शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुके उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित IIMT विश्वविद्यालय (IIMT University) के लिए यह एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक दिन रहा। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह (3rd Convocation Ceremony) में काले गाउन और पारंपरिक दीक्षांत टोपियों में सजे हजारों विद्यार्थियों के चेहरों पर अपनी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने की चमक और भविष्य की उम्मीदें साफ नजर आ रही थीं। इस महाआयोजन में लगभग 4,000 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान कर उन्हें उनके सुनहरे भविष्य की ओर विदा किया गया। दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए, बल्कि उनके अभिभावकों और गुरुजनों के लिए भी एक भावुक और गर्व से भर देने वाला पल साबित हुआ।READ ALSO:-बिजनौर में खून से लाल हुई कांशीराम कॉलोनी: मांग सजने से पहले उठा 18 साल की कशिश का जनाजा, शादीशुदा 'सनकी' प्रेमी ने सीने में उतारे 6 चाकू; फिर अपनी भी रेत ली गर्दन
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समारोह में मुख्य अतिथि, शिक्षाविदों, राजनेताओं और गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। पूरे विश्वविद्यालय प्रांगण को दुल्हन की तरह सजाया गया था। आइए, इस भव्य दीक्षांत समारोह के हर एक महत्वपूर्ण पहलू, अतिथियों के प्रेरक संदेशों और विद्यार्थियों की खुशी को विस्तार से जानते हैं।
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आंकड़ों में IIMT का दीक्षांत समारोह: 3,687 डिग्रियां, 203 गोल्ड मेडल और 29 PhD

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दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सफलता का सबसे बड़ा पैमाना होता है। IIMT विश्वविद्यालय के इस तृतीय दीक्षांत समारोह में उपलब्धियों का एक विशाल सागर देखने को मिला।
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    कुल डिग्रियां: समारोह के दौरान विभिन्न स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के कुल 3,687 छात्र-छात्राओं को उनकी उपाधियां (Degrees) सफलतापूर्वक प्रदान की गईं।
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    स्वर्ण पदक (Gold Medals): अपनी कक्षाओं और पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 203 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। जब इन विद्यार्थियों के गले में सोने का तमगा पहनाया गया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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    शोधार्थियों का सम्मान: शिक्षा के सर्वोच्च शिखर यानी शोध (Research) के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले 29 शोधार्थियों को पीएचडी (Ph.D.) की मानद उपाधि प्रदान की गई।
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    मंच पर विशेष सम्मान: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने हाथों से मंच पर 17 चुनिंदा और अति-मेधावी विद्यार्थियों को विशेष रूप से डिग्री व स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया। यह पल उन 17 विद्यार्थियों के लिए जीवन भर की एक अविस्मरणीय याद बन गया।
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मुख्य अतिथि का संबोधन: 'भारत माता की जय' से 'विकसित भारत 2047' तक का विजन

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने ओजस्वी और प्रेरक भाषण से वहां मौजूद हजारों युवाओं में एक नई ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का संचार कर दिया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत पूरे जोश के साथ ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से की, जिसके बाद पूरे पंडाल ने एक सुर में इस नारे को दोहराया।
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NAAC 'A' ग्रेड के लिए दी बधाई: उपराष्ट्रपति ने IIMT विश्वविद्यालय के प्रबंधन, शिक्षकों और छात्रों को हाल ही में प्राप्त हुए NAAC 'A' ग्रेड (नैक ए ग्रेड) के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह ग्रेड संस्थान की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास का प्रमाण है।
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नवाचार (Innovation) और राष्ट्र सेवा पर जोर: छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "शिक्षा का अर्थ केवल किताबें पढ़ना या नौकरी पाना नहीं है, बल्कि शिक्षा को सीधे तौर पर राष्ट्र की सेवा से जोड़ा जाना चाहिए।" उन्होंने युवाओं को नवाचार (Innovation), उद्यमिता (Entrepreneurship) और स्टार्टअप्स (Startups) के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि भारत के युवा अब केवल नौकरी मांगने वाले (Job Seekers) नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले (Job Creators) बन रहे हैं।
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मेरठ के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर मेरठ के तेजी से हो रहे विकास की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने 'नमो भारत' (रैपिड रेल) और मेरठ मेट्रो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये अत्याधुनिक परिवहन परियोजनाएं मेरठ को दिल्ली और आसपास के अन्य प्रमुख शहरों से बेहतरीन कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक और शैक्षणिक विकास को एक अभूतपूर्व गति मिलेगी, जिसका सीधा फायदा यहां के युवाओं को होगा।
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विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका: भारत सरकार के सबसे बड़े विजन 'विकसित भारत 2047' (Viksit Bharat 2047) का जिक्र करते हुए उन्होंने मंच से स्पष्ट किया कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह एक पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र होगा। इस महान लक्ष्य को प्राप्त करने में आज के इन युवा स्नातकों की ही सबसे महत्वपूर्ण और अग्रणी भूमिका होगी।
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संस्कार और सम्मान की सीख: अपने भाषण के अंत में उपराष्ट्रपति ने एक बहुत ही मार्मिक और जीवनोपयोगी सीख दी। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे चाहे जीवन के किसी भी मुकाम पर पहुंच जाएं, सफलता के कितने ही ऊंचे शिखर छू लें, लेकिन अपने माता-पिता और गुरुजनों के त्याग और योगदान को कभी न भूलें। "उनका हमेशा सम्मान करें, क्योंकि यही वह संस्कार और नींव है, जो आपको जीवन में आगे बढ़ने की सही और सकारात्मक दिशा देगी।"
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कुलाधिपति की शपथ और मंत्री का प्रेरक संदेश

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दीक्षांत समारोह की सबसे पवित्र रस्मों में से एक होती है 'दीक्षांत शपथ'। IIMT विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (Chancellor) योगेश मोहन गुप्ता ने सभी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पद और गोपनीयता की दीक्षांत शपथ दिलाई। छात्रों ने अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश की भलाई के लिए करने का संकल्प लिया। कुलाधिपति ने छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय के प्रति उनके लगाव की सराहना की।
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समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने शिक्षा के महत्व को एक बेहद सुंदर और सटीक उदाहरण के माध्यम से समझाया। मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा, "जिस प्रकार एक छोटे से पौधे को एक विशाल वटवृक्ष बनने के लिए निरंतर पानी और खाद की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य के जीवन के संपूर्ण विकास, चरित्र निर्माण और सफलता के लिए उत्तम शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।" उनका यह संदेश छात्रों के दिलों को छू गया।
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मानद उपाधियां और प्रगति की उड़ान: कुलपति की रिपोर्ट

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IIMT विश्वविद्यालय न केवल अपने छात्रों को उपाधियां देता है, बल्कि समाज के उन उत्कृष्ट व्यक्तित्वों को भी सम्मानित करता है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण, आध्यात्म और विज्ञान में अमूल्य योगदान दिया है। इसी कड़ी में, इस तृतीय दीक्षांत समारोह में दो महान विभूतियों को मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि से अलंकृत किया गया:
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    स्वामी चिदानंद सरस्वती: समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागृति के लिए।
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    डॉ. हरी सिंह रावत: अपने क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए।
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प्रगति रिपोर्ट (Progress Report): विश्वविद्यालय की कुलपति (Vice-Chancellor) डॉ. दीपा शर्मा ने मंच से संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट IIMT के बढ़ते ग्राफ का आइना थी। डॉ. दीपा शर्मा ने गर्व के साथ बताया कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से NPTEL (National Programme on Technology Enhanced Learning) द्वारा विश्वविद्यालय को मिले सम्मान और तकनीकी दिग्गज Google (गूगल) के साथ हुए महत्वपूर्ण शैक्षणिक करार (Tie-up) का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे ये करार छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीक और कौशल से जोड़ रहे हैं।
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छात्रों के चेहरे पर खिली मुस्कान: सुनहरे भविष्य की ओर कदम

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दीक्षांत समारोह का असली आकर्षण वे छात्र होते हैं जिनकी मेहनत आज रंग ला रही होती है। डिग्रियां और मेडल हाथ में लिए छात्रों की आंखों में खुशी के आंसू और होठों पर मुस्कान थी। उन्होंने मीडिया और अपने जूनियर्स के साथ अपने अनुभव और लक्ष्य साझा किए:
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    पूर्णिमा (जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन): मास्टर डिग्री (PG) हासिल करने वाली पूर्णिमा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह दिन उनके और उनके परिवार के सालों के संघर्ष और मेहनत का सुखद परिणाम है। उन्होंने सफलता का श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों और दोस्तों को दिया। अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात करते हुए पूर्णिमा ने स्पष्ट किया कि उनकी ज्ञान की भूख अभी शांत नहीं हुई है और अब उनका अगला लक्ष्य इसी क्षेत्र में पीएचडी (Ph.D.) करना है।
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    सोनल (मीडिया प्रोफेशनल): सोनल के लिए यह दीक्षांत समारोह एक दोहरी खुशी लेकर आया। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पहले से ही मीडिया इंडस्ट्री में एक सफल एंकर (Anchor) और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (Executive Producer) के रूप में कार्यरत हैं। डिग्री हाथ में लेते हुए सोनल ने कहा कि यह शैक्षणिक योग्यता उन्हें उनके करियर में और अधिक ऊंचाइयों को छूने का आत्मविश्वास देगी। उनका लक्ष्य मीडिया जगत में अपनी एक मजबूत और अलग पहचान बनाना है।
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    अंजलि (बी.कॉम): बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की छात्रा अंजलि ने अपनी डिग्री लेते हुए भावुक होकर कहा कि कॉलेज की इस पूरी जर्नी (यात्रा) में उनके शिक्षकों (Teachers) का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। "टीचर्स के मार्गदर्शन और सपोर्ट के बिना यह मुकाम हासिल करना असंभव था," अंजलि ने कहा।
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जूनियर्स के लिए सफलता का 'गोल्डन मंत्र': डिग्री प्राप्त कर चुके इन सीनियर छात्रों ने विश्वविद्यालय में पढ़ रहे अपने जूनियर साथियों के लिए एक बहुत ही खास और संतुलित संदेश छोड़ा। उन्होंने कहा, "सिर्फ किताबी कीड़ा न बनें। पढ़ाई के साथ-साथ कॉलेज जीवन और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का भी भरपूर आनंद लें। सबसे अहम बात यह है कि परीक्षा या करियर को लेकर फालतू का तनाव (Stress) न पालें। अगर आप तनाव से दूर रहकर सही दिशा में ईमानदारी से मेहनत करेंगे, तो सफलता एक न एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी।"
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IIMT विश्वविद्यालय का यह तृतीय दीक्षांत समारोह मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि उन 4000 युवा सपनों की उड़ान का जश्न था, जो अब इस प्रांगण से निकलकर दुनिया के अलग-अलग कोनों में अपनी प्रतिभा का परचम लहराने के लिए तैयार हैं। यह समारोह आने वाले कई सालों तक मेरठ और IIMT के इतिहास में एक सुनहरे पन्ने के रूप में याद रखा जाएगा।
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