क्राइम डेस्क / एजुकेशन डेस्क: उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले IIMT University (आईआईएमटी विश्वविद्यालय) में 20 मई को हुई MBA की छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के एक हफ्ते बाद भी स्थिति स्पष्ट न होने और जिम्मेदार लोगों पर पुलिस-प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से छात्रों के सब्र का बांध टूट गया है। बुधवार (27 मई) को छात्र नेता विजित तालियान के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित छात्रों ने सड़क पर उतरकर कमिश्नरी कार्यालय का घेराव किया और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की गुहार लगाई।READ ALSO:-सोने-चांदी के दामों में ऐतिहासिक क्रैश: 2 दिन में ₹9,000 सस्ती हुई चांदी, सोना भी ₹1,800 रुपए तक टूटा; जानें बाजार का हाल
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छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक उनकी साथी अनु गुप्ता को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष बिना थमे, बिना झुके यूं ही जारी रहेगा। इस पूरे मामले ने निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा और प्रबंधन की जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला? (20 मई का वह मनहूस दिन)
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 20 मई को हुई थी, जब IIMT यूनिवर्सिटी के कैंपस में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की एक होनहार छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। एक युवा और होनहार छात्रा की इस तरह अचानक मौत की खबर ने पूरे विश्वविद्यालय परिसर को झकझोर कर रख दिया था।
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शुरुआती दौर में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस घटना को लेकर जो प्रतिक्रिया दी गई, उससे साथी छात्र संतुष्ट नहीं हुए। छात्रों का मानना है कि अनु की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अनसुलझे रहस्य छिपे हैं जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। घटना के तुरंत बाद से ही कैंपस में शोक और गुस्से की लहर दौड़ गई थी। सहपाठियों और छात्र नेताओं ने लगातार सवाल उठाए कि आखिर ऐसे सुरक्षित माने जाने वाले कैंपस में एक छात्रा की मौत कैसे हो गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
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कमिश्नरी पर फूटा छात्रों का गुस्सा: 'न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष'
\r\n\r\nबुधवार को मामले में एक नया मोड़ तब आया जब विश्वविद्यालय कैंपस से निकलकर यह आंदोलन सड़क और प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुँच गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत, छात्र नेता विजित तालियान के साथ बड़ी संख्या में छात्र एकजुट हुए और उन्होंने कमिश्नरी कार्यालय तक एक बड़ा मार्च निकाला।
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कमिश्नरी पहुँचकर छात्रों ने न सिर्फ धरना दिया बल्कि पुलिस, प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथ में अनु की तस्वीरें और न्याय की मांग करने वाले बैनर-पोस्टर थे।
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छात्रों ने लगाए ये गंभीर आरोप: प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा आरोप था कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। घटना को बीते कई दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन जिम्मेदार लोगों पर कोई सख्त और कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, जिनकी लापरवाही या संलिप्तता के कारण अनु गुप्ता की जान गई। प्रशासन की इस सुस्ती और चुप्पी ने छात्रों के गुस्से की आग में घी डालने का काम किया है।
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छात्रों की 3 प्रमुख मांगें (Key Demands of Protesting Students)
\r\n\r\nकमिश्नरी कार्यालय पर धरने पर बैठे छात्रों ने स्थानीय प्रशासन और सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी झूठे आश्वासन से पीछे नहीं हटने वाले हैं:
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- \r\n निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच: पूरे मामले की लीपापोती करने के बजाय, किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय प्रशासनिक टीम से अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत की गहन जांच कराई जाए।\r\n \r\n
- \r\n दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी: घटना से जुड़े जो भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार लोग हैं, चाहे वे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, उन पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
- \r\n पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा: अनु के परिवार को इस कठिन समय में न्याय दिलाया जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उचित जवाबदेही तय की जाए।\r\n \r\n
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कैंपस में पहले से ही सुलग रही थी विरोध की आग
\r\n\r\nयह कोई पहला दिन नहीं था जब छात्र इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे थे। 20 मई को अनु गुप्ता की मौत के बाद से ही IIMT यूनिवर्सिटी के कैंपस में लगातार विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी था।
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विश्वविद्यालय गेट पर हुआ था धरना-प्रदर्शन: इससे पहले छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार (Main Gate) पर एक बड़ा धरना-प्रदर्शन किया था। उस धरने में विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ-साथ बाहरी छात्र नेताओं और विभिन्न छात्र संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस वक्त माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि छात्र नेताओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच सीधे तौर पर बातचीत करनी पड़ी थी।
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करीब एक घंटे तक चली इस गरमागरम बहस और बातचीत के बाद, प्रशासन द्वारा कुछ आश्वासन दिए जाने पर अस्थायी तौर पर वह धरना खत्म किया गया था। लेकिन छात्रों का आरोप है कि वह आश्वासन केवल उन्हें शांत करने का एक छलावा था।
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"शिक्षा का व्यापारीकरण हो गया है, संवेदनाएं मर चुकी हैं"
\r\n\r\nकमिश्नरी पर हुए प्रदर्शन से कुछ दिन पहले ही साथी छात्रों ने अनु गुप्ता की आत्मा की शांति के लिए कैंपस में एक भावुक शोकसभा (Condolence Meeting) का भी आयोजन किया था। इस शोकसभा में आंसुओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली थी।
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छात्र नेताओं ने अत्यंत तीखे शब्दों में IIMT प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज के दौर में शिक्षा पूरी तरह से एक व्यवसाय (Business) बन चुकी है।
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\r\n\r\n\r\n"जिस शिक्षण संस्थान में मानवीय संवेदनाएं (Emotions and Empathy) पूरी तरह से खत्म हो चुकी हों और जहां शिक्षा का केवल व्यापार किया जा रहा हो, वहां पढ़ रहे हजारों छात्रों का भविष्य और जीवन कैसे सुरक्षित हो सकता है?" — छात्र नेता\r\n
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छात्रों ने साफ तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और असंवेदनशीलता के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका मानना है कि जब किसी छात्र के साथ कोई दुर्घटना होती है, तो संस्थान अपनी जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले को दबाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
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आगे क्या? बड़े आंदोलन की खुली चेतावनी
\r\n\r\nकमिश्नरी पर हुए इस विशाल प्रदर्शन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। छात्र नेता विजित तालियान और उनके समर्थकों ने पुलिस और जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके द्वारा उठाई गई मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा।
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छात्रों का कहना है कि वे इस मुहिम को एक व्यापक स्तर पर लेकर जाएंगे और पूरे शहर के अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्रों को भी अपने साथ जोड़ेंगे। यदि न्याय मिलने में देरी हुई, तो वे सड़कों पर चक्का जाम करने और उग्र आंदोलन करने के लिए भी मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और IIMT विश्वविद्यालय प्रबंधन की होगी।
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फिलहाल, पूरा शहर और छात्र समुदाय प्रशासन के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस-प्रशासन छात्रों के इस बढ़ते दबाव के बाद अनु गुप्ता मौत मामले की फाइलों को नए सिरे से खंगालकर सच्चाई को सामने लाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। एक बात तय है, अनु के साथी छात्र इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.