मेरठ/सहारनपुर (क्राइम एवं एजुकेशन डेस्क): किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए वह क्षण बेहद दुखद और झकझोर देने वाला होता है, जब वहां शिक्षा ग्रहण करने आया कोई युवा छात्र अचानक मौत के आगोश में समा जाए। आईआईएमटी (IIMT) यूनिवर्सिटी में एमबीए (MBA) की होनहार छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे कैंपस को गहरे सदमे और आक्रोश में डाल दिया है। एक तरफ जहां छात्रा के दोस्त और सहपाठी उसकी याद में आंसू बहा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मौत के कारणों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।READ ALSO:-कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर 'डिजिटल स्ट्राइक': इंस्टाग्राम हैक, इंस्टा पर 2.2 करोड़, वेबसाइट डाउन; NEET विवाद में 'कॉकरोचों' से क्यों डरा सिस्टम?
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शुक्रवार की शाम यूनिवर्सिटी परिसर का नजारा बेहद भावुक और गमगीन था। हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां लेकर अनु गुप्ता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कैंडल मार्च में केवल शोक नहीं था, बल्कि एक खामोश गुस्सा और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) की सख्त मांग भी छिपी थी।
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कैंडल मार्च: "तुम्हारी मुस्कान और यादें हमेशा जीवित रहेंगी"
\r\n\r\nअनु गुप्ता की मौत की खबर जैसे ही कैंपस में फैली, छात्रों के बीच एक अजीब सी बेचैनी और उदासी छा गई। शुक्रवार की शाम को हॉस्टल और डे-स्कॉलर छात्रों ने एकजुट होकर यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर एक विशाल और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला।
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मार्च के दौरान का भावुक दृश्य:
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- \r\n नम आंखें और भारी मन: मार्च में शामिल ज्यादातर छात्रों की आंखें नम थीं। जो लड़कियां अनु के साथ पढ़ती थीं या उसके हॉस्टल में रहती थीं, उनका रो-रोकर बुरा हाल था।\r\n \r\n
- \r\n हाथों में पोस्टर और बैनर: छात्रों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे। इन पोस्टरों पर अनु की तस्वीर के साथ दिल को छू लेने वाले संदेश लिखे थे। मुख्य बैनर पर लिखा था- “अनु गुप्ता को भावपूर्ण श्रद्धांजलि”। वहीं, कई छात्रों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर लिखा था- “तुम्हारी मुस्कान और यादें हमेशा हमारे साथ जीवित रहेंगी।”\r\n \r\n
- \r\n न्याय की गुहार: इस कैंडल मार्च का उद्देश्य केवल शोक जताना नहीं था। छात्रों ने मौन जुलूस के जरिए स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी सहपाठी की मौत को यूं ही भुला नहीं देंगे। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन से मांग की है कि अनु की मौत के पीछे की असली वजहों को सामने लाया जाए और यदि कोई दोषी है, तो उसे सख्त से सख्त सजा मिले।\r\n \r\n
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कैंपस में बवाल: धरने पर बैठे छात्र और बाहरी नेताओं की एंट्री
\r\n\r\nअनु की मौत की घटना को शुरुआत में जिस तरह से हैंडल किया गया, उससे छात्रों में भारी नाराजगी पनप गई थी। छात्रों का सीधा आरोप था कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन (University Management) कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी आशंका और गुस्से के चलते कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
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- \r\n देर रात तक चला धरना: गुस्साए छात्रों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट (Main Gate) पर कब्जा जमा लिया और धरने पर बैठ गए। देर रात तक छात्रों की नारेबाजी चलती रही।\r\n \r\n
- \r\n बाहरी छात्र नेताओं का समर्थन: मामले की गंभीरता को देखते हुए कई बाहरी छात्र संगठनों और छात्र नेताओं ने भी इस धरने में हिस्सा लिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वीसी (Vice Chancellor) को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए।\r\n \r\n
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वीसी और पुलिस का दखल: कैसे शांत हुआ छात्रों का गुस्सा?
\r\n\r\nलगातार बिगड़ते हालात और छात्रों के उग्र होते रूप को देखकर आखिरकार पुलिस और यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रशासन को मोर्चे पर आना पड़ा। गुरुवार की सुबह का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:
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- \r\n अधिकारियों का आगमन: गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे आईआईएमटी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) डॉ. दीपा शर्मा और सीओ सदर देहात (CO Sadar Dehat) सुधीर सिंह भारी पुलिस बल के साथ धरना स्थल पर पहुंचे।\r\n \r\n
- \r\n छात्रों से संवाद: अधिकारियों ने उग्र छात्रों को शांत करने का प्रयास किया। वीसी डॉ. दीपा शर्मा ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस दुख की घड़ी में अनु के परिवार के साथ खड़ा है और पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेगा।\r\n \r\n
- \r\n बंद कमरे में वार्ता: इसके बाद छात्र नेताओं, पुलिस अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच करीब एक घंटे तक लंबी और गहन बातचीत हुई।\r\n \r\n
- \r\n धरना समाप्त: पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच का ठोस लिखित और मौखिक आश्वासन मिलने के बाद, सुबह करीब 11:30 बजे छात्रों ने अपना धरना समाप्त करने का फैसला किया। हालांकि, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में कोई लीपापोती हुई, तो वे दोबारा बड़ा आंदोलन करेंगे।\r\n \r\n
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पिता का छलका दर्द: दर्ज कराया मुकदमा, सहारनपुर में हुआ अंतिम संस्कार
\r\n\r\nइस पूरी घटना में सबसे बड़ा दुख अनु के परिवार पर टूटा है। जवान बेटी की मौत की खबर सुनकर अनु के माता-पिता बदहवास हालत में मेरठ पहुंचे। अपनी बेटी का शव देखकर पिता फूट-फूट कर रो पड़े।
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- \r\n यूनिवर्सिटी के खिलाफ FIR: अनु के पिता ने अपनी बेटी की मौत को लेकर गहरी साजिश या लापरवाही की आशंका जताई है। पुलिस ने पिता की लिखित तहरीर (Complaint) के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि घटना के वक्त अनु के साथ कौन था, क्या कोई मानसिक दबाव था, या क्या यह सुरक्षा में किसी बड़ी चूक का नतीजा है।\r\n \r\n
- \r\n सहारनपुर वापसी और अंतिम संस्कार: पोस्टमार्टम और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, प्रशासन ने अनु का शव उसके परिजनों को सौंप दिया। भारी मन और आंसुओं के बीच परिजन अपनी बेटी का शव लेकर अपने गृह नगर सहारनपुर (Saharanpur) लौट गए, जहां गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार (Last Rites) कर दिया गया।\r\n \r\n
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आज शाम कैंपस में आयोजित होगी विशेष शोक सभा
\r\n\r\nकैंडल मार्च के बाद, छात्रों और यूनिवर्सिटी स्टाफ ने तय किया है कि अनु की आत्मा की शांति के लिए आज (शनिवार) शाम को कैंपस के अंदर एक विशेष शोक सभा (Condolence Meeting) का आयोजन किया जाएगा। इस शोक सभा में:
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- \r\n अनु के सहपाठी अपने संस्मरण साझा करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n सभी शिक्षक और प्रबंधन के लोग भी इस सभा में शामिल होकर अपनी संवेदनाएं प्रकट करेंगे।\r\n \r\n
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शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर उठते सवाल
\r\n\r\nआईआईएमटी (IIMT) यूनिवर्सिटी की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अक्सर छात्रों की संदिग्ध मौत, आत्महत्या या हादसों की खबरें सामने आती रहती हैं। अनु गुप्ता की इस दुखद घटना ने एक बार फिर कुछ गंभीर ज्वलंत मुद्दों को बहस के केंद्र में ला दिया है:
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- \r\n संस्थानों की जवाबदेही: क्या यूनिवर्सिटी प्रबंधन केवल फीस लेने तक सीमित है, या छात्रों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है? जब कोई छात्र हॉस्टल या कैंपस में होता है, तो उसकी पूर्ण सुरक्षा की गारंटी प्रबंधन की ही होती है।\r\n \r\n
- \r\n मानसिक दबाव और तनाव: अक्सर देखा जाता है कि पढ़ाई के दबाव, करियर की चिंता या आपसी विवादों के चलते छात्र भारी डिप्रेशन (Depression) का शिकार हो जाते हैं। विश्वविद्यालयों में अनिवार्य रूप से 24x7 मनोवैज्ञानिक काउंसलर (Psychological Counselors) की व्यवस्था होनी चाहिए, जो छात्रों की मानसिक स्थिति को समझकर उन्हें सही समय पर मदद दे सकें।\r\n \r\n
- \r\n पारदर्शी जांच तंत्र: ऐसी किसी भी घटना के बाद सबसे पहले कैंपस की ओर से लीपापोती की कोशिशें की जाती हैं, जिससे छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ जाता है। शिक्षण संस्थानों को पुलिस जांच में सहयोग करते हुए पूर्ण पारदर्शिता अपनानी चाहिए।\r\n \r\n
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एमबीए छात्रा अनु गुप्ता की असामयिक और संदिग्ध मौत ने आईआईएमटी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ पूरे छात्र समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। छात्रों द्वारा निकाला गया कैंडल मार्च और उनके आंसू इस बात के गवाह हैं कि अनु अपने पीछे कितने गहरे रिश्ते छोड़ गई है। अब गेंद पुलिस और प्रशासन के पाले में है। अनु के पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की गहन, पारदर्शी और तेज जांच होनी चाहिए, ताकि सच जल्द से जल्द सामने आ सके। एक बेटी को खोने वाले पिता और न्याय की मांग कर रहे हजारों छात्रों को अब केवल सच और इंसाफ का इंतजार है। अनु की वह मुस्कान, जिसका जिक्र पोस्टरों में किया गया, अब सिर्फ यादों में ही जिंदा रहेगी।
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