मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला स्थित गंगानगर थाना क्षेत्र की 'आईआईएमटी (IIMT) यूनिवर्सिटी' इस समय एक बेहद संवेदनशील और गंभीर विवाद के केंद्र में है। यूनिवर्सिटी की एमबीए (MBA) प्रथम वर्ष की छात्रा अनु गुप्ता की दुखद मौत के बाद परिसर में हालात बेकाबू हो गए हैं। मृतका के पिता ओमकार गोयल की तहरीर पर देर रात गंगानगर थाने में आईएमटी यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (सुसाइड के लिए उकसाना) के तहत नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।READ ALSO:-मेरठ में उमड़ा उत्साह: खत्री युवा शक्ति संघ ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सोमेंद्र तोमर का किया भव्य अभिनंदन, कार्यालय पर दी बधाई
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इस घटना के बाद से ही यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर न्याय की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं का उग्र प्रदर्शन जारी है। पिछले 22 घंटों से सैकड़ों छात्र बिना हटे लगातार धरने पर बैठे हैं। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मौके पर तैनात है, लेकिन विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों के न आने से छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
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 परिजनों की तहरीर पर यूनिवर्सिटी पर मुकदमा

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पिता का आरोप: आर्थिक तंगी और बीमारी के बावजूद फीस व अटेंडेंस के नाम पर किया प्रताड़ित

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मृतक छात्रा अनु के पिता ओमकार गोयल, जो सहारनपुर के रहने वाले हैं और कूरियर बांटने का काम करते हैं, ने अपनी तहरीर में यूनिवर्सिटी प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। छात्रनेताओं और परिजनों के अनुसार, अनु की मां की मृत्यु हो चुकी थी और वह स्वयं भी पिछले कुछ समय से काफी बीमार चल रही थी, जिसके कारण उसकी कॉलेज में अटेंडेंस (हाजिरी) कम हो गई थी।
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छात्रा की मौत के बाद से यूनिवर्सिटी स्टूडेंट हंगामा करने लगे थे।

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मेरठ कॉलेज के वरिष्ठ छात्रनेता विजित तालियान ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि अनु का परिवार बेहद सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आता है। उसके पिता अपनी तीन बेटियों में से दो की शादी कर चुके थे और तीसरी बेटी अनु को पढ़ाकर उसका भविष्य संवारना चाहते थे। आरोप है कि विविव प्रशासन ने अनु को कम अटेंडेंस के एवज में भारी जुर्माना (पैसे) भरने को कहा और फीस जमा करने का निरंतर मानसिक दबाव बनाया। प्रबंधन ने उसे आगामी परीक्षाओं में न बैठने देने की सीधी धमकी भी दी थी, जिससे डिप्रेशन में आकर छात्रा ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
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आधी रात को गद्दे मंगाकर गेट पर सोए छात्र, पुलिस के साथ वार्ता विफल

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छात्रा को न्याय दिलाने के लिए आईआईएमटी यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ-साथ बाहरी छात्र संगठनों का भी भारी समर्थन मिल रहा है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के छात्रनेता शान मोहम्मद और मेरठ कॉलेज के छात्रनेता विजित तालियान के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र बुधवार की पूरी रात यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर डटे रहे।
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    रात 1:30 बजे मंगाए गए गद्दे: कड़कड़ाती और उमस भरी गर्मी के बीच छात्रों ने हार नहीं मानी और रात डेढ़ बजे गेट के सामने ही गद्दे बिछाकर वहीं रात काटी।
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    पुलिस प्रशासन की विफलता: देर रात हालात का जायजा लेने और धरना समाप्त कराने के लिए गंगानगर थाना पुलिस के साथ क्षेत्राधिकारी (CO) सुधीर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को समझाने और धरना खत्म करने का प्रयास किया, लेकिन छात्र इस बात पर अड़ गए कि जब तक विश्वविद्यालय के कुलपति (वीसी) स्वयं आकर उनकी मांगें नहीं सुनते, वे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। पिछले 22 घंटों में प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी छात्रों के बीच नहीं आया है।
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गर्ल्स हॉस्टल में नया विवाद: देर रात मेल फैकल्टी के घुसने का वीडियो वायरल

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इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने आग में घी का काम किया है।
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छात्राओं द्वारा बनाए गए इस वीडियो में विश्वविद्यालय के एक पुरुष शिक्षक लखविंदर सिंह रात के करीब 2:00 बजे गर्ल्स हॉस्टल परिसर के अंदर नजर आ रहे हैं, जहां उनकी छात्राओं के साथ तीखी बहस हो रही है। छात्राओं का गंभीर आरोप है कि शिक्षक ने हॉस्टल में घुसकर उनके साथ अभद्रता की और उन्हें तुरंत हॉस्टल खाली करने का तुगलकी फरमान सुना दिया। इस वीडियो के सामने आने के बाद छात्र सुरक्षा और विवि प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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आंदोलनकारी छात्रों की 8 सूत्रीय प्रमुख मांगें

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यूनिवर्सिटी गेट पर बैठे छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रबंधन लिखित में इन 8 प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं करता, उनका आंदोलन और तेज होगा:
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    वार्डन को हटाया जाए: महिला छात्रावास (Girls Hostel) की वर्तमान वार्डन को तुरंत बदला जाए, क्योंकि उन पर छात्राओं को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है।
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    तनाव मुक्त माहौल: यदि कोई छात्र किसी विषय में डिबार या बैक आता है, तो उस पर यूनिवर्सिटी द्वारा अनुचित मानसिक दबाव न बनाया जाए।
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    आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सहायता: फीस या हॉस्टल फीस के लिए किसी छात्र को प्रताड़ित न किया जाए। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन विशेष सहयोग प्रदान करे।
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    सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हों: अनु गुप्ता की मौत से जुड़े उस दिन के सभी महत्वपूर्ण सीसीटीवी (CCTV) फुटेज छात्रों और पुलिस के सामने सार्वजनिक किए जाएं।
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    रूममेट से बातचीत: अनु की रूममेट को सामने लाया जाए ताकि घटना के ठीक पहले की सच्चाई का पता चल सके।
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    निष्पक्ष जांच: पूरे प्रकरण की पुलिस और मजिस्ट्रेट स्तर पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
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    अधिकारियों पर कार्रवाई: एमबीए विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) और डीन को उनके पदों से तुरंत निलंबित किया जाए।
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    मुआवजे की मांग: मृतक छात्रा अनु के पीड़ित और गरीब परिवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि तुरंत दी जाए।
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आज शाम निकाला जाएगा कैंडल मार्च; परिजनों की मांग निष्पक्ष न्याय की

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गंगानगर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के बाद अनु के पिता ओमकार गोयल अपनी बेटी के पार्थिव शरीर को लेकर सहारनपुर लौट गए हैं, जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जाने से पहले उन्होंने रुंधे गले से कहा कि उनकी बेटी तो अब वापस नहीं आएगी, लेकिन विविव प्रशासन के जिन भी लोगों ने उसे इस हाल में पहुंचाया है, उन्हें कानून कड़ी से कड़ी सजा दे ताकि किसी और की बेटी के साथ ऐसा न हो।
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इधर मेरठ में छात्रों ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया कि आज देर शाम आईआईएमटी यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर अनु की आत्मा की शांति के लिए एक विशाल कैंडल मार्च निकाला जाएगा। छात्र नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल अनु के लिए नहीं है, बल्कि देश भर की यूनिवर्सिटीज में फीस और अटेंडेंस के नाम पर होने वाले संस्थागत उत्पीड़न (Institutional Harassment) के खिलाफ एक शंखनाद है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और वायरल वीडियो व अन्य साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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