उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में नई पंजीकरण व्यवस्था को लेकर वकीलों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल गुरुवार को लगातार 15वें दिन भी जारी रही। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही सरकारी खजाने को भी करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है।READ ALSO:-
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छह रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप
\r\n\r\nजिले के सभी छह प्रमुख रजिस्ट्री कार्यालयों में हड़ताल के कारण कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। इनमें कलेक्ट्रेट परिसर के दो, मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के दो कार्यालय शामिल हैं। इसके अलावा सरधना और मवाना तहसील में स्थित एक-एक कार्यालय में भी ताले लटके हैं।
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आंदोलनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मुख्य रजिस्ट्री कार्यालयों पर बाकायदा ताला जड़ दिया है। वहां बैठकर वे प्रदेश सरकार की नई नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों को बिना रजिस्ट्री कराए ही बैरंग लौटना पड़ रहा है।
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ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल को मिला राजनीतिक समर्थन
\r\n\r\nअधिवक्ताओं के इस शांतिपूर्ण लेकिन कड़े आंदोलन को अब राजनीतिक दलों का भी खुला साथ मिलने लगा है। गुरुवार को धरना स्थल पर सियासी गहमागहमी देखने को मिली जब कई बड़े नेता वकीलों के बीच पहुंचे।
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सांसद राजकुमार सांगवान धरना स्थल पर पहुंचे और अपना समर्थन दिया। उनके साथ समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता जीतू नागपाल ने भी धरना स्थल पर जाकर अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की मांगों को जायज ठहराया।
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नेताओं ने आश्वासन दिया कि वकीलों की इस आवाज को पूरी मजबूती के साथ सरकार और विधानसभा तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने सरकार से हठधर्मिता छोड़कर बीच का रास्ता निकालने की अपील की है।
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नई व्यवस्था से रोजगार छिनने का गहरा डर
\r\n\r\nप्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा डर अपने रोजगार और भविष्य के संकट को लेकर है। उनका कहना है कि नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरणों और अन्य सरकारी डीड्स का पंजीकरण अब सीधे ऑनलाइन होगा।
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निर्धारित केंद्रों के माध्यम से सारा काम होने पर अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की भूमिका बिल्कुल सीमित हो जाएगी। इससे सालों से इस पेशे से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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आम जनता को भी होगी भारी परेशानी
\r\n\r\nवकीलों का तर्क है कि नई ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से आम जनता को भी कई व्यावहारिक दिक्कतें आएंगी। रजिस्ट्री प्रक्रिया में कानूनी सलाह और दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने की जो पुरानी और सुरक्षित व्यवस्था थी, वह नई प्रणाली में काफी कमजोर पड़ जाएगी। इससे भविष्य में कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं।
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सरकार पर रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण का आरोप
\r\n\r\nहड़ताल कर रहे वकीलों और लेखकों ने प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि सरकार धीरे-धीरे पूरी रजिस्ट्री व्यवस्था का पूरी तरह से निजीकरण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल का एक मुख्य कारण यह भी है कि वकीलों को लगता है कि सरकार कॉरपोरेट या कुछ चुनिंदा एजेंसियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। इससे जमीन से जुड़े आम वकील और टाइपिस्ट बेरोजगार हो जाएंगे।
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सरकार को अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
\r\n\r\nपंजीकरण कार्य पिछले 15 दिनों से पूरी तरह बंद होने के कारण सरकारी खजाने को बहुत भारी चपत लगी है। जमीनों और मकानों की खरीद-बिक्री के सभी काम बीच में ही लटके हुए हैं, जिससे स्टाम्प ड्यूटी नहीं आ रही है।
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हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का दावा है कि इस गतिरोध की वजह से सरकार को अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का सीधा नुकसान हो चुका है। हालांकि, इतने बड़े नुकसान के बावजूद सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस वार्ता की पहल नहीं की गई है।
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आदेश वापस होने तक जारी रहेगा यह आंदोलन
\r\n\r\nदस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं ने अपनी मांग को लेकर एकदम स्पष्ट रुख अपना लिया है। उनका कहना है कि ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक सरकार इस नई ई-रजिस्ट्री संबंधी आदेश को पूरी तरह वापस नहीं ले लेती।
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सभी ने एकजुट होकर यह कड़ा संकल्प लिया है कि यह अनिश्चितकालीन आंदोलन अपनी मांगों के पूरा होने तक ऐसे ही जारी रहेगा। अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।
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निष्कर्ष के तौर पर, मेरठ में चल रही ई-रजिस्ट्री के विरोध में हड़ताल ने सरकारी व्यवस्था और आम जनजीवन दोनों को ही बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। एक तरफ जहां सरकार को रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आम लोग अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अब यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.