.