खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: भारत में क्रिकेट और विशेषकर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का खुमार इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस खेल के रोमांच के पीछे सट्टेबाजी का एक बहुत बड़ा और काला कारोबार भी समानांतर रूप से चलता है। इसी काले कारोबार पर नकेल कसते हुए उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस (Meerut Police) ने एक बड़ी और शानदार कामयाबी हासिल की है। मेरठ में पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिटी की स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स (SWAT) टीम ने स्थानीय कंकरखेड़ा पुलिस के साथ मिलकर एक बेहद गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया और एक बड़े हाई-टेक आईपीएल सट्टा (IPL Betting) रैकेट का भंडाफोड़ किया है।READ ALSO:-गाजियाबाद में खौफनाक अग्निकांड: कनावनी की 200 झुग्गियां जलकर राख, सिलेंडरों के धमाकों से दहला इलाका, 10 किमी दूर तक दिखा मौत का धुआं
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इस छापेमारी में पुलिस ने मौके से तीन शातिर बुकी (सट्टेबाजों) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ये बुकी एक पॉश कॉलोनी के फ्लैट को अपना मिनी कंट्रोल रूम बनाकर लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच खेले जा रहे महामुकाबले पर करोड़ों रुपये का दांव लगवा रहे थे। पुलिस ने इनके पास से सट्टे में प्रयुक्त होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया है।
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 पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता करते एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले और सीओ दौराला प्रकाश चंद्र अग्रवाल। - Dainik Bhaskar

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कैसे बुना गया पुलिस का जाल: मुखबिर की सटीक सूचना और स्वाट टीम का एक्शन

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आईपीएल सीजन शुरू होते ही सट्टेबाज सक्रिय हो जाते हैं और इसी के साथ मेरठ पुलिस का इंटेलिजेंस नेटवर्क भी हाई अलर्ट पर आ जाता है। बुधवार रात पुलिस को अपने एक खास मुखबिर से एक बेहद पुख्ता सूचना मिली थी। मुखबिर ने बताया कि कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक रिहायशी इलाके में कुछ संदिग्ध लोग बाहर से आकर एक फ्लैट में ठहरे हुए हैं और वहां से बड़े पैमाने पर आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टा (Cricket Betting) खिलवा रहे हैं।
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इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले (SP City Vinayak Gopal Bhosle) ने तुरंत एक मास्टर प्लान तैयार किया। चूंकि सट्टेबाज बेहद शातिर थे और उनके पास हाई-टेक उपकरण होने की आशंका थी, इसलिए इस ऑपरेशन में कंकरखेड़ा पुलिस के साथ-साथ जिले की तेज-तर्रार स्वाट (SWAT) टीम को भी सक्रिय कर दिया गया।
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ड्रीम सिटी के फ्लैट में छापा: मिनी कंट्रोल रूम देखकर पुलिस भी रह गई दंग
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गुरुवार को पुलिस लाइन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने इस पूरे ऑपरेशन का सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस की तकनीकी सर्विलांस टीम ने जल्द ही सट्टेबाजों की सटीक लोकेशन ट्रेस कर ली।
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लोकेशन कन्फर्म होते ही इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा जितेंद्र सिंह और स्वाट टीम के प्रभारी उप निरीक्षक (SI) महेश शर्मा के नेतृत्व में एक संयुक्त पुलिस टीम ने ड्रीम सिटी (Dream City) कंकरखेड़ा स्थित एक फ्लैट पर अचानक धावा बोल दिया। पुलिस के इस अचानक पड़े छापे से सट्टेबाजों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला।
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फ्लैट के अंदर का नजारा देखकर पुलिस टीम भी एक पल के लिए दंग रह गई। वहां किसी आम घर का नहीं, बल्कि सट्टेबाजी का एक पूरा हाई-टेक 'मिनी कंट्रोल रूम' स्थापित किया गया था। बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन पर मैच चल रहा था और कई मोबाइलों के जरिए लगातार ग्राहकों से दांव लगवाए जा रहे थे। पुलिस ने वहां से सट्टे के इस खेल को ऑपरेट कर रहे तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया।
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सफेदपोश सट्टेबाज: पकड़े गए तीनों आरोपियों की पूरी कुंडली

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पुलिस की गहन पूछताछ में पकड़े गए तीनों आरोपियों ने अपने नाम और पते कबूल कर लिए हैं। ये तीनों आरोपी अच्छे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं और रातों-रात अमीर बनने की चाह में इस गैर-कानूनी धंधे में उतरे थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
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    दीपक जैन: पुत्र जोगेंद्र कुमार जैन, मूल निवासी सरधना, मेरठ। वर्तमान में यह आरोपी इसी ड्रीम सिटी, कंकरखेड़ा वाले फ्लैट में रह रहा था और यहीं से इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।
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    रजनीश जैन: पुत्र स्वर्गीय अरुण कुमार जैन, निवासी रोहता रोड, जवाहर नगर, थाना कंकरखेड़ा, मेरठ। यह ग्राहकों को लाने और हिसाब-किताब रखने का काम देखता था।
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    विभोर जैन: पुत्र राकेश कुमार जैन, निवासी आदर्श नगर, थाना सरधना, मेरठ। यह सट्टे की लाइनों को मैनेज करने और कॉल अटेंड करने में माहिर बताया जा रहा है।
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बरामदगी का जखीरा: 11 मोबाइल, एलईडी और लाखों का हिसाब-किताब

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पुलिस ने फ्लैट से जो सामान बरामद किया है, वह इस बात की गवाही दे रहा है कि यह कोई छोटा-मोटा सट्टा नहीं था, बल्कि इसके तार बड़े पैमाने पर फैले हुए थे। एसपी सिटी के मुताबिक, मौके से निम्नलिखित चीजें बरामद की गई हैं:
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    11 मोबाइल फोन: इन फोन्स के जरिए ग्राहकों के संपर्क में रहा जाता था और व्हाट्सएप ब्रॉडकास्ट के जरिए रेट भेजे जाते थे।
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    02 एलईडी टीवी (LED TV): इन पर लाइव मैच की हर एक गेंद पर नजर रखी जाती थी ताकि तुरंत भाव (Rates) बदले जा सकें।
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    4370 रुपये नकद: मौके पर मौजूद कैश।
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    02 बैंक डेबिट कार्ड: इनका इस्तेमाल ऑनलाइन पेमेंट रिसीव करने और ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
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    03 कैलकुलेटर: त्वरित हिसाब लगाने के लिए।
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    हिसाब-किताब के पर्चे: पुलिस को मौके से सफेद रंग के 27 पर्चे मिले हैं जिन पर सट्टे का पूरा हिसाब-किताब दर्ज है। सबसे अहम बात यह है कि पुलिस को एक ऐसा विशेष पर्चा भी बरामद हुआ है जिस पर उस दिन चल रहे आईपीएल मैच (LSG vs RCB) पर लगाए गए 27 अलग-अलग सट्टेबाजों के लाखों रुपयों का बारीक हिसाब लिखा हुआ था।
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शातिर 'मोडस ऑपरेंडी': ब्रॉडकास्ट ग्रुप और कोड वर्ड का खेल

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एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि शुरुआती छानबीन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह पिछले काफी वर्षों से आईपीएल और अन्य क्रिकेट सीरीज में सट्टा लगाता आ रहा था। पुलिस हर बार इनकी तलाश करती थी, लेकिन ये पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में माहिर थे।
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ठिकाने बदलने की रणनीति: यह गिरोह कभी भी एक जगह पर टिक कर काम नहीं करता था। ये लोग कुछ दिनों के लिए किसी अनजान रिहायशी इलाके में फ्लैट किराए पर लेते थे और जैसे ही उन्हें पुलिस की भनक लगती थी, वे अपना पूरा सेटअप समेट कर दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते थे। इसी वजह से वे लंबे समय से बचे हुए थे।
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ब्रॉडकास्ट और कोड लैंग्वेज (Code Language): सट्टेबाजों ने पुलिस की सर्विलांस से बचने के लिए तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया। इन लोगों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर 'ब्रॉडकास्ट ग्रुप' बनाए हुए थे। इन ग्रुप्स में केवल भरोसेमंद ग्राहकों को ही जोड़ा जाता था। मैच के दौरान कौन सी टीम का क्या 'भाव' चल रहा है, इसका अपडेट ब्रॉडकास्ट के जरिए भेजा जाता था। पुलिस से बचने के लिए ये लोग सीधे पैसों की बात नहीं करते थे, बल्कि 'कोड लैंग्वेज' (जैसे 'पेटी', 'खोखा', 'डिब्बा' आदि) का इस्तेमाल कर सट्टा लगवाते थे।
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आगे की पुलिसिया कार्रवाई: बैंक खातों और मोबाइल डेटा की हो रही स्कैनिंग

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मेरठ पुलिस अब इस मामले को यहीं खत्म नहीं करने वाली है। पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम (Gambling Act) और आईटी एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत कंकरखेड़ा थाने में गंभीर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।
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इसके साथ ही पुलिस की साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने इनके 11 मोबाइल फोनों को अपने कब्जे में ले लिया है। इन मोबाइलों का सारा डेटा रिकवर किया जा रहा है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े 'पंटरों' (सट्टा लगाने वाले ग्राहकों) और इनके ऊपर बैठे बड़े 'आकाओं' (Masterminds) तक पहुंचा जा सके। पुलिस इनके बैंक खातों और यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन की भी गहनता से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सट्टेबाजी के खेल में अब तक कितने करोड़ रुपये का लेन-देन हो चुका है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में और भी कई सफेदपोश लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।
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