मेरठ: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर अब देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मेरठ देश के 237 शहरों की सूची में छठे स्थान पर रहा। पिछले लगभग दो हफ्तों से मेरठ प्रदूषण का स्तर लगातार 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।Read also:-बिजनौर में 'मौत' से सामना: खेत में काम कर रहे किसान के सामने आ धमके दो गुलदार, वीडियो देख सन्न रह गया पूरा इलाका
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बृहस्पतिवार को मेरठ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 354 दर्ज किया गया, जो इसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखता है। इसी के साथ, मेरठ के अलग-अलग केंद्रों जैसे जयभीम नगर में 356, पल्लवपुरम में 368 और गंगानगर में 337 AQI दर्ज हुआ, जो हर जगह हवा की जहरीली स्थिति को दर्शाता है।
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NCR में सबसे खराब हाल: बागपत पहले स्थान पर

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यह संकट केवल मेरठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और NCR गंभीर वायु संकट झेल रहा है। इस सूची में बागपत ने 431 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर पहला स्थान हासिल किया है, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में आता है। इसके बाद गाजियाबाद 430 AQI के साथ दूसरे और नोएडा 408 AQI के साथ चौथे स्थान पर रहा।
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यह स्थिति दर्शाती है कि दिल्ली और उसके आसपास के सभी जिले, जिनमें हापुड़ (393), दिल्ली (389) और ग्रेटर नोएडा (376) शामिल हैं, प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहे हैं। मेरठ प्रदूषण का स्तर भी इसी क्षेत्रीय पैटर्न का हिस्सा है।
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शहर
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AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक)
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श्रेणी
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बागपत
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431
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गंभीर (Severe)
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गाजियाबाद
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430
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गंभीर (Severe)
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नोएडा
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408
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गंभीर (Severe)
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हापुड़
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393
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बहुत खराब (Very Poor)
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दिल्ली
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389
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बहुत खराब (Very Poor)
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मेरठ
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354
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बहुत खराब (Very Poor)
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(स्रोतः केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, CPCB डेटा) 
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गिरता तापमान और धीमी हवा बनी स्मॉग का कारण

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प्रदूषण के इस लगातार बढ़ते स्तर के पीछे मुख्य कारण मौसम और मौसमी बदलाव हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) वेधशाला के अनुसार, मेरठ का अधिकतम तापमान 27°C और न्यूनतम तापमान 11.2°C दर्ज किया गया। तापमान में लगातार गिरावट से हवा भारी हो गई है, जिससे प्रदूषित कण वातावरण में नीचे बैठ गए हैं।
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हवा की गति धीमी रहने के कारण ये प्रदूषित कण वातावरण से छंट नहीं पा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप शहर के आसमान पर स्मॉग की मोटी परत छाई हुई है। बृहस्पतिवार को सुबह से ही घना स्मॉग छाया रहा, जिससे दृश्यता कम रही और हल्की धूप भी इन जहरीले कणों को साफ करने में बेअसर रही।
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राहत की उम्मीद कम, अलर्ट पर रहें नागरिक

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कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यू.पी. शाही के अनुसार, अगले 3-4 दिनों तक मेरठ प्रदूषण के स्तर में कोई खास सुधार आने की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि हवा की गति बेहद कम बनी रहेगी और तापमान में और गिरावट आएगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक भी मेरठ का AQI 'बहुत खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में ही बना रह सकता है।
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प्रदूषण की इस खतरनाक स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को खास तौर पर सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है। 
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प्रशासन को इस आपात स्थिति से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती शामिल है। 
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मेरठ का देश के छठे सबसे प्रदूषित शहर के रूप में उभरना एक गंभीर क्षेत्रीय संकट को दर्शाता है। पिछले 15 दिनों से मेरठ प्रदूषण का स्तर लगातार 'बहुत खराब' श्रेणी में बने रहना, गिरते तापमान और धीमी हवा की वजह से बने स्मॉग का सीधा परिणाम है। चूंकि अगले कुछ दिनों तक मौसम से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं हैं, इसलिए नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
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