मेरठ शहर में मानसून के सक्रिय होते ही एक बार फिर प्रशासन और नगर निगम के दावों की सच्चाई पानी में तैरती हुई नजर आई है। जुलाई महीने की इस तेज और झमाझम बारिश के बाद मेरठ में बारिश और जलभराव की ऐसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिसने पूरे शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। मंगलवार को हुई लगभग 68.2 मिलीमीटर बारिश ने शहर के कई इलाकों को तालाब में तब्दील कर दिया। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने से लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नाले ओवरफ्लो होने और जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण मेरठ में बारिश और जलभराव एक बड़ा संकट बनकर उभरा है। Read also:-मेरठ में नगर निगम की लापरवाही का दिखा खौफनाक मंजर: उफनाते नाले में समा गई Flipkart डिलीवरी बॉय की बाइक, बाल-बाल बची जान
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पॉश कॉलोनियों से लेकर सरकारी परिसरों तक जलभराव

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शहर की पॉश कॉलोनियां भी इस जलभराव से अछूती नहीं रही हैं। साकेत, शास्त्री नगर, माधवपुरम, देवलोक कॉलोनी और ट्रांसपोर्ट नगर समेत कई प्रमुख रिहायशी इलाकों में पानी लोगों के घरों के अंदर तक पहुंच गया है। घरों के ड्रॉइंग रूम और बेडरूम तक में गंदा पानी घुसने से लोगों को काफी आर्थिक और मानसिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि आम जनता के घरों के साथ-साथ सरकारी तंत्र के प्रमुख दफ्तर भी इस जलभराव का शिकार हुए हैं। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) कार्यालय, महापौर कैम्प कार्यालय और कमिश्नरी के आस-पास सहित कई बड़े सरकारी परिसरों में भी पानी भर गया। यह स्थिति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब शहर के वीआईपी और प्रशासनिक इलाके सुरक्षित नहीं हैं, तो आम कॉलोनियों का क्या हाल होगा।
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वाहनों के इंजन हुए बंद, लोगों ने लगाया धक्का

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सड़कों पर हुए भीषण जलभराव का सबसे ज्यादा खामियाजा दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को भुगतना पड़ा है। दिल्ली रोड, शास्त्री नगर मुख्य मार्ग और भूमिया पुल जैसे व्यस्त मार्गों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए। कई जगहों पर जलस्तर इतना ज्यादा था कि वाहनों के इंजन में पानी घुसने से गाड़ियां बीच सड़क पर ही बंद हो गईं।
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कामकाज के लिए निकले नौकरीपेशा लोगों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। घंटों जाम में फंसे रहने के बाद लोगों को पानी के बीच से धक्का लगाकर अपने वाहनों को बाहर निकालना पड़ा। मेरठ में बारिश और जलभराव का यह आलम देखकर स्थानीय नागरिकों का गुस्सा नगर निगम के प्रति साफ तौर पर भड़कता हुआ दिखाई दिया। 
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मेरठ में बारिश और जलभराव ने खोली नगर निगम की पोल

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हर साल मानसून आने से पहले नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा नाला सफाई और जलनिकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों की बारिश ने इन सभी दावों की पोल खोल कर रख दी है। जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह से फेल नजर आई। मुख्य नालों की समय पर सफाई न होने के कारण हल्की सी तेज बारिश में ही नाले उफान मारने लगे।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार जलभराव की शिकायत की थी, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। जलभराव के बीच अब बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। गंदा पानी घरों और सड़कों पर जमा होने से डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों की आशंका तेज हो गई है।
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आठ बिजलीघर ठप, पेयजल संकट से लोग बेहाल

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इस भारी बारिश का असर केवल यातायात और सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर की बिजली व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई। तेज बारिश और आंधी के कारण 33 केवी हाईटेंशन लाइनों में फाल्ट आ गए, जिससे शहर के करीब आठ प्रमुख बिजलीघर ठप हो गए। शारदा रोड, घंटाघर, मंगल पांडे नगर और विश्वविद्यालय रोड जैसे क्षेत्रों में 4 से 6 घंटे तक बिजली गुल रही।
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बिजली न होने के कारण लोगों के घरों में लगे इन्वर्टर जवाब दे गए, जिसके चलते पेयजल आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई। बिना बिजली और पानी के घरों में कैद लोग इस दोहरी मार से जूझते नजर आए। हालांकि, विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने बारिश के बीच ही मरम्मत का काम शुरू किया और देर शाम तक आपूर्ति बहाल करने में सफलता पाई, लेकिन तब तक मेरठ में बारिश और जलभराव के साथ-साथ बिजली संकट ने जनता की कमर तोड़ दी थी। 
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मौसम विभाग का पूर्वानुमान: अभी और सताएगी बारिश

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लगातार पड़ रही गर्मी और उमस से भले ही इस बारिश ने कुछ राहत दी हो, लेकिन जलभराव की आफत ने इस राहत को मुसीबत में बदल दिया है। दूसरी तरफ, किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। धान, ज्वार और गन्ने की फसलों के लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद साबित होगी, जिससे किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
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मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में मौसम का मिजाज ऐसा ही रहने वाला है। 10 से 12 जुलाई तक रुक-रुककर मध्यम से तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में यदि प्रशासन ने तुरंत कोई कड़े कदम नहीं उठाए, तो मेरठ में बारिश और जलभराव की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। 
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कुल मिलाकर, मानसून की इस पहली बड़ी दस्तक ने मेरठ शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर की जमीनी हकीकत बयां कर दी है। मेरठ में बारिश और जलभराव की समस्या अब केवल एक मौसमी परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नगर निगम अपनी गलतियों से सबक लेते हुए आने वाले दिनों में भारी बारिश से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाता है, या फिर शहरवासियों को इसी तरह घुटनों तक भरे पानी में अपनी दिनचर्या पूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जलनिकासी का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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