मेरठ (क्राइम एवं कानून व्यवस्था डेस्क): आस्था, भक्ति और त्याग का सबसे बड़ा महापर्व 'कांवड़ यात्रा' (Kanwar Yatra 2026) अपने पूरे चरम पर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ रेंज, कांवड़ियों के लिए सबसे प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट (Transit Point) माना जाता है। हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से गंगाजल लेकर लौटने वाले लाखों शिवभक्त इन्ही रास्तों से होकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश की ओर प्रस्थान करते हैं।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक सुबह! पूरी रात लापता बेटे को तलाशता रहा परिवार, घर के पास ही फंदे से झूलती मिली 28 वर्षीय नीरज की लाश, गांव में मातम
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इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आवागमन को देखते हुए यातायात को सुगम बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, मुख्यालय/डीआईजी रेंज मेरठ ने एक बेहद मजबूत और फुलप्रूफ (Foolproof) सुरक्षा खाका तैयार किया है।
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28 मुख्य मार्गों पर चलेगा सुरक्षा का पहिया, 128 बैरियर स्थापित
\r\n\r\nमेरठ रेंज (जिसमें मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जिले शामिल हैं) में कांवड़ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए पुलिस-प्रशासन ने दिन-रात एक कर दिया है। डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए बताया कि पूरे रेंज में कुल 28 मुख्य कांवड़ मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जहां से शिवभक्त भारी संख्या में गुजरेंगे। इन मार्गों पर किसी भी तरह की ट्रैफिक अव्यवस्था या बाहरी वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए 128 क्रिटिकल बैरियर (Barriers) लगाए गए हैं। इन बैरियर्स पर 24 घंटे पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवान तैनात रहेंगे।
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जल सुरक्षा: 157 नावें और 139 प्रशिक्षित गोताखोरों की पैनी नज़र
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा के दौरान गंगनहर (Ganga Canal), प्रमुख नदियों और घाटों के किनारे शिवभक्तों की भारी भीड़ होती है। यात्रा के दौरान स्नान करते समय या जल भरते समय डूबने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए 'आपदा नियंत्रण' (Disaster Management) का एक विशेष प्लान बनाया गया है।
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डीआईजी कलानिधि नैथानी के अनुसार, जल दुर्घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए पूरे रेंज के जलस्रोतों के पास 157 नावें (Boats) और 139 प्रशिक्षित गोताखोरों (Trained Divers) की तैनाती की गई है। इसके अलावा किसी भी बड़ी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की विशेष रेस्क्यू टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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सुरक्षा का अहम नियम: प्रशासन ने यह सख्त निर्देश दिया है कि सभी नावों में 'लाइफ जैकेट' (Life Jackets) का होना अनिवार्य है। सिर्फ इतना ही नहीं, नदियों और नहरों के आसपास पड़ने वाली हर 'पुलिस चौकी' पर भी पर्याप्त मात्रा में लाइफ जैकेट उपलब्ध रहेंगी, ताकि पुलिसकर्मी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू कर सकें।
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जनपदवार (District-wise) क्या हैं सुरक्षा के इंतजाम?
\r\n\r\nमेरठ रेंज के चारों जिलों में जिलाधिकारियों और कप्तानों (SSP/SP) ने अपने-अपने स्तर पर सुरक्षा का विस्तृत चक्रव्यूह तैयार किया है। आइए जानते हैं किस जिले में क्या व्यवस्था है:
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1. जनपद मेरठ (Meerut District):
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- \r\n मार्ग और दूरी: मेरठ जिले में 7 मुख्य कांवड़ मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिनकी कुल दूरी 228 किलोमीटर है।\r\n \r\n
- \r\n बैरियर व्यवस्था: शहर और देहात के रास्तों को सुरक्षित करने के लिए 26 बैरियर बनाए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n जल सुरक्षा: नहरों और घाटों पर 12 नावों के साथ 35 प्रशिक्षित गोताखोर तैनात किए गए हैं।\r\n \r\n
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2. जनपद बुलंदशहर (Bulandshahr District):
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- \r\n मार्ग और दूरी: रेंज में सबसे लंबा कांवड़ रूट बुलंदशहर का ही है। यहाँ 446 किलोमीटर लंबे 10 मुख्य कांवड़ मार्ग हैं।\r\n \r\n
- \r\n जल सुरक्षा: लंबे रास्तों और जलस्रोतों को देखते हुए यहाँ सबसे अधिक 37 नावें और 58 गोताखोरों की ड्यूटी लगाई गई है।\r\n \r\n
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3. जनपद बागपत (Baghpat District):
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- \r\n मार्ग और दूरी: बागपत जिले से होकर 164 किलोमीटर के 6 प्रमुख कांवड़ मार्ग गुजरते हैं।\r\n \r\n
- \r\n जल सुरक्षा: यहाँ सुरक्षा के लिहाज से 8 नावों के साथ 20 गोताखोरों को तैनात किया गया है।\r\n \r\n
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4. जनपद हापुड़ (Hapur District):
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- \r\n मार्ग और दूरी: हापुड़ जिले में 131 किलोमीटर लंबे 5 मुख्य कांवड़ मार्ग चिन्हित हैं।\r\n \r\n
- \r\n जल सुरक्षा: यहाँ घाटों की सुरक्षा के लिए 10 नावों के साथ 26 गोताखोरों ने मोर्चा संभाल लिया है।\r\n \r\n
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32 प्रमुख मंदिरों पर शिवरात्रि की महा-तैयारी
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा का समापन फाल्गुन/सावन की महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक (Jalabhishek) के साथ होता है। डीआईजी ने बताया कि पूरे मेरठ रेंज में 32 प्रमुख और प्राचीन शिव मंदिर हैं, जहां शिवरात्रि के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे।
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इन मंदिरों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्लान लागू किया गया है:
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- \r\n डबल बैरिकेडिंग (Double Barricading): भीड़ को नियंत्रित करने और भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए घाटों, नदियों, नहरों और मंदिरों के आसपास डबल बैरिकेडिंग की गई है।\r\n \r\n
- \r\n हाई-टेक निगरानी: चप्पे-चप्पे पर नज़र रखने के लिए वॉच टॉवर (Watch Towers) बनाए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n यात्री सुविधाएं: रास्तों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने वाले साइन बोर्ड, रात के लिए पर्याप्त प्रकाश (High-mast lights) की व्यवस्था और पार्किंग के लिए अलग से स्थान निर्धारित किए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n आपातकालीन संपर्क: किसी भी श्रद्धालु के बिछड़ने पर उन्हें अपनों से मिलाने के लिए 'खोया-पाया केंद्र' (Lost & Found Centers) और पीए सिस्टम (PA System) लगातार सक्रिय रहेंगे।\r\n \r\n
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उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की यह चाक-चौबंद व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है। शिवभक्तों से भी अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा तय किए गए मार्गों और नियमों का पालन करें, ताकि उनकी यह पवित्र यात्रा निर्विघ्न और मंगलमय रूप से पूरी हो सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.