मेरठ (Local News Desk): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर (Meerut City) में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार की देर शाम शहर के सबसे पॉश और व्यस्त माने जाने वाले बाजार 'आबूलेन' (Abu Lane) में उस वक्त भारी अफरा-तफरी और दहशत फैल गई, जब एक मशहूर जूस की दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते उसने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और काले धुएं के गुबार से पूरा इलाका भर गया। गनीमत यह रही कि इस जानलेवा हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये का कीमती सामान और ताजे फलों का स्टॉक जलकर राख हो गया।READ ALSO:-मेरठ पुलिस बनी तस्करों का 'काल': लोहिया नगर के बाद मवाना में बड़ा एक्शन; जिम के पास से हथियारों का भारी जखीरा बरामद
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आग का तांडव: 'दिल्ली जूस कॉर्नर' बना आग का गोला प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से बहराइच के रहने वाले अहमद आबूलेन बाजार में 'दिल्ली जूस कॉर्नर' (Delhi Juice Corner) के नाम से अपनी दुकान चलाते हैं। मंगलवार शाम का समय था और बाजार में ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ थी। अहमद अपनी दुकान पर ही मौजूद थे और कर्मचारी काम में व्यस्त थे।
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 Meerut Shop Fire | Abu Lane Juice Corner Blaze

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अचानक दुकान के एक कोने से आग की तेज लपटें उठने लगीं। इससे पहले कि अहमद या उनके कर्मचारी कुछ समझ पाते या आग बुझाने का प्रयास कर पाते, लपटों ने पूरी दुकान को अपनी भयानक चपेट में ले लिया। आग की विकरालता को देखते हुए दुकान में मौजूद कर्मचारियों में भारी खलबली मच गई। अपनी जान बचाने के लिए सभी लोग चीखते-चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागे। गनीमत रही कि सभी कर्मचारी ठीक समय पर दुकान से बाहर निकलने में सफल रहे, अन्यथा एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।
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लाखों का नुकसान: एक ही दिन में आया ताजे फलों का स्टॉक हुआ खाक इस अग्निकांड में दिल्ली जूस कॉर्नर के मालिक अहमद को भारी आर्थिक चपत लगी है। आग ने पूरी दुकान का ढांचा, जूस निकालने की महंगी मशीनें, फ्रिज और काउंटर को पूरी तरह से जलाकर नष्ट कर दिया।
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 आबूलेन पर लगी आग की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

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जूस कॉर्नर के ठीक बराबर में दुकान चलाने वाले स्थानीय व्यापारी अब्दुल सादिक ने हादसे का आंखों देखा हाल बयां करते हुए बताया कि अहमद की दुकान में फलों का भारी स्टॉक मौजूद था। दुकान में मौसमी, पाइनएप्पल (अनानास), अंगूर, सेब, संतरे और अनार समेत बड़ी संख्या में फलों की महंगी पेटियां रखी हुई थीं। खुद पीड़ित अहमद ने रुंधे गले से बताया कि मंगलवार को ही दिन में एक 'छोटा हाथी' (लोडिंग ऑटो) भरकर ताजे फलों की नई खेप दुकान पर आई थी। यह सारा स्टॉक और वर्षों की मेहनत चंद मिनटों में इस आग की भेंट चढ़ गई। स्थानीय लोगों की मदद से केवल थोड़ा बहुत बाहरी सामान ही बचाया जा सका है।
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पड़ोसी दुकानों पर कहर: बाल-बाल बचे गारमेंट शोरूम आग की लपटें इतनी भयंकर थीं कि उन्होंने जूस कॉर्नर के आसपास की दुकानों को भी अपनी जद में लेना शुरू कर दिया। जूस कॉर्नर के ठीक बराबर में दो और दुकानें स्थित हैं, जिनमें रेडीमेड कपड़ों (Garments) का बड़े स्तर पर काम होता है।
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    इनमें से एक दुकान थापर नगर निवासी बबीता आनंद की है, जो अपने बेटे अलख के साथ मिलकर इस शोरूम को चलाती हैं।
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    वहीं, उनके ठीक बराबर में अंकुर नाम के व्यापारी भी रेडीमेड गारमेंट का शोरूम चलाते हैं।
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जैसे ही इन दोनों परिवारों को आग लगने की खौफनाक सूचना मिली, वे बदहवास हालत में दौड़कर अपनी दुकानों पर पहुंचे। कपड़ों की दुकान होने के कारण आग के तेजी से फैलने का सबसे बड़ा खतरा था। जैसे-तैसे करके, जान जोखिम में डालकर इन व्यापारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से अपनी दुकानों को खाली करना शुरू किया और महंगे कपड़ों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। हालांकि, आग की भीषण गर्मी और लपटों के कारण पड़ोस की इन दुकानों के बाहर लगे महंगे साइनबोर्ड और एयर कंडीशनर (AC) पूरी तरह से जलकर पिघल गए।
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स्थानीय लोगों का अदम्य साहस बनाम दमकल विभाग की भारी सुस्ती इस पूरे घटनाक्रम में जहां एक ओर प्रशासन और दमकल विभाग (Fire Brigade) की भारी लापरवाही और सुस्ती खुलकर सामने आई, वहीं आबूलेन के व्यापारियों और स्थानीय लोगों का अदम्य साहस भी देखने को मिला।
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आग लगने के तुरंत बाद ही लोगों ने फायर ब्रिगेड को आपातकालीन सूचना दे दी थी। लेकिन, शहर के सबसे प्रमुख बाजार होने के बावजूद दमकल की पहली गाड़ी को मौके पर पहुंचने में करीब 40 मिनट का लंबा वक्त लग गया। आग जैसी आपातकालीन स्थिति में 40 मिनट की यह देरी किसी बड़े विनाश का कारण बन सकती थी।
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दमकल का इंतजार न करते हुए, आसपास के लोगों और व्यापारियों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। पूरे आबूलेन बाजार के दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानों में रखे फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguishers) के सिलेंडर इकट्ठा किए और आग पर बौछार शुरू कर दी। आसपास के लोग अपने घरों और दुकानों से पानी के पाइप खींच लाए और जान की परवाह किए बिना आग बुझाने में जुट गए।
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स्थानीय लोगों की इस एकजुटता और तत्परता का ही नतीजा था कि जब तक दमकल की गाड़ी 40 मिनट बाद सायरन बजाती हुई वहां पहुंची, तब तक व्यापारियों ने अपनी सूझबूझ से 90% आग पर काबू पा लिया था। इसके बाद दमकल की दो गाड़ियां मौके पर आईं और उन्होंने बची हुई आग को पूरी तरह से बुझाकर 'कूलिंग' का काम किया। करीब एक घंटे की भारी मशक्कत के बाद जब आग पूरी तरह बुझ गई, तब जाकर पूरे बाजार के लोगों ने राहत की सांस ली।
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विद्युत विभाग की घोर लापरवाही पर फूटा व्यापारियों का भारी आक्रोश इस भयानक अग्निकांड के बाद पूरे बाजार के व्यापारियों में स्थानीय प्रशासन और विशेषकर विद्युत विभाग (Electricity Department) के खिलाफ भारी आक्रोश और गुस्सा पनप रहा है। घटना की सूचना मिलते ही 'मेरठ व्यापार मंडल' के जिलाध्यक्ष जीतू सिंह नागपाल तुरंत अपने पदाधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष जीतू नागपाल ने इस पूरे हादसे के लिए सीधे तौर पर विद्युत विभाग की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाते हुए कहा, "शहर के आबूलेन समेत कई प्रमुख और घनी आबादी वाले बाजारों में बिजली के खंभों (विद्युत पोल) और तारों की हालत बेहद जर्जर और खस्ताहाल है। तारों के मकड़जाल लटके रहते हैं। इस आग का मुख्य कारण भी विद्युत पोल से निकली शार्ट सर्किट की चिंगारी है, जिसने सीधे दुकान को अपनी चपेट में ले लिया।"
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व्यापारियों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों से इन लटकते तारों और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों की कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी सुनवाई करने को तैयार नहीं है। प्रशासन केवल तब जागता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है या किसी की जान चली जाती है। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बाजारों की बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई और पीड़ित दुकानदार को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो व्यापारी वर्ग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
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फिलहाल पुलिस और फायर विभाग इस मामले की तकनीकी जांच में जुट गए हैं ताकि आग लगने के सटीक कारणों का आधिकारिक रूप से पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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